बुधवार, 11 सितंबर 2019

दुष्यंत कुमार की याद में 
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कभी दुष्यंत कुमार की गजलों ने देश की तरुणाई को नए मंत्र देकर उद्वेलित किया था।
इसी महीने की पहली तारीख को उनका जन्म हुआ था।
साल था 1933 ।
30 दिसंबर, 1975 को वे गुजर गए।
मात्र 42 साल की उम्र में !
शायद ईश्वर को भी इनकी गजलें अच्छी लगी होंगी,सो जल्द ही पास बुला लिया।
उनकी गजलों के कुछ नमूने पेश हैं--
                  1
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   मेरे गीत तुम्हारे पास सहारा पाने आएंगे,
   मेरे बाद तुम्हें मेरी याद दिलाने आएंगे।
                 2
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 जिंदगानी का कोई मकसद नहीं है,
एक भी कद आज आदमकद नहीं है।
             3
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पक गई हैं आदतें ,बातों से सर होगी नहीं,
कोई हंगामा करो ,ऐसे गुजर होगी नहीं।
              4
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अब किसी को भी नजर आती नहीं कोई दरार,
घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तहार।
              5
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मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं,
वो गजल आपको सुनाता हूं।

     एक देशभक्त ऐसे भी !
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दक्षिण मुंबई के बुजुर्ग समाजसेवी प्रेम दरयानिनी ने लोनावाला 
के कान्हे गांव की अपनी दो एकड़ की जमीन सेना को दान में दे दी।
उस जमीन में सेना लाॅ कालेज बनेगा।
इससे पहले भी 2018 में दरियानिनी ने अपनी जमीन सेना को दान में दे दी थी।
उसे मिलाकर उन्होंने 40 करोड़ रुपए की जमीन दान दे दी।
वे मानते है कि यह भारतीय सेना के प्रति यह हमारी कृतज्ञता है जो अपनी जान की बाजी लगा कर बाहरी और भीतरी दुश्मनों से निपटते हैं।
  

 कर्नाटका के एक बड़े नेता शिव कुमार भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं।अब उनकी  बेटी को 
काला धन धोवन कांड में नोटिस मिली है।उनसे पूछताछ होगी।
 नाते-रिश्तेदारों और  बाल -बच्चों के साथ इस देश के अनेक नेतागण भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हैं।अब उन नेताओं में शिव कुमार भी शामिल हो गए हैं।
  उत्तर-दक्षिण-पूरब -पश्चिम के अनेक नेता इसी तरह के आरोप झेल रहे हैं।
इनमें एक से अधिक दलों के नेता शामिल हंै।
  यानी,हम तो डूबे हैं सनम, तुम को भी ले डूबेंगे !
अरे नेता जी, खुद तो डूबे हुए ही हो,बाल -बच्चों को क्यों डूबो रहे हो ? 
  इस डायनेस्टिक डेमोक्रेसी में आपका उत्तराधिकार भला कौन संभालेगा  ! ?
  

