रविवार, 25 अगस्त 2024

 (पुरुष) डाक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है।

फिर तो महिला चिकित्सक धरती की देवी कैसे नहीं है ?।

किसी देवी के साथ ऐसा सलूक ?!!

कहते हैं कि डायन भी एक घर बख्श देती है।

पर,राक्षस ??

वह तो किसी को नहीं बख्शता।

पर,लगता है कि हमारे सुप्रीम कोर्ट ने उन राक्षसों के 

कानूनी तरीके से सफाये का रास्ता साफ कर दिया है।

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साथ ही, एक बात और लगती है।

वह यह कि कभी देश को दिशा देने वाले बंगाल के भद्र लोक का विवेक ताजा घटना के बाद एक बार फिर जग रहा है।

‘‘ममता -मोह’’ कम होने के संकेत साफ हैं।

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क्या एक और ‘‘नन्दी ग्राम’’??

पता नहीं !

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सुरेंद्र किशोर

24 अगस्त 24



















 

शनिवार, 24 अगस्त 2024

 रांची के अलकायदा माॅड्यूल से संकेत साफ

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आत्म रक्षा के लिए आम लोगों को आंग्नेयास्त्रों के 

लाइसेंस देने में राष्ट्रवादी राज्य सरकारें उदारता दिखाएं।

अन्यथा, बाद में पछताना पड़ेगा यदि खुर्शीद-मणिशंकर

 की धमकी इस देश में भी अचानक लागू हो गयी !!

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        सुरेंद्र किशोर

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इस देश को दहलाने की कोशिश में लगे अल कायदा के जेहादियों की गतिविधियों की खबरें कल रांची से आई थी।

  उसी तरह की खबर आज के अखबारों में भी आई है।

इन खबरों के आए कई घंटे बीत गये।किंतु किसी तथाकथित सेक्युलर दल या नेता ने ऐसे भीषण व डरावने राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र पर अब तक चिंता प्रकट नहीं की है।

भला वे अपने वोट बैंक की कीमत पर ऐसा क्यों करेंगे ?!

उल्टे कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर यह धमकी दे चुके हैं कि बांग्ला देश भारत में भी दोहराया जा सकता है।

अब यह कल्पना कठिन नहीं है कि कैसी- कैसी शक्तियों के बल पर ‘‘दोहराने’’ की वे धमकी दे रहे हैं !!

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कुछ साल पहले इस देश के एक तथाकथित सेक्युलर मुख्य मंत्री के राज्य में जेहादियों के स्लीपर सेल की मौजूदगी के बारे में एक अंग्रेजी अखबार में सनसनीखेज खबर छपी थी।

जिस संवाददाता ने वह खबर लिखी थी,उसे मुख्य मंत्री ने बुलाया और कहा कि ऐसी खबरें मत छापिए।

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  संवाददाता ने मुझसे बाद में कहा कि कैसा मुख्य मंत्री है यह ?

यह तो जेहादियों के स्लीपर सेल के फलने-फूलने में मदद कर रहा है।

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भारत के अनेक वोट लोलुप नेताओं की ऐसी ही सांठगांठ वाली या शुतुरमुर्ग वाली मानसिकता रही है।ऐसे स्लीपर सेल किस राज्य में नहीं है ?

पचास के दशक को याद करिए।

तिब्बत पर कब्जा करने के बाद चीन भारत की भूमि पर जब कब्जा करने लगा तो भारतीय संसद में आवाज उठी।

प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि उस जमीन पर तो घास का तिनका भी नहीं उगता।यानी मेरे काम का नहीं !

उसके बाद चीन ने सोवियत संघ की पूर्व सहमति से 1962 में हम पर हमला किया और हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया।

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रांची में अल कायदा के जिस आंतकी माॅड्यूल का अब पता चल गया है,यदि उसके बाद भी हमारी सरकारें नेहरू की तरह सोयी रही तो हम बहुत बड़े खतरे में पड़ जाएंगे।

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ऐसे में उन राज्य सरकारों से, जो मुस्लिम वोट पर आश्रित नहीं हैं,अपील है कि वे उदारतापूर्वक लोगों को आग्नेयास्त्रों के लाइसेंस दें।

