मंगलवार, 13 दिसंबर 2022

 



सत्तर के दशक में कर्जदार धर्म तेजा का न सिर्फ भारत सरकार ने लंदन से प्रत्यर्पण कराया,बल्कि उसे कोर्ट से 3 साल की सजा भी दिलवाई

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सुरेंद्र किशोर

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भारत सरकार ने जयंती शिपिंग कंपनी के मालिक धर्म तेजा का 1971 में लंदन से भारत प्रत्यर्पण कराने में सफलता पाई थी।

  कर्ज लेकर चुकाने और टैक्स देने में विफल रहे आरोपी धर्मतेजा को भारत की अदालत ने तीन साल की सजा दी।

  वह 1975 में भारतीय जेल से रिहा हुआ।

सन 1977 में विदेश भाग गया।

सन 1985 में अमेरिका में उसका निधन हो गया।

धर्मतेजा ने जहाज खरीदने के लिए भारत सरकार से 20 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

उन दिनों जहाज खरीदने के लिए कंपनियों को केंद्र सरकार जहाज के मूल्य का 90 प्रतिशत तक कर्ज देती थी। हर जहाज की खरीद पर कमीशन मिलता था जो कंपनियों के निदेशक रख  लेते थे।लेन देन का यह काम विदेश में ही संपन्न हो जाता था।

 हालांकि तत्कालीन परिवहन राज्य मंत्री सी.एम.पुनाचा ने कहा था कि धर्म तेजा को 20 करोड़ नहीं बल्कि सिर्फ सवा छह करोड़ रुपए ही कर्ज मिला था।हालांकि उन्होंने यह  माना कि कंपनी की निजी पूंजी से कर्ज चैगुना अधिक है।

 साठ के दशक में सवा छह करोड़ रुपए भी एक बहुत बड़ी राशि थी।

 आंध्र प्रदेश का मूल निवासी धर्म तेजा अनिवासी भारतीय था।साठ के दशक में उसने अपनी शिपिंग योजना से तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रभावित कर दिया था।

  धर्मतेजा पर आरोप लगा कि वह पैसे लिचेस्टाइन बैंक के अपने निजी खाते में जमा करता था।

फिर वह देश छोड़कर  भाग गया।सन 1970 में लंदन में उसे गिरफ्तार किया गया।भारत सरकार के प्रयास से उसका प्रत्यर्पण हुआ।

उस पर मुकदमा चला और भारतीय अदालत ने धर्म तेजा को  सजा दी।

 उससे पहले लंदन की एक अदालत में धर्मतेजा ने आरोप लगाया था कि उसने एक बड़ी कांग्रेसी नेत्री को चुनाव में जीप खरीदने के लिए पैसे दिए थे।

दो सत्ताधारी कांग्रेसी नेताओं ने एक अखबार को 10 लाख रुपए चंदा देने का दबाव बनाया था ।

पर मैंने नहीं दिया।इसलिए सरकार नाराज होकर मुझे तंग करना चाहती है।

यह खबर उन दिनों अखबारों में छपी थी जिसका कोई खंडन नहीं आया था।

   धर्म तेजा की कहानी इस देश में कतिपय सत्ताधारी नेताओं, कई अफसरों  और  कुछ व्यापारियों की अपवित्र साठगांठ की कहानी है।

यानी ऐसी साठगांठ की शुरुआत  आजादी के तत्काल बाद ही हो चुकी थी।

यह जरुर है कि आजादी के बाद के प्रारंभिक वर्षों में घोटाले कम होते थे।घोटालों की रकम भी आम तौर पर अपेक्षाकृत कम ही रहती थी।

तब लोकलाज थोड़ा बचा हुआ था।पर, अब छोटे घोटालों ने बटवृक्ष का रूप धारण कर लिया है।

अब कई ‘‘आधुनिक धर्म तेजाओं’’ के प्रत्यर्पण की इस देश में प्रतीक्षा हो रही है।

   धर्म तेजा ने दावा किया था कि वह एक राष्ट्रवादी परिवार से हैं ।

सन 1922 में उसके जन्म के समय महात्मा गांधी उसके घर मंे ही थे।

 तेज तर्रार धर्म तेजा, विजयलक्ष्मी पंडित के एक अत्यंत करीबी रिश्तेदार के जरिए तत्कालीन प्रधान मंत्री नेहरू के नजदीक पहुंचा था।उनका करीबी बना।

नेहरू परिवार के एक करीबी ने लिखा है कि इंदिरा गांधी उनकी आवभगत किया करती थीं।खुद नेहरू उसके काम  और व्यापारिक प्रस्तावों से प्रभावित थे।

 नेहरू के 13 साल तक निजी सचिव रहे एम.ओ.मथाई के अनुसार  नेहरू को  पैसे का तो कोई लोभ नहीं था।पर,संभव है कि वह यह समझते हों कि धर्म तेजा देश के विकास में मददगार होगा।

धर्मतेजा का दावा था कि उसने कुछ विदेशी हस्तियों से  जवाहरलाल नेहरु की मुलाकात करवाई थी।

   परिवहन और जहाज रानी मंत्रालय के तत्कालीन सचिव डा.नगेंद्र सिंह ने धर्म तेजा के प्रति प्रधान मंत्री की मेहरबानी पर एतराज किया था।

उन्होंने मथाई से मिलकर अपना एतराज जताया था।डा.सिंह मानते थे कि धर्म तेजा सरकार को नुकसान पहुंचा सकता है।

 धर्म तेजा ने अपने धंधे को जारी रखने के लिए इस देश की प्रभावशाली हस्तियों के रिश्तेदारों को अपनी कंपनी से जोड़ा।

वित्तीय कुप्रबंधन के कारण जब जयंती शिपिंग कंपनी के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए तो संसद में डाह्या भाई पटेल ने,जो सरदार पटेल के पुत्र थे, आवाज उठाई।इंदिरा गांधी सरकार को जांच करानी पड़ी।

जांच रपट के आधार पर सी.बी.आई.ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

कोर्ट ने आरोपों को सही मान कर धर्म तेजा को सजा सुनाई।

 भारत सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यपालिका के बीच  धर्म तेजा को लेकर समय -समय पर मतभेद उभरे।

पर,तब के दिग्गज प्रतिपक्षी नेताओं ने अक्सर धर्म तेजा के कारनामों को उजागर ही किया।

डा.राम मनोहर लोहिया ने तब संसद में यह आरोप लगाया था कि प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने धर्म तेजा से महंगा ‘‘मिंक कोट’’ उपहार के रूप में  स्वीकार किया है।

उसे सरकार के पास  जमा नहीं किया गया।जब इस पर हंगामा हुआ तो इंदिरा गांधी ने उस कोट को बाद में जमा करवा दिया।दूसरी ओर, एक अन्य प्रधान मंत्री ने बाद के वर्षों में सार्वजनिक रूप से यह कह दिया था कि धर्म तेजा ने देश से जितना लिया,उससे अधिक देश को दिया है।हालांकि कोर्ट और आयकर महकमे की राय  अलग रही।

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वेबसाइट-मनीकंट्रोल हिन्दी पर 10 दिसंबर 22 को प्रकाशित 

     


 अरे भई,जेपी गंगा पथ को जेपी गंगा पथ ही रहने दो ,

क्यों खामख्वाह उसे ‘मरीन ड्राइव’ नाम दे रहे हो ?!

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सुरेंद्र किशोर

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यदि आपको सड़क जाम की महा विपत्ति में फंसे बिना पटना के गांधी मैदान से पटना एम्स पहुंचना हो तो जेपी गंगा पथ से गुजरिए।

कल मैंने वही सुगम राह पकड़ी थी।

  पर,गांधी मैदान और जेपी गंगा पथ के बीच के संपर्क मार्ग पर एक सरकारी साइन बोर्ड देखकर मुझे झटका लगा।

उस पर लिखा है--‘मरीन ड्राइव’ !

 उस साइन बोर्ड पर तीर का निशान बनाकर यात्रियों को यह निदेश दिया गया है कि आप ‘मरीन ड्राइव’ की ओर जाइए।

मुम्बई में समुद्र किनारे की सड़क को मरीन ड्राइव कहा जाता है।

क्योंकि अंग्रेजी शब्द मरीन का अर्थ है समुद्री।

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अरे भइर्, नकल करने में थोड़ी अकल तो लगा लेते !

 अधिक से अधिक यहां ‘गंगा ड्राइव’ लिख सकते थे !

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पर,क्या कीजिएगा !

जिस राज्य में बी.पी.एस.सी.की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी सही -सही प्रश्न पत्र सेट करने वालों की कमी होती जा रही है,वहां नदी किनारे वाली सड़़क को मरीन ड्राइव लिख देने से किसी का क्या बिगड जाएगा !

हां, कोई बंबइया व्यक्ति पटना के इस नकली मरीन ड्राइव से कभी गुजरेगा तो जरूर हम बिहारियों पर एक बार फिर........!! 

  याद रहे कि यह गलती आम बिहारियों की नहीं,बल्कि अधपढ़ सरकारी बाबुओं की है जिन्होंने साइन बोर्ड पर मरीन ड्राइव लिखवाया। 

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 कल पहली बार मैं जेपी गंगा पथ से गुजरा।

कोरजी स्थित अपने आवास से गांधी मैदान यानी मुख्य पटना पहुंचने का एक सुगम विकल्प मिल गया।

  इससे पहले महा जाम में फंसने के डर से कई बार पटना की कम जरूरी यात्राएं मैं स्थगित करता रहा हूं।

दो दशक पहले तक पटना में जेपी गंगा पथ जैसे अद्भुत निर्माण  की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी।

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पुनश्चः

अक्सर कुछ अखबार यह लिख देते हैं कि छपरा के मशरख में फलां घटना हुई है।

जबकि लिखना यह चाहिए था-सारण जिले के मशरख में...!

छपरा एक नगर है।

वह सारण जिला और प्रमंडल का मुख्यालय है। छपरा में मशरख नाम का कोई मुहल्ला भी नहीं है।

छपरा से मशरख मीलों दूर है।

  खैर, हमारे कुछ अखबार मशरख को छपरा तक ही पहुंचाते हैं ! बड़ी कृपा !!

सड़क महकमे के हमारे अफसर तो मरीन

ड्राइव को मुम्बई से खीेंचकर पटना तक पहुंचा देते हैं।

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12 दिसंबर 22 


 सिंगापुर तब और अब

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सुरेंद्र किशोर

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भारत के अनेक समर्थ लोगों की यह राय रही है कि जरूरत पड़ने पर वे सिंगापुर के अस्पतालों पर सर्वोत्तम इलाज के लिए पूरा भरोसा कर सकते हैं।

   सिंगापुर जैसे एक छोटे देश ने कुछ ही दशकों में ऐसा कमाल कैसे कर दिया ?

याद रहे कि वह कभी मछुआरों और लुटेरों का देश था।

हमारे देश की तरह कभी सोने की चिड़िया नहीं था।

पर,हाल के दशकों में उसे ठीक कर देने का श्रेय ली कुआन शू को जाता है ।

वे सन 1959 से सन 1990 तक सिंगापुर के प्रधान मंत्री थे।

  उन्होंने देश को पूरी तरह बदल दिया।

वहां अन्य चीजें पटरी पर आ र्गइं ंतो अस्पताल भी ठीक हो गए।

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हां,शू ने शासन को टाइट करने के लिए थोड़ी कड़ाई जरूर की थी ।

 वैसी कड़ाई की भारत में आज भी कमी देखी जाती है।यहां शासन ढीला-ढाला है।

जिसे जब जो जी में आता है,करता रहता है।

अपवादों की बात और है।

यहां कुछ अधिक ही ‘‘लोकतंत्र’’ है।

इसे लूट तंत्र भी आप कह

सकते हैं।यहां सुधार की रफ्तार अत्यंत धीमी है।

लुटेरों और देशद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले शासकों को,यहां तक कि प्रधान मंत्री तक को भी जान से मारने की धमकी दी जाती है।

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 शू के सत्ता में आने से पहले सिंगापुर में प्रति व्यक्ति आय मात्र पांच सौ यू.एस.डाॅलर थी।

समय के साथ वह बढ़कर अब वहां की प्रति व्यक्ति जी.डी.पी. 60 हजार यू.एस.डालर से भी अधिक हो चुकी है।

 आजादी के तत्काल बाद की हमारी सरकार के बारे में ली कुआन शू की राय थी कि 


‘‘.................समस्याओं के बोझ के कारण प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने विचारों और नीतियों को लागू करने का जिम्मा मंत्रियों और सचिवों को दे दिया।

अफसोस की बात है कि वे लोग भारत के लिए वांछित परिणाम लाने में असफल रहे।’’

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 सिंगापुर की जब बात होती है तो यहां के कुछ लोग यह कहने लगते हैं कि वह छोटा देश है।

उसे ठीक करना आसान है।

भारत बड़ा देश है।

यह काम मुश्किल है। 

मेरी समझ से यह बहाना है।

दिल्ली व मुम्बई महानगर पालिकाएं तो छोटी-छोटी शासकीय इकाइयां ही हैं।

वहां के कूड़े तक साफ नहीं होते।

हर बरसात में भारी जल जमाव होता है।

सड़क जाम की समस्या तक दूर नहीं होती।

इसलिए कि वहां के भ्रष्टों के खिलाफ कठोर कारवाई नहीं होती।

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12 दिसंबर 22


 ब्राह्मण नहीं होते तो हम पूरे 

भारत को जल्द ही ईसाई बना देते

   ---सेंट फ्रांसिस जेवियर

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आज जे.एन.यू. में ब्राह्मण निशाने पर क्यों हैं ?

कभी सोचा है ?

दरअसल,मुगलों के समय युद्ध की सफलता का पैमाना यही था कि आपने कितने किलो जनेऊ इकट्ठे किए।

ब्राह्मण सनातन धर्म का वाहक था।

सेंट फ्रांसिस जेवियर ने कहा था कि ब्राह्मण नहीं होते तो वह पूरे भारत को जल्द ईसाई बना देता।

  उसने कोशिश भी की लेकिन सफल न हुआ।

     ---ब्रज मोहन सिंह,दैनिक जागरण,पटना

    13 दिसंबर 22

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पूर्व प्रधान मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कहा था कि आजादी की लड़ाई में उत्तर प्रदेश में सक्रिय सर्वाधिक संख्या में ब्राह्मण थे।

--पुस्तक ‘मंजिल से ज्यादा सफर’ से

पुस्तक लेखक- राम बहादुर राय

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13 दिसंबर 22


 हरिवंश रचित पुस्तक ‘‘सृष्टि का 

मुकुट: कैलास मान -सरोवर’’

के बारे मेें दो शब्द

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‘‘........वास्तव में शिव लोकहित के देवता हैं।

उनकी हर लीला में लोक मानस और लोक कल्याण प्रदर्शित होता है।

  ‘सृष्टि का मुकुट: कैलास-मान सरोवर’ यात्रा -वृतांत को लोकप्रिय पत्रकार हरिवंश ने बहुत डूब कर लिखा है।

बचपन में होश संभालने से लेकर उम्र का अधिकांश वक्त बिताने तक,वह इस यात्रा की अभिलाषा में रहे कि इस यात्रा को करना है।

  इसके लिए इस विषय पर छपी बहुतेरी पुस्तकें (अंग्रेजी-हिन्दी) पढ़तेे रहे।

........यात्रा के दौरान की हर बारीक से बारीक बात को जिस अंदाज में हरिवंश ने लिखा है ,वह साहित्य में यात्रा-संस्मरणों का दिलचस्प और कलेक्टिव डाॅक्यूमेंट है।.........’’

---  अतुल कुमार, हैदराबाद  

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‘मान्यता है कि हिमालय समान,पवित्र स्थान सृष्टि में नहीं है।

भारतीय मानस में जन्म-जन्मान्तर से कैलास दर्शन की साध रही है।

इसे तीर्थों का तीर्थ कहते हैं।

इस यात्रा की चाहत लम्बे समय से पत्रकार -सम्पादक हरिवंश को रही।

  पर,यह यात्रा आसान नहीं।

हिमालय, कैलास -मान सरोवर में कुछ है, शायद सृष्टि का अनजाना रहस्य !

  प्रकृति का वैभव, अध्यात्म का मर्म।

इस आकर्षण से बंधी रोमांचक यात्रा के संस्मरण।

इसे पढ़ते हुए पाठकों को भी कैलास मान -सरोवर की इस यात्रा के कठिन डगर से गुजरने का अहसास होेगा।’

  --- इसी पुस्तक का एक अंश   

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‘सृष्टि का मुकुट: कैलास मानसरोवर’

लेेखक - हरिवंश

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वाणी प्रकाशन,नयी दिल्ली,

शाखाएं-

पटना,इलाहाबाद और वर्धा

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शनिवार, 10 दिसंबर 2022

     कारण तो बता दो 

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फेसबुक संस्थान किसी व्यक्ति या संस्था का एकाउंट बंद या निलंबित करने के साथ ही उसका कारण भी उसे बताए जिसका एकाउंट वह बंद या निलंबित कर रहा है।

बताए कि

1-क्या एकतरफा सामग्री पोस्ट हो रही है ?

2.-क्या झूठी सामग्री आ रही है ?

3.-क्या मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की जा रही है ?

या 4-कोई अन्य कारण है ?

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सुरेंद्र किशोर

10 दिसंबर 22


गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

 देश-प्रदेश की 7 दिसंबर, 22 की खबरें

जो 8 दिसंबर यानी आज के अखबारों में छपीं।

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सुरेंद्र किशोर

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  कल्पना कीजिए कि यह विवरण 200 साल तक मौजूद रह जाए !

उस समय की पीढ़ी इसे पढ़ेगी तो उसे कैसा लगेगा ?

वह पीढ़ी आसानी से सौ साल पहले की खबरों की तुलना तब के समय की स्थिति से करने की स्थिति में होगी।

अल बरूनी ने लिखा था कि 700 साल पहले हिन्दुस्तान के लोग क्या खाते थे ! वह दिलचस्प विवरण अब भी उपलब्ध है।

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खबरें 

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राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का सुप्रीम कोर्ट से रद होना संसदीय संप्रभुता से गंभीर समझौता

---उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़

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जल्द ही भारत विश्व का ऐसा पहला देश बन जाएगा जहां  चलेगी ऐसी लू जो इंसान के लिए बर्दाश्त के बाहर होगी

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बिहार के गोपालगंज जिले के माझा में शिक्षक के घर चल रहा था (राज्य सरकार का)अंचल कार्यालय

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पश्चिम बंगाल के तृणमूल विधायक ही तय करते थे शिक्षक बनने के लिए कौन दे सकता है मोटी रकम

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रिश्वत नहीं देने पर कोलकाता पुलिस ने जब्त की पद्मभूषण राशिद खान की कार

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 हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति जिले के चंडीगढ़ गांव में रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता।

प्रयोग होने पर जुर्माना लगता है।

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में अवरोध खासकर नए सदस्यों के लिए पीड़ादायक

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पूर्व आई.ए.एस.व ‘लोकसत्ता’ के नेता जयप्रकाश नारायण ने लिखा है कि ‘‘हमें अगले दो दशकों तक आर्थिक विकास पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है।

कानून का शासन,

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य ,

नियोजित शहरीकरण और ग्रामीण -शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क देश की समृद्धि ,

स्थिरता एवं सामाजिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण है।

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ऊपर लिखी सारी खबरें आज के दैनिक जागरण,पटना में प्रकाशित।

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फरार आई.पी.एस.आदित्य ने 11 साल की नौकरी में आय से 131 प्रतिशत अधिक की संपत्ति बनाई

(अब तक तो अपराधी फरार होते थे।अब आई.पी.एस.अफसर भी फरार होने लगे।घोर कलयुग !!!)

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पटना रिंग रोड: जनवरी के अंत तक एन एच ए आई को मिलेगी जमीन

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ईको पार्क को छोड़ पटना के सभी इलाकों में बढ़ा प्रदूषण

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अमेरिका में लोडेड हैंडगन रखने वाले दोगुने हुए

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सभी खबरें दैनिक भास्कर, पटना से 

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बनेगी विशेष टास्क फोर्स,जिला अस्पतालों से हटेगा अतिक्रमण

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पांच साल में पटना में 5 प्रतिशत बढ़े मध्यवर्गीय परिवार

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पटना हाईकोर्ट ने बिना बेहोशी का इंजेक्शन दिये नसबंदी करने के मामले में केंद्र और राज्य से जवाब मांगा।

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26 नवंबर, 22 तक देश के 50 कस्बों में पहुंची 5 जी सेवा

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चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण सीमा रेखा को बदलने के प्रयासों को हम नहीं बर्दाश्त करेंगे--भारत के विदेश मंत्री

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ये खबरें ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित

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बिहार में खान विभाग की होगी अपनी पुलिस

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खाद -कीटनाशक के बेतहाशा प्रयोग ने मिट्टी की सेहत बिगाड़ी 

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कोरोना के बाद अस्पतालों में 30 प्रतिशत बढ़े मानसिक रोगी

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पटना में दिन भर जाम

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टै्रफिक पुलिस के लिए चलंत शौचालयों की व्यवस्था होगी पटना में 

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दैनिक हिन्दुस्तान,पटना से 

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8 दिसंबर 22

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