गुरुवार, 29 जून 2023

 क्या हमारे अनेक नेतागण वोट के लिए 

इस देश को धीरे- धीरे

जेहादियों के हवाले नहीं करते जा रहे ?

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कैसे ‘‘घुसपैठिया वोट बैंक’’ ममता बनर्जी के 

लिए ‘‘महा विपत्ति’’ से

बन गया ‘‘महा संपत्ति’’ ! 

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सुरेंद्र किशोर

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4 अगस्त, 2005 को ममता बनर्जी ने लोक सभा के स्पीकर के टेबल पर कागज का 

पुलिंदा फेंका।

उसमें अवैध बंगला

देशी घुसपैठियों को  मतदाता बनाए जाने के सबूत थे।

तब पश्चिम बंगाल में वाम मोरचे की सरकार थी।

सांसद ममता बनर्जी का आरोप था कि 

उनके नाम गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची में 

शामिल करा दिए गए थे।

ममता ने कहा कि घुसपैठ की समस्या राज्य में ‘‘महा विपत्ति’’ बन चुकी है।

इन घुसपैठियों के वोट का लाभ वाम मोर्चा उठा रहा है।

उन्होंने  उस पर सदन में चर्चा की मांग की।

चर्चा की अनुमति न मिलने पर ममता बनर्जी ने सदन की सदस्यता

 से इस्तीफा भी दे दिया था।

 चूंकि एक प्रारूप में विधिवत तरीके से इस्तीफा तैयार नहीं था,

इसलिए उसे मंजूर नहीं किया गया।

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दृश्य -2

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जब घुसपैठियों के वोट ममता 

बनर्जी को मिलने लगे

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3 मार्च 2020 को

पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 

जो भी बांग्ला देश से यहां आए हैं,पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं ,

चुनाव में वोट देते रहे हैं, वे सभी भारतीय नागरिक हैं।

इससे पहले सीएए,एनपीआर और एन आर सी के विरोध में 

ममता ने कहा कि इसे लागू करने पर गृह युद्ध हो जाएगा । 

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उन्हीं दिनों पश्चिम बंगाल से एक भाजपा सांसद ने संसद में कहा 

कि पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में हिंदुओं को त्योहार मनाने के 

लिए अब स्थानीय इमाम से अनुमति लेनी पड़ती है।

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कई साल पहले इंडियन एक्सप्रेस में एक खबर छपी थी।

उसमें एक गांव की कहानी थी।

वह गांव बंाग्ला देशी मुस्लिम घुसपैठियों के कारण

 मुस्लिम बहुल बन चुका था।

वहां हिंदू लड़कियां पहले हाॅफ पैंट पहने कर 

हाॅकी खेला करती  थी।

पर, अब मुसलमानों ने उनसे कहा कि फुल पैंट 

पहन कर ही खेल सकती हो।

खेल रुक गया है।

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दृश्य-3

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यह बात तब की है जब माकपा के बुद्धदेव भट्टाचार्य पश्चिम 

बंगाल के मुख्य मंत्री थे।

उनका एक बयान जनसत्ता में छपा।

उन्होंने कहा था कि घुसपैठियों के कारण सात जिलों में 

सामान्य प्रशासन चलाना मुश्किल हो गया है।

बाद में उन्होंने उस बयान का खुद ही खंडन कर दिया।

पता चला कि पार्टी हाईकमान

के दबाव में कह दिया कि मैंने वैसा कुछ कहा ही नहीं था।

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कई दशक पहले मांगने पर वाम मोरचा सरकार ने केंद्र

 सरकार को 

सूचित किया था कि 40 लाख अवैध बांग्ला देशी पश्चिम 

बंगाल में रह रहे हैं।

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अनुमान लगाइए कि अब 2023 में वह संख्या

 कितनी बढ़ चुकी होगी !!!! 