हां, वैसे लोगों को ही दें जिनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं चल रहा है।

 ‘‘बांग्ला देश’’की पुनरावृति की स्थिति में सेना-पुलिस तो अपना काम करेगी ही,जो इस देश में अब बहुत मजबूत हो चुकी है ,पर आम लोगों को भी वैसी आपात स्थिति में प्राण और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सक्रिय होना होगा।‘‘प्रतिष्ठा’’ का मतलब आप समझ ही गये होंगे।

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 जो नेता व दल रंाची के आतंकी माॅड्यूल पर चुप हैं,वे उस आशंकित आपात स्थिति में क्या व कैसी भूमिका निभाएंगे,उसकी कल्पना आप आसानी से कर ही सकते हैं।

  सन 1962 के चीनी हमले के समय सी.पी.आई.के एक बड़े हिस्से ने कहा था कि चीन ने हम पर नहीं बल्कि भारत ने ही चीन पर हमला किया।

उसी आधार पर सी.पी.आई. 1964 में टूट गई और चीनपंथी सी.पी.एम.बनी।

चीन ने तब अपने पक्ष में जो पुस्तक तैयार की थी,उसे चीन पंथी भारतीय कम्युनिस्टों ने यहां के  लोगों के बीच खूब बटवाया।वह पुस्तक मेरे पास अब भी है।ऐसे लोगों की अब भी कमी नहीं है,इस देश में।बल्कि अब अधिक हैं।

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आज भी जब इस्लामिक जेहादी यहां कोई हिंसक कार्रवाई करते हैं तो कुछ खास दलों के नेतागण आरोप लगाते हैं कि यह सब भाजपा-आर एस एस के कारण हो रहा है जिसने सांप्रदायिक माहौल बना रखा है।

अब वे इस सवाल का जवाब नहीं देते कि बांग्ला देश में न तो भाजपा है और न ही आर.एस.एस.।

ब्रिटेन सहित दुनिया के अन्य कई देशों में भी जेहादी लोग भारी हिंसा कर रहे हैं तो वहां किस भाजपा या संघ से वे लड़ रहे हैं ?

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24 अगस्त 24


सोमवार, 19 अगस्त 2024

 हमारी दारुण गाथा

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1.-मध्य युग में हम विभाजित थे,नतीजतन हम हारे।

विदेशी आक्रांता जीते।

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2.-ब्रिटिश काल में हम विभाजित थे,हम हारे।

विदेशी आक्रांता जीते।

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3.-आज तो हम सबसे अधिक विभाजित हैं।

इसका सबसे बड़ा कारण कुछ लोगों की 

‘वोट लोलुपता’ है।

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सुरेंद्र किशोर

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 जेहादी तत्व इस देश को पूरी तरह हड़प लेने के लिए इन दिनों दिल ओ जान से रात-दिन लगे हुए हैं।

यदि कोई जेहादियों का विरोध करता है तो ‘‘सेक्युलरिस्ट’’ उल्टे आरोप लगाते हैं कि वे (जेहाद विरोधी) नफरत फैला रहे हैं।

 प्रतिबंधित संगठन पी.एफ.आई.ने सन 2047 तक हथियारों के बल पर इस काम को पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है।

(पटना के पास फुलवारी शरीफ में कुछ महीने पहले गिरफ्तार पी.एफ.आई.के लोगों के पास से जो ‘‘साहित्य’’बरामद हुआ था ,उसी से 2047 वाले लक्ष्य का पर्दाफाश हुआ।उसमें लिखा है कि हम हथियारों के बल पर सन 2047 तक भारत को इस्लामी देश बना देंगे।)

   दूसरी ओर, पी.एफ.आई.से जुड़े राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई.से तालमेल करके कुछ राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे हैं।उनकी मदद से कुछ राज्यों में 

वे जीत भी रहे हैं।उन राज्यों में जेहादियों का काम आसान हो गया है।

जेहादी तो किसी लोभ-लालच से ऊपर उठकर अपना काम कर रहे हैं।

क्या हम अपनी भूमिका निभा रहे हैं ?

नहीं निभा रहे हैं।

नतीजतन जेहादियों को इस देेश में गांव दर गांव, जिला दर जिला सफलता मिलती जा रही है।

इसलिए कि आज हम कुछ अधिक ही विभाजित हैं।

हममें से अनेक लोग उनके प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से मददगार हैं।

पता नहीं, कल इस लोकतांत्रिक और सेक्युलर देश का क्या होने वाला है ?!

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इस पृष्ठभूमि में यहां एक उदार ब्रिटिश इतिहासकार सर जे.आर.सिली की स्वीकारोक्ति से आपका परिचय करा रहा हूं।

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पहली बार आम जन को सिली से चैधरी चरण सिंह ने  परिचय कराया था।

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पढ़िए सिली के शब्दों में हमारे ही कुछ पूर्वजों के शर्मनाक कारनामों का इतिहास।

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‘‘हमने (यानी ब्रिटिशर्स ने)नहीं जीता, बल्कि खुद भारतीयों ने 

भारत को जीतकर हमारे प्लेट पर रख दिया’’

      --- सर जे.आर. सिली

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 ब्रिटिश इतिहासकार सर जे.आर.सिली (1834-1895)ने लिखा है कि ब्रिटिशर्स ने भारत को कैसे जीता।

मशहूर किताब ‘द एक्सपेंसन आॅफ इंगलैंड’ के लेखक सिली  की स्थापना थी कि 

‘‘हमने (यानी अंग्रेजों ने) नहीं जीता,बल्कि खुद भारतीयों ने ही भारत को जीतकर हमारे प्लेट पर रख दिया।’’

पुस्तक की सिर्फ एक पंक्ति यहां प्रस्तुत है--

‘‘भारत को जीतने की दिशा में जिस समय हमने पहली सफलता प्राप्त की थी,उसी समय हमने अमेरिका में बसी अपनी जाति के तीस लाख लोगों को ,जिन्होंने इंगलैंड के ताज के प्रति अपनी भक्ति को उतार फेंका था,अनुशासन के तहत लाने में पूरी तरह विफलता मुंह देखा था।’’

 पूर्व प्रधान मंत्री चैधरी चरण सिंह ने सर जे.आर.सिली की पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद करवा कर बड़े पैमाने पर बंटवाया था।

  चरण सिंह ने एक तरह से हमें चेताया था कि यदि इस देश में गद्दार मजबूत होंगे तो देश नहीं बचेगा।पर,हमने चरण सिंह की बातों पर भी ध्यान नहीं दिया।

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मध्य युग में भी वीरता की कमी के कारण हम नहीं हारे।

बल्कि आधुनिक हथियारों की कमी और आपसी फूट के कारण हम हारे।

हमारे राजा अपने विदेशी दुश्मन की माफी को बार-बार स्वीकार कर उसे बख्श देते थे।

  पर, दुश्मन एक बार भी हमें नहीं बख्शता था।

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आजादी के तत्काल बाद के भारत के हुक्मरानों ने यह सुनिश्चित किया कि ऐसा इतिहास लिखवाया जाए जिसमें हमारे देश के शूरमाओं के शौर्य,बलिदान और वीरता की चर्चा तक नहीं हो।उल्टे कहा गया--‘‘शिवाजी लुटेरा था और महाराणा प्रताप भगोड़ा था।’’

वे इस काम में सफल रहे।आज आप उन वीरों पर कोई पोस्ट

लिखेंगे तो आपको एक दर्जन लाइक भी नहीं मिलेंगे।मेरा अनुभव तो यही है।

1947 के बाद के हमारे शासकों का तर्क था कि उनके शौर्य का बखान करने से हिन्दुत्व पनपेगा।

यानी, भले दूसरा धर्म पनप जाए, किंतु हिन्दुत्व न पनपे।

जवाहरलाल नेहरू अजमेरशरीफ की दरगाह पर चादर चढ़ाने तो जाते थे,(गुगुल पर उसका वीडियो उपलब्ध है) किंतु वे सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के सख्त विरोधी थे।

आज भी कांग्रेस तथा अन्य तथाकथित सेक्युलर दल हिंसक जेहादी संगठन पी.एफ.आई.का सार्वजनिक रूप से कभी विरोध नहीं करते।(ऐसा कोई बयान उनका छपा हो तो बताइएगा।मेरा ज्ञानवर्धन होगा।)

किंतु संसद के भीतर और बाहर राहुल गांधी हिन्दुओं को हिंसक और नफरती बताते नहीं थकते।

ऐसी ही रही है अपने वोट बैंक की रक्षा की उनकी रणनीति।

अब उनकी वह रणनीति धीरे -धीरे फेल हो रही है।

पूरी तरह फेल करने की कोशिश भी हो रही है।पता नहीं इस कोशिश का क्या भविष्य होगा।

  हालांकि इस कोशिश के साथ भारत के मौजूदा स्वरूप का भविष्य भी जुड़ा हुआ है।

हालांकि जेहाद समर्थक इस देश का नुकसान तो कर ही चुके हैं।

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आज की स्थिति क्या है ?

आज की स्थिति का पता ठीक ठाक यानी ईमानदार अध्ययन 

हो तो चल जाएगा।

वैसे वास्तविक स्थिति यह है कि आज इस देश में गद्दारों की संख्या मध्य युग और ब्रिटिश काल से भी काफी अधिक हो चुकी है।

  जिन्हें मेरी बात पर विश्वास न हो,वे कम से कम निजी टी.वी.चैनलों के डिबेट्स को ही ध्यान से देख-सुन लें।

इस तरह आज उपस्थित भीषण व चैतरफा खतरों के समक्ष इस देश का भगवान ही मालिक है,ऐसा मुझे साफ लगता है।

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19 अगस्त 24

    


रविवार, 18 अगस्त 2024

     फोन -शिष्टाचार

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      सुरेंद्र किशोर

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यदि आप किसी को फोन कर रहे हैं तो पहले अपना पूरा नाम बता दीजिए।

  यह मान कर मत चलिए कि आपकी आवाज उस तरफ वाला तुरंत पहचान लेगा।

यदि आप किसी अन्य शहर से बोल रहे हैं तो पहले उस शहर का नाम बताइए।

 यह भी संभव है कि सुरेंद्र नाम के उसके मित्रों की संख्या एक से अधिक हो और कई स्थानों में कई सुरेंद्र हों।

इसलिए पूरा नाम बताना जरूरी है।

  जब आप निश्ंिचत हो जाएं कि आपको उसने पहचान लिया तभी जरूरी बात पर आइए।

   फोन पर संक्षेप में सिर्फ जरूरी बात कीजिएगा तो बेहतर रहेगा।यदि दोनों को लंबी बातचीत की आदत है तब तो कोई बात नहीं।

अन्यथा, वह अगली बार आपका फोन उठाएगा ही नहीं।

फोन पर बातचीत मुलाकात का विकल्प नहीं है।

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नोट--इस संबंध में अन्य सुझाव आमंत्रित है।

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  17 अगस्त 24


  राहुल गांधी ने 2004 में कहा था 

 कि वेरोनिका मेरी महिला मित्र हैं।

कोई किसी की महिला मित्र है तो इसमें

 किसी को क्या एतराज हो सकता है ?!

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सुरेंद्र किशोर

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डा.सुब्रह्मण्यम स्वामी कह रहे हैं कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैैं।

  एक मशहूर बांग्लादेशी पत्रकार ने ब्लिट्ज में लिखा है कि राहुल गांधी के दो बच्चे हैं।

मैं इन दोनों विवादों में नहीं पड़ना चाहता।क्योंकि मेरे पास इन बातों का कोई सबूत अब तक उपलब्ध नहीं है।

  पर, मेरे पास अंग्रेजी दैनिक ‘‘द पायनियर’’ की संवाददाता अमिता वर्मा से राहुल गांधी की एक पुरानी बातचीत का सबूत जरूर मौजूद है।

  सन 2004 में राहुल गांधी ने अमेठी यात्रा के दौरान स्वीकारा था कि वेरोनिका मेरी महिला मित्र हैं।वे बेनजुएला में रहती हैं।

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31 जुलाई 2004 के ‘‘द पायनियर’’ में लखनऊ डेटलाइन से छपी इस रपट का खंडन नहीं आया।

  हां,सार्वजनिक क्षेत्र के इतने बड़े नेता के बारे में सहज ही यह सवाल उठता है कि क्या वह वही वेरोनिका हैं जिसकी चर्चा हाल में बांग्लादेशी पत्रकार ने की है ?

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पुनश्चः

राहुल गांधी ने सन 2012 में ही यह कह दिया था कि ‘‘मैं ब्राह्मण हूं।’’

  इसके बावजूद आप राहुल गांधी से जोड़कर फिरोज गांधी और सोनिया गांधी की जाति की चर्चा क्यों कर रहे हैं ?

कम ही लोग जानते हैं कि इस देश में अग्निहोत्र यज्ञ कराकर  कोई अन्य जाति का व्यक्ति भी ब्राह्मण बन सकता है।

 सर्वाधिक पढे़-लिखे व्यक्ति डा.श्रीकांत जिचकर ऐसे ही यज्ञ के जरिए ब्राह्मण बने थे।

दिवंगत जिचकर जन्मना पिछड़ी जाति के थे।

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18 अगस्त 24


मंगलवार, 13 अगस्त 2024

 ‘‘अग्रतः सकल शास्त्रं पृष्ठतः सशरं धनुः’’

भगवान परशुराम की यह उक्ति बिहार 

परीक्षा बोर्ड के प्रमाण पत्र पर  ?!

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सुरेंद्र किशोर

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अग्रतः सकल शास्त्रं पृष्ठतः सशरं धनुः

यह उक्ति भगवान परशुराम की है।

किंतु इसे ही ंबिहार विद्यालय परीक्षा समिति

का ध्येय घोष क्यों बनाया गया ?

कब बनाया गया ,यह मुझे नहीं मालूम। 

किंतु सन 1963 के मेरे प्रमाण पत्र में तो था।

अब है या नहीं, वह भी मुझे नहीं मालूम।

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विद्यार्थियों को इसके जरिए कैसा संदेश दिया गया ?  

जाहिर है कि वही संदेश जो भगवान परशुराम का था।

माना गया कि उससे देश व समाज मजबूत होगा।

उसकी पूरी रक्षा हो पाएगी।

क्या आज ऐसा हो रहा है ?

देश के नौजवानों को आत्म रक्षा के लिए कितना 

तैयार किया जा रहा है ? 

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मैंने बोर्ड परीक्षा के संबंधित प्रमाण पत्र की स्कैन काॅपी 

इस पोस्ट के साथ पेश की है।

पता नहीं, कि इसके खिलाफ किसी तथाकथित सेक्युलर तत्व ने कभी आवाज उठाई थी या नहीं !!

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12 अगस्त 24


शनिवार, 10 अगस्त 2024

    


   देर न हो जाये,कहीं देर न हो जाये !!

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इन दिनों बांग्ला देश से जो असंख्य वीडियो आ रहे हैं,उनमें वीभत्स और हृदय विदारक दृश्य देखने को मिल रहे हैं।

इसके बावजूद इस देश की खास जमात उन मध्ययुगीन जंगली और बर्बर कृत्यों पर भी चुप है।निन्दा तक का कोई बयान नहीं। 

हालांकि उनकी अखंड चुप्पी चिल्ला-चिल्ला कर कुछ कह भी रही है।राज खोल रही है।

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इस पृष्ठभूमि में मध्य युग की कुछ खास घटनाएं याद आ रही हैं।

सन 1192 में हुई तराइन की दूसरी लड़ाई में मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चैहान का काम तमाम कर दिया।

इसको लेकर आज तक लोग जयचंद की आलोचना करते रहते हैं।

पर, आज के कम ही लोग जानते हैं,राजनीतिक वर्ग से तो और भी कम लोग जानते हैं कि सन 1194 के चंदावार युद्ध में गोरी की सेना ने जयचंद का भी काम तमाम कर दिया था।

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यानी, जयचंद भी उनके हाथों नहीं बचा।दरअसल वे ‘‘जयचंदो’’ं को भी नहीं छोड़ते।

  अब आज के संदर्भ में चतुर -सुजान लोग 12 वीं सदी की उन दो घटनाओं से जो भी सबक सीखना चाहते हैं,जल्दी सीख लें अन्यथा बाद में काफी देर हो चुकी होगी।

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 दिनकर ने ठीक ही लिखा है--

‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,

जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध ।’