इस देश में तांगे हंै घोड़े के आगे !
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कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने लिखा है कि 
 ‘जैसे-जैसे कृषि आय बढ़ेगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में मांग भी बढ़ेगी।
 और, उससे आद्योगिक विकास का पहिया भी तेजी से घूमने लगेगा।
  मंदी के दौर में मांग बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है,जो केवल खेती से ही पूरी की जा सकती है।’
   --दैनिक जागरण-10 सितंबर 2019
   आजादी के तत्काल बाद से ही चैधरी चरण सिंह जैसे कुछ नेताओं और जानकार लोगों ने सरकारों से बार -बार कहा कि इस कृषि प्रधान देश में खेती के विकास के बिना उद्योग-धंधे  नहीं बढ़ेंगे।
यानी, जब तक देश के अधिकतर लोगों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी तब तक कारखाने के माल को खरीदेगा कौन ?
   किन्तु हमारे अधिकतर स्वतंत्रता सेनानियों को तो सफेद पोश लोगों के लिए जल्द से जल्द रोजगार पैदा करने थे।
आरोप है कि अपवादों को छोड़कर उस रोजगार में उनके बाल-बच्चे और जाति- बिरादरी व लगुए -भगुए को लग जाना था।उनके अपने लोग कहां मिट्टी में अपने हाथ गंदा करने जाते !
इसीलिए बड़े -बड़े सार्वजनिक उपक्रम खड़े किए गए।
 जो होना था,वह हुआ।धीरे -धीरे अधिकतर सार्वजनिक उपक्रम ध्वस्त होते चले गए।
  यदि अब भी हमारी सरकारें कृषि आधारित उद्योगों के जाल बिछाए तो खेती मुनाफे का काम  हो जाएगा।किसानों की क्रय- शक्ति बढ़ेगी।फिर तो कारखानों के माल भी बिकेंगे।यानी कारखाने विकसित होंगे।
  यानी आजादी के तत्काल बाद ‘तांगे को घोड़े से आगे खड़ा कर दिया गया।उसका खामियाजा आज भी यह देश भुगत रहा है। 

सोमवार, 9 सितंबर 2019

    एक हिन्दी लेख के लिए 50 हजार रुपए !
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कुछ ही साल पहले एक बड़े हिन्दी अखबार के मालिक ने व्यक्तिगत बातचीत में मुझे बताया था कि ‘मैं संपादकीय पेज के मुख्य लेख के लिए 50 हजार रुपए तक देने को तैयार रहता हूं।पर, लेख अच्छा होना चाहिए।’
   मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा।
संभवतः यह अमेरिका के अखबार के पारिश्रमिक के लगभग बराबर माना जा सकता है।
   पर, मुझे उनसे यह पूछने की हिम्मत नहीं हुई कि आप सामान्य फ्रीलांस पत्रकारों के पारिश्रमिक के लिए अपने यहां कितने बड़े बजट का प्रावधान रखते हैं।


   धर्म और राजनीति
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‘‘ दरअसल देखा जाए तो धर्म दीर्घकालीन राजनीति है और राजनीति अल्पकालीन धर्म है।

यह है बढि़या धर्म और बढि़या राजनीति की परिभाषा ।

धर्म है अच्छाई को करना और अच्छाई की तारीफ करना और राजनीति है बुराई से लड़ना और बुराई की निन्दा करना।’’
                       ---डा.राम मनोहर लोहिया,
17 दिसंबर, 1960 को कोटा में दिए गए लंबे भाषण का अंश। 

रविवार, 8 सितंबर 2019

प्राॅस्टैट को स्वस्थ  करने -रखने के लिए
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तीसी--एक किलोग्राम 
मोटा सौंफ--100 ग्राम 
आजवाइन-100 ग्राम 
मेथी-50 ग्राम
दालचीनी-10 ग्राम 
काला नमक-50 ग्राम
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तीसी और मेथी को बारी -बारी से कड़ाही में भुन लें।
कड़ाही से निकाल कर इन्हें ठंडा होने दें।
इस बीच आजवाइन ,मोटा सौंफ और दालचीनी को उसी गर्म कड़ाही में डाल कर थोड़ा गर्म होने दें।
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फिर इन पांच पदार्थों को ग्राइंडर में पीस लें।
उसमें अपने स्वाद के अनुसार काला नमक मिला दे।
इस चूर्ण में से सुबह -शाम भोजन के बाद एक या दो चम्मच  खा लें।
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मैं तो यह काम करता हूं।
फायदा है।
वैसे प्रोस्टेट की बीमारी वाले यदि शाम चार बजे के बाद पानी 
नहीं पिएं तो उन्हें टाॅयलेट जाने के लिए रात में जगना नहीं पड़ेगा।  
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वैसे मैं कोई वैद्य नहीं हूं।
सिर्फ एक अनुभवी मरीज हूं।
खुद आप ऐसा कुछ करने से पहले किसी अनुभवी 
वैद्य से जरुर राय ले लें।