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मेरे एक रिश्तेदार ने हाल में हावड़ा रेलवे स्टेशन पर जो दृश्य देखा,उससे वह दंग रह गया।

सैकड़ोें की संख्या में बांग्ला

देशी और रोहिंग्याई घुसपैठिये ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

वे इस देश के दूसरे हिस्से में जाकर बसने वाले थे।

वे सीमा पर रिश्वत देकर भारत में घुसे थे।

उसे बताया गया कि यह दृश्य रोज का है।ममता बनर्जी उन्हें खुलेआम मदद करती हैं।

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हमारा देश भी कितना अभागा है !

मध्य युग में मान सिंह जैसे कुछ ही राजा थे थे जो अपनी सत्ता के लिए महाराणा प्रताप के बदले अकबर का साथ दे रहे थे।

पर,आज तो इस देश के करीब- करीब हर राज्य में ऐसे- ऐसे अनेक राजनीतिक दल सक्रिय हैं जो अपनी सत्ता के 

लिए इन घुसपैठियों को मदद करके उन्हें मतदाता बनवा रहे हैं।

कब तक बचेगा यह देश ?

कौन बचाएगा ?

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इस्लामिक प्रवक्ता डा.जाकिर नाइक को यू ट्यूब पर यह कहते सुना जा सकता है कि भारत में 

मुसलमानों की संख्या अब 40 प्रतिशत हो चुकी हैै।

जाकिर नाइक के ‘लक्ष्य’ को कार्यरूप दे रहे संगठन पी.एफ.आई. हथियारों के बल 

पर सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने के लक्ष्य को पाने के लिए 

दिन-रात लगा हुआ है।उसी के राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई.ने कर्नाटका के  

गत विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को जितवाया।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कहते हैं कि जाकिर नाइक शांति दूत है।

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गैर भाजपा दल मोदी को हटाने के लिए इन दिनों एकजुट हो रहे हैं।

पर,जेहादियों की गतिविधियों का जब तक ये दल विरोध नहीं करेंगे तब तक 

भाजपा को वे कैसे हरा पाएंगे ?

गत साल उत्तर प्रदेश में आजम गढ़ और राम पुर लोक सभा क्षेत्रों में उप चुनाव हुए।

वहां भाजपा क्यों जीत गयी ?

क्या भाजपा विरोधी दलों ने उसका विश्लेषण किया ?

इस देश के अनेक लोग यह मान रहे हैं कि इस समय देश पर 

भीषण भ्रष्टाचारियांें और जेहादियों से  भारी 

खतरा है।

क्या कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी राजनीतिक दल इन दो समस्याओं को स्वीकार भी करते हैं ?

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इन्हीं दो समस्याओं को बढ़ाने के कारण सन 2014 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस की महा पराजय हुई ।

 पराजय की जांच सोनिया गांधी ने ए.के. एंटोनी से करवाई।

एंटोनी ने अन्य कारणों के साथ -साथ यह भी बताया कि जनता को यह अच्छा नहीं लगा था कि 

कांगे्रस मुसलमानों की तरफ कुछ अधिक ही झुकी हुई है।

हम इसीलिए हारे।

एंटोनी की बात अधूरी थी।

दरअसल कांग्रेस आम मुसलमानों की ओर झुकी होती तो नुकसान नहीं होता,

कांगेस तो अतिवादी मुसलमानों की ओर झुकी हुई थी।

अब भी कांग्रेस ने खुद को नहीं बदला और कर्नाटका में हाल के चुनाव में जेहादियों 

से तालमेल कर लिया।इन सब बातों का लाभ भाजपा को अगले चुनाव में मिल 

जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

गैर भाजपा दलों के लिए अब भी संभलने का समय है।

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28 जून 23 


  



मंगलवार, 27 जून 2023

 केरल की एक मस्जिद से सेक्युलर पहल

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केरल के एर्नाकुलम जिले की एक मस्जिद के लाउड स्पीकर से इस महीने के मध्य में आधी रात को एक ऐसी घोषणा की गयी जैसा पहले कभी नहीं हुआ था।

मस्जिद से यह घोषणा की गयी कि पड़ोस के 75 वर्षीय कुट्टप्पन (हिन्दू)की मृत्यु हो गयी है।

