रविवार, 12 मई 2024

 अति सर्वत्र वर्जयेत्

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चाणक्य से किसी ने पूछा--

‘‘जहर क्या है ?’’

चाणक्य ने कहा --

‘‘ हर वो चीज जो जिन्दगी में आवश्यकता से अधिक होती है,वही जहर है।

फिर चाहे वो ताकत हो,

धन हो,

भूख हो,

लालच हो,

अभिमान हो,

आलस हो,

या घृणा होे।

आवश्यकता अधिक जहर ही हैं’’

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शनिवार, 11 मई 2024

    बिना विचारे जो करे.........!.

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सुरेंद्र किशोर

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नब्बे के दशक में मंडल आरक्षण विरोधियों से मैं सवाल करता था--

‘‘आप लोग पिछड़ा आरंक्षण का विरोध क्यों कर रहे हैं ?

क्या इस विरोध का परिणाम समझते हैं ?

परिणाम यह होगा कि आज गज नहीं फाड़िएगा तो कल थान हारना पड़ेगा।’’

(कांग्रेस के पूर्व विधायक हरखू झा मेरी इस बात

के आज भी गवाह हैं।वे बिहार विधान सभा के प्रेस रूम में हमलोगों के साथ बैठते थे।मेरी यह बात सुनते थे।बाद के दिनों में झा जी ने एक बार मुझसे कहा भी कि आप तो गज और थान वाली बात कहते ही रहते थे।) 

  आरक्षण के विरोध का क्या नतीजा हुआ ?

लंबे समय तक बिहार में ‘जंगल राज’ रहा।आज भी बिहार में कोई योग्य सवर्ण भी मुख्य मंत्री बनने के लिए तरस जाता है।

दरअसल आजादी के बाद कांग्रेस को बिहार विधान सभा में जब भी खुद का पूर्ण बहुमत मिला,उसने चुन-चुन कर सवर्ण को ही मुख्य मंत्री बनाया।

तब तो किसी सवर्ण ने इस बात को नहीं उठाया।

पर आज कुछ लोगों को लग रहा है कि 1990 से ही लगातार पिछड़ा ही मुख्य मंत्री क्यों है ?

नब्बे के दशक के कुछ आरक्षण विरोधियों को अपनी गलती का आज एहसास हो रहा है।पर,सबको नहीं।

 नब्बे के दशक में कुछ आरक्षण विरोधी मेरे पीठ पीछे

यह कहकर मेरी आलोचना करते थे कि यह पत्रकार

तो सवर्ण होते हुए भी एक खास पिछड़ा नेता का दलाल बन गया है।

उस पिछड़ा नेता का वे नाम भी लेते थे।

जबकि बाद के वर्षों में उसी पिछड़ा नेता ने मुझे एक अखबार की नौकरी से हटवा दिया था।क्योंकि मैं आरक्षण का तो समर्थक था,किंतु भ्रष्टाचार-अपराध का नहीं।

मैं तो भई आरक्षण का समर्थन इसे संवैधानिक प्रावधान मानकर व समाज में समरस स्थिति बनाये रखने के लिए करता था।

वैसे मेरे कुछ करीबी रिश्तेदारों ने तब (मेरे आरक्षण समर्थन के कारण )मुझे पागल घोषित कर रखा था।

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कई दशक पहले जब मैं बिहार के समझदार कम्युनिस्ट नेताओं से पूछता था कि आप तो ईमानदार हैं।

किंतु भ्रष्ट और जातिवादी नेताओं व दलों का समर्थन आप लोग क्यों करते हैं ?

उनका जवाब होता था--‘‘हम सांप्रदायिक तत्वों यानी भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए ऐसा करते है।’’

मैं उन्हें कहता था कि इस तरीके से तो आप नहीं रोक पाएंगे।

वहीं हुआ भी।

आज भाजपा केंद्र व राज्य दोनों जगह सत्ता में है और कम्युनिस्ट लोग अपनी अदूरदर्शिता के कारण अपने अस्तित्व को बचाने के लिए हाथ -पैर मार रहे हैं।जबकि कम्युनिस्ट आंदोलन में एक से एक त्यागी-तपस्वी नेता व कार्यकर्ता रहे हैं।यदि वे अपनी कुछ नीतियों-रणनीतियों को सुधार कर लेते तो इस गरीब देश के लिए वे उपयुक्त थे।

चीन और रूस के कम्ुयनिस्टों ने तो देश,काल,पात्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां-रणनीतियां बदल लीं।पर भारत के कम्युनिस्टगण कालबाह्य विचारों की बंदरमूठ पकडे हुए हैं। 

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मेरे मित्र नीतीश कुमार दो बार राजग छोड़कर इस उम्मीद में कांग्रेस गठबंधन में गये थे ताकि कांग्रेस उन्हें अपने गठबंधन का नेता घोषित कर दे।

मैं पहले ही दिन से यह जानता था कि उन्हें कांग्रेस महत्व नहीं देगी।क्योंकि मनमोहन सिंह और नीतीश कुमार मंे भारी फर्क है।

नीतीश जी मुझसे पूछते तो मैं उन्हें असलियत बताता।

पर,बिना पूछे ऐसी सलाह देने पर नेता लोग बहुत नाराज हो जाते हैं।

क्योंकि कुछ खास अवसर पर वे खास तरह के ‘नशे’ में होते हैं।

अपने खुद के फायदे के लिए उनके कुछ करीब सलाहकार उन्हें गुमराह कर देते हैं।

ऐसा मैंने यहां इसलिए लिखा क्योंकि मैं नीतीश जी का प्रशंसक रहा हूं।

मैंने 1967 से मुख्य मंत्रियों को काम करते देर और करीब से देखा है।मैं अंतर कर सकता हूं।

नीतीश ने बिहार को काफी बदल दिया है।

ईमानदार हैं।वंशवादी-परिवारवादी नहीं हैं।सभी जातियों-धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलने की कोशिश करते हैं।

पर, गठबंधन बदल-बदल कर उन्होंने खुद ही अपना ज्यादा नहीं तो थोड़ा नुकसान तो कर ही लिया है।जिस तरह तीसरे क्लास का मेरा एक सहपाठी स्लेट पर अपना ही लिखा हुआ बाद में मिटा देता था।

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अभी लोक सभा चुनाव के लिए प्रचार हो रहा हैं।

 वोट डाले जा रहे हैं।

आज भी अनेक अदूरदर्शी नेता और एक हद तक मतदाता भी उसी तरह की अदूरदर्शिता का परिचय दे रहे हैं।

वे कौन -कौन नेता हैं,कौन दल है  और कौन सी गलतियां कर रहे हैं,वह सब

मैं 4 जून के बाद बता दूंगा।

अभी नहीं।

क्योंकि उससे अभी कोई लाभ भी नहीं।ध्यान रहे कि 4 जून के बाद देश मंे बहुत बड़ा बदलाव होने वाला है। 

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गिरधर कविराय

ने ठीक ही कहा है--

बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय,

काम बिगारे आपनो जग में होत हंसाय

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11 मई 24



 


शुक्रवार, 10 मई 2024

 


पद्म पुरस्कार ग्रहण करने के लिए मुझे भी आज यानी 9 मई को दिल्ली बुलाया गया था।

पर,अस्वस्थता के कारण मैं उस समारोह में शामिल नहीं हो सका।

शामिल हो पाता तो मुझे अच्छा लगता।

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सुरेंद्र किशोर

9 मई 24



 जरूरी थी बालि की हत्या

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यदि रावण को अंततः पराजित करना था तो उससे पहले बालि की हत्या जरूरी थी।

श्रीराम ने बालि को पेड़ की आड़ से छिपकर मारा।

इसके बावजूद उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहना किसी ने बंद नहीं किया।

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अब आप महाभारत काल पर आइए।

क्या सामान्य युद्ध नियमों पर चलकर कर्ण ,भीष्म,द्रोणाचार्य यहां तक कि दुर्योधन को मारना आसान काम था ?

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सुरेंद्र किशोर


बुधवार, 8 मई 2024

  अपरिपक्व भतीजे को मायावती ने शीर्ष पद से हटाया

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 अन्य परिवारवादी राजनीतिक दलों के सुप्रीमो 

अपरिपक्व उत्तराधिकारियों 

पर ऐसा ही कोई फैसला करंेगे ?

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नहीं करेंगे तो डूबेंगे।

डूबने के संकेत शायद 4 जून को ही मिल जाएं !!

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सुरेंद्र किशोर

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बसपा प्रमुख व पूर्व मुख्य मंत्री मायावती ने अपने भतीजे आकाश को अपरिपक्व व्यक्ति करार देते हुए उसे बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया।

साथ ही, मायावती ने उसे अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के अपने पुराने निर्णय को भी वापस ले लिया।

मायावती ने घोषणा की है कि आकाश में पूर्ण परिपक्वता आने तक उसे इन जिम्मेदारियों से दूर ही रखा जाएगा।

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काश ! इस देश के कुछ अन्य वंशवादी-परिवारवादी राजनीतिक दल भी मायावती का अनुकरण करते।

अन्य दल क्यों अनुकरण नहीं कर रहे हैं ?

उसका जवाब एक राजनीतिक प्र्रेक्षक ने मुझे दिया।

कहा कि अनिल अंबानी का व्यापार जब मंदा पड़ने लगा,तब क्या अनिल ने अपनी कंपनी किसी और को सिपुर्द कर दी !?

जब राजनीति, सेवा व त्याग की जगह व्यापार और वाणिज्य बन जाए,अधिकतर नेताओं की व्यक्तिगत संपत्ति अरबों में होने लगे  तो कोई अपने ‘व्यापार’ को किसी और को नहीं सौंप  देता।

भले व्यापार डूब जाए !!

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8 मई 24 


मंगलवार, 7 मई 2024

 जिनके यहां 25 करोड़ रुपए से अधिक नाजायज धन बरामद हो, उन आरोपियों की नार्को -ब्रेन मैपिंग-डीएनए टेस्ट का कानूनी प्रावधान हो

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सुरेंद्र किशोर

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आज के ‘‘प्रभात खबर’’ के अनुसार.

झारखंड के मंत्री आलमगीर के निजी सचिव के नौकर के घर से 35 करोड़ 23 लाख रुपए बरामद किए गए हैं।

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ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा है कि इन रुपयों से मेरा कोई संबंध नहीं है।

याद रहे कि झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन भी भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में इन दिनों जेल में हैं।

झारखंड से आए दिन भ्रष्टाचार व भारी धन की बरामदगी की खबरंे आती रहती हैं।

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सन 2000 में बिहार से काट कर झारखंड  अलग प्रदेश बना।

उससे पहले दशकों तक अलग प्रदेश की मांग के समर्थन में आंदोलन होता रहा।आंदोलन कारी झामुमो के नेताओं का आरोप था कि अविभिजित बिहार

ंके नेता गण हमारे संसाधनों को लूट कर हमें गरीब बनाये हुए हैं।संपन्नता के लिए हमें अलग राज्य चाहिए।

अब जब झारखंड बन गया तो क्या हो रहा है ?कौन संपन्न हो रहा है।झामुमो की ही वहां सरकार है।

आंदोलनकारी पार्टी की सरकार की मौजूदगी के बावजूद झारखंड को आज कौन लूट रहा है ?

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मंत्री आलमगीर,उनके पी.एस.और पी.एस.के नौकर का नार्को ,ब्रेन मैपिंग तथा अन्य टेस्ट जरूरी है ताकि सच्चाई का पता चल सके।ऐसे टेस्ट से

सच्चाई सामने आ ही जाएगी।

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पर,ऐसे टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।सिर्फ अदालती आदेश से ही ऐसे टेस्ट संभव हंै।अदालत आम तौर पर जल्दी ऐसे टेस्ट की अनुमति नहीं देतीं।

भ्रष्ट अफसरों,नेताओं और व्यापारियों के लिए यह अनुकूल स्थिति है।

वे झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों को चंबल के डकैतों की तरह लूट रहे हैं।इस कारण देश की गरीबी कम करने में देरी हो रही है।

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जांच एजेंसियों को आवश्यकतानुसार नार्को,ब्रेन मैपिंग और डी एन ए टेस्ट की अनुमित होनी चाहिए।,

इस संबंध में कड़ा कानून बने।

उस कानून को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल कर दिया जाना चाहिए ताकि उस कानून को अदालत में चुनौती न दी जा सके।

अन्यथा इन लुटेरों से यह देश नहीं बचेगा।

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7 मई 24  


शनिवार, 4 मई 2024

 लगता है कि कांग्रेस यही चाहती है कि जो गलती 

खुद उसने की,वही गलती भाजपा भी करे।

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सुरेंद्र किशोर

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यानी,कांग्रेस चाहती है कि भाजपा न तो भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई करे और न ही 

जेहादियों के खिलाफ एक शब्द का भी उच्चारण करे।

यदि भाजपा ने भी वही गलती की होती तो वह आज सत्ता में नहीं होती।

कल जनता उसे सत्ता से हटा देगी,इस बात की कोई गारंटी नहीं।

भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई का नतीजा है कि आज केंद्र सरकार का कर राजस्व सन 2014 की अपेक्षा बढ़कर तीन गुणा हो गया है।बढ़ता ही जा रहा है।

अन्य कामों को छोड़ भी दीजिए तो देश भर में आज बिजली हैं और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है।

1947 -1985 के काल खंड में कांगेसी सरकारों ने 100 सरकारी पैसों में से 85 पैसों की लूट नहीं करवा दी होती तो 80 करोड़ लोगों को आज अनाज नहीं देना पड़ता।

सिर्फ मनमोहन सिंह सरकार में 16 लाख करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।

इस देश की अदालत दोषी होने पर भी किसी प्रधान मंत्री को सजा नहीं देना चाहती अन्यथा अब तक आधे दर्जन पी.एम.सजा पा गये होते।

संभवतः इस देश की अदालत यह महसूस

करती है कि पी.एम.को सजा देने से देश की दुनिया भर में बदनामी होगी।

मोदी सरकार के 10 साल में मोदी या किस मंत्री पर घोटाले का केस चला ?

नहीं चला।क्योंकि उनके द्वारा कोई घोटाला नहीं हुआ।हां,केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार जरूर है जिसे रोकने में मोदी सरकार विफल है।वकील अश्विनी उपाध्याय ठीक कहते हैं कि उसके लिए कड़े कानून चाहिए। 

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सन 2014 के लोक सभा चुनाव में शर्मनाक पराजय के बाद सोनिया गांधी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.के.एंटोनी से कहा था कि आप हार के कारणों पर रपट बनाइए।

  एंटोनी ने रपट बनाई।

 सोनिया जी को दे दी।

उस रपट में अन्य कारणों के साथ- साथ यह भी लिखा गया था कि ‘‘मतदाताओं को, हमारी पार्टी अल्पसंख्यक की तरफ झुकी हुई लगी जिसका हमें नुकसान हुआ।’’

पर कांग्रेस हाईकमान ने एंटोनी की इस मूल बात को भी नजरअंदाज कर दिया।

याद रहे कि कांग्रेस अब भी उसी लाइन पर है।बल्कि अब तो कांग्रेस ने एक अतिवादी मुस्लिम संगठन से अपना संबंध पहले से भी अधिक मजबूत कर लिया।वह संगठन यानी प्रतिबंधित पी.एफ.आई. जिसका राजनीतिक संगठन -एस.डी.पी.आई.है,इस देश को इस्लामिक देश में बदलने के लिए हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।कहता है कि हम 2047 तक हम सफल हो जाएंगे।उसें अनेक वोट लोलुप गैर मुसलमान नेताओं का समर्थन जो हासिल हैं।

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इसके बावजूद कांग्रेस चाहती है कि भाजपा नेता पी.एफ.आई.यानी मुस्लिम आतंकवाद की चर्चा तक न करे।

जबकि जनता को बताना मोदी का कर्तव्य है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आ जाएगी तो पी.एफ.आई.का काम आसान हो जाएगा।

जिस तरह ममता बनर्जी सरकार की मेहरबानी से बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों का काम आसान हो गया है।

बी.बी.सी.के पूर्व संवाददाता डा.विजय राणा के अनुसार पश्चिम बंगाल के एक बड़े इलाके में कश्मीर जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है।संदेशखाली की घटना साफ संकेत दे रही है।

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4 अगस्त, 2005 को सांसद ममता बनर्जी ने नाटकीय ढंग से लोक सभा के स्पीकर के टेबल पर कागज का 

पुलिंदा फेंका था।

उसमें अवैध बंाग्लादेशी घुसपैठियों को भारत यानी पश्चिम बंगाल में मतदाता बनाए जाने के सबूत थे।

वाम मोर्चा शासन काल में उनके नाम पश्चिम बंगाल में भी गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची में शामिल करा दिए गए थे।बांग्ला देश की मतदाता सूची में भी उनके नाम थे।इसी का कागजी सबूत ममता के पास था।

ममता ने कहा था कि घुसपैठ की समस्या राज्य में महा विपत्ति बन चुकी है।

इन घुसपैठियों के वोट का लाभ सत्ताधारी वाम मोर्चा उठा रहा है।

ममता ने उस पर सदन में चर्चा की मांग की।

चर्चा की अनुमति न मिलने पर ममता ने सदन की सदस्यता

 से इस्तीफा दे देने के अपने निर्णय की घोषणा कर दी थी।

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यह और बात है कि घुसपैठियों पर ममता बनर्जी का रवैया अब पूरी तरह बदल चुका है।क्योंकि अब वे ममता के लिए ‘‘संपत्ति’’ बन चुके हैं।

ममता बनर्जी ने तो घुसपैठियों के वोट के लिए अपने रुख में परिवर्तन कर लिया।क्या नरेंद्र मोदी को भी घुसपैठियों के खिलाफ बोलना बंद कर देना चाहिए ?

यदि मोदी बंद कर देंगे तो उनके दल का भी जनता वही हाल करेगी जो हाल कांग्रेस का कर चुकी है और ममता की पार्टी का इस चुनाव करने वाली है,ऐसी उम्मी की जा रही हैै।

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2017 के आंकड़े के अनुसार इस देश में 5 करोड़ बांग्ला देश-रोहिंग्या घुसपैठिए थे।

अब तक उनकी संख्या दुगुनी हो चुकी होगी।धर्म परिवर्तन और लव जेहाद के जरिए हिन्दुओं की संख्या घटाई जा रही है सो अलग।उसके लिए विदेश से पैसे आ रहे हैं।

हावड़ा रेलवे स्टेश पर किसी भी दिन कोई भी जाकर उन घुसपैठियों की संख्या गिन सकता है।घुसपैठ में बोर्डर सिकुरिटी फोर्स में कई लोग घूसखोर हैं या दोतरफा आक्रमणों से फोर्स डरा हुआ है।

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हाल की खबर है कि ब्रिटेन सरकार अपने देश से हजारों अवैध घुसपैठियों को दो माह बाद से जबरन निकालना शुरू करेगी।

अमेरिका भी यही करेगा।पर भारत ?

भारत के कई भाजपा विरोधी दल यह चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में भले देश का एक और बंटवारा करना पड़े,पर अभी घुसपैठिए हमें वोट देकर सत्ता में पहुंचाते रहें।भाजपा इस पर आवाज उठाएगी तो हम कहेंगे कि वह हिन्दू-मुस्लिम कर रही है।

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याद रहे कि घुसपैठियों आदि के कारण देश के इस देश के कई जिलों-इलाकों में

हिन्दू आबादी का अनुपात घटता जा रहा है।जहां मुस्लिम आबादी 40 या 50 प्रतिशत से अधिक हो गई ,वहां कानून का शासन असंभव है।

मुख्य मंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने अपने शासनकाल में कहा था कि हमारे प्रदेश के सात जिलों में सामान्य प्रशासन अपना काम नहीं कर पा रहा है।उनका यह बयान मैंने जनसत्ता में पढ़ा था।

माकपा के शीर्ष नेताओं ने उन पर दबाव डाल कर बयान वापस करवाया।

पर,इस बीच माकपा को नुकसान हो चुका था।जेहादियों ने करीब 30 प्रतिशत मुसलमान वोट का रुख ममता की ओर कर दिया।

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मोदी सरकार सामान्य व शांतिप्रिय मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि जेहादी मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है या आवाज उठा रही है।

हथियारबंद जेहादी संगठन पी.एफ.आई.भी यह मानता है कि उसके साथ अभी 10 प्रतिशत मुसलमान भी नहीं हैं।

पर,शाहीनबाग जैसा धरना कांड करने व जहां -तहां दंगा करने के लिए 5 प्रतिश भी काफी है।

जनता नरेंद्र मोदी को इसीलिए बार -बार प्रधान मंत्री बना रही है और फिर बनाएगी ताकि वे भ्रष्टाचारियों और जेहादियों-घुसपैठियों के खिलाफ तो कार्रवाई करें किंतु शांतिप्रिय मुसलमानों की आर्थिक बेहतरी के लिए काम करें।वे कर भी रहे हैं।इसलिए 2024 भी मोदी का ही है,ऐसा मेरा अनुमान है। सन 1967 से चुनाव देखते रहने का अनुभव मुझे है।उस आधार पर कह रहा हूं।

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4 मई 24