मस्जिद सूत्रों ने बताया कि गत अप्रैल में हमने सर्वसम्मति से यह निर्णय किया था कि हम पड़ोस के लोगों के सुख-दुख में शामिल होंगे चाहे वे जिस किसी समुदाय के क्यों न हों।ऐसी जानकारियां आगे भी प्रसारित की जाएंगी। 

ऐसा करके एक धर्म निरपेक्ष संदेश देने की कोशिश की गयी है।

यह एक शुभ संकेत है जिसका वहां के लोगों ने स्वागत किया है।

यह भी फैसला किया गया है कि जनोपयोगी सेवाओं के बारे में भी मस्जिद के लाउड स्पीकर से लेागों को बताया जाएगा।

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द हिन्दू (-25 जून 23-)  की खबर पर आधारित

सुरेंद्र किशोर

27 जून 23


 इमरजेंसी (1975-77) और सामान्य 

दिनों के बीच के फर्क या समानताएं बताइए

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सुरेंद्र किशोर

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आज विभिन्न क्षेत्रों के अनेक बेईमान या अनजान लोग आए दिन यह कहते रहते हैं कि आपातकाल में जो कुछ हुआ था,वही सब या उससे से भी बुरा आज देश में हो रहा है।

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  क्या यह बात सही है ?

इस संबंध में मैं जानकारियों के आधार पर इमरजेंसी की कुछ अनर्थकारी बातें व घटनाएं बताता हूं।

फैसला आपको करना है।

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1.-इमरजेंसी में (भारत सरकार के वकील) एटार्नी जनरल नीरेन डे ने सुप्रीम कोर्ट को साफ-साफ यह कह दिया था कि देश में लोगों के  ंमौलिक अधिकारों को, जिनमें जीने का अधिकार भी शामिल है,स्थगित कर दिया गया है।

 डे ने कोर्ट से यह भी कहा कि यदि हमारी पुलिस किसी की जान भी ले ले तो उस हत्या के खिलाफ आज अदालत की शरण नहीं ली जा सकती।

नीरेड डे की बात को उचित मानकर सुप्रीम कोर्ट ने उस पर अपनी मुहर लगा दी।

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1.-देश में इमरजेंसी से पहले या बाद में क्या ऐसा कुछ कभी हुआ या हो रहा है ?

क्या अंग्रेजों के राज में भी ऐसा हुआ था ?

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2.-इमरजेंसी में मीडिया पर पूर्ण सेंसरशिप लागू कर दिया गया था।

अखबारों के संपादकीय विभागों के लोग जो खबर,लेख, रिपोर्ट आदि छपने के लिए तैयार करते थे,उन्हें लेकर पहले प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो (भारत सरकार)के स्थानीय आॅफिस में जाते थे।

पी.आई.बी.के अफसर को उसे दिखाकर उस पर मुहर लगवाते थे,तभी अखबारों में वह सामग्री छप पाती थीं।

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2.-क्या इमरजेंसी से पहले या बाद में ऐसा कुछ हुआ ?या हो रहा है ?

प्रतिपक्षी नेताओं के बयोन कौन कहे,उनके नाम तक अखबारों में नहीं छपते थे।

बीमारी के कारण इमरजेंसी में ही जेपी जब जेेल छूट

कर आए तो केंद्र सरकार ने मीडिया को निदेश दिया कि उनकी किसी गतिविधि की खबर न छपे,यानी उनके कहीं आने-जाने की खबर भी न छपे।नहीं छपा। 

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3.-जयप्रकाश नारायण सहित एक लाख से अधिक प्रतिपक्षी राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनिश्चित काल तक के लिए जेलों में ठूंस दिया गया था।

उन्हें अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ अदालत में अपील करने से भी रोक दिया गया था।

जब उन गिरफ्तारियों के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण के कई मामले हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट गये तो सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया था कि 

गिरफ्तारियों के खिलाफ अदालतें सुनवाई नहीं कर सकतीं।

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3.-क्या इमरजेंसी से पहले और बाद में ऐसा कोई आदेश सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कभी आया ?

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 4.-1971 में रायबरेली संसदीय क्षेत्र में इंदिरा गांधी ने संसोपा के राजनारायण को हराया।

राजनारायण ने चुनाव में भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की।

12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोप सही पाते हुए प्रधान मंत्री की लोस की सदस्यता रद कर दी।

इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में चुनाव कानून की उन धाराओं को संसद से बदलवा दिया जिन धाराओं के तहत उन्हें अयोग्य करार दिया गया था।

इतना ही नहीं,उस कानूनी संशोधन को पिछली तारीख से लागू करा दिया गया ताकि उसका लाभ इंदिरा गांधी को तुरंत मिल सके।

किसी कानून को पिछली तारीख से लागू करने की बात अजूबी थी।

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4.-क्या इमरजेंसी से पहले या बाद में वैसा कुछ हुआ था ?

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जो लोग अब भी कहना चाहते हैं कि जो कुछ इमरजेंसी में हुआ था,वह सब आज भी हो रहा है तो वे आज के ऐसे उदाहरण दें।

कुछ अशिष्ट टी.वी.डिबेटरों की तरह इधर-उधर की बातें न करें।

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27 जून 23


रविवार, 25 जून 2023

 केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में अनेक उपलब्धियां हासिल की हंै।

किंतु वह जिन महत्वपूर्ण मामलों में विफल रही है,उनमें दो मामलों को मैं अभी महत्वपूर्ण मानता हूं।

  1.-केंद्र सरकार बांग्ला देश से पश्चिम बंगाल के जरिए बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की घुसपैठ को रोकने में बुरी तरह विफल रही है।

वहां अब भी ममता बनर्जी सरकार की ही चलती है।बल्कि, घुसपैठियों की संख्या बढ़ती जा रही है।वे वहां से पूरे देश में तेजी से फैल रहे हैं।

इस तरह देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए भारी खतरा पैदा हो रहा है।

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2.-दूसरा मामला फिल्म सेंसर बोर्ड का है।

  बोर्ड को सुधारने में मोदी सरकार बुरी तरह विफल रही है।

फिल्मों को देखकर लगता है कि बोर्ड पर पहले जिन शक्तियों और तत्वों का कब्जा था,आज भी उनका ही कब्जा है।

भारतीय सभ्यता -संस्कृति को नष्ट करने वाली फिल्में अब भी बन रही हैैं

और उन्हें प्रमाण पत्र भी मिल रहे हैं।

आज कितनी फिल्में बन रही हैं जिन्हें आप परिवार के साथ देख सकें ?

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सुरेंद्र किशोर

25 जून 23


     भाड़े के 8 विमानों से पटना आए थे गरीब देश के अमीर नेता

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           सुरेंद्र किशोर

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प्रतिपक्षी नेताओं को लेकर 22 और 23 जून को 8 चार्टर्ड विमान पटना आए थे।

चार्टर्ड विमानों यानी भाड़े के विमानों की बहुलता के कारण पटना हवाई अड्डे की पार्किंग फुल हो गयी थी।

 जिस अनुपात में इस गरीब देश के अमीर नेतागण कहीं आने-जाने के लिए चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल इन दिनों करने लगे हैं,उससे लगता है कि अब हर राज्य मुख्यालय के हवाई अड्डे के आकार को जल्द बढ़ाना पड़ेगा।

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याद रहे कि ये नेता वैसे गरीब देश भारत के हैं ,जहां की 80 करोड़ जनता को हर माह पांच किलो अनाज भारत सरकार अत्यंत कम दाम पर देती है।

देती क्या है,देने को बाध्य है।

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इस सिलसिले में कुछ दशक पहले की कहानी सुनाता हूं।

लोकदल नेता कर्पूरी ठाकुर बिहार के दो बार मुख्य मंत्री और एक बार उप मुख्य मंत्री रहे चुके थे।

  अस्सी के दशक में पटना के सालिमपुर अहरा स्थित पार्टी आॅफिस में बैठे थे।

पीलू मोदी एक आराम कुर्सी पर पसरे हुए थे।

मैं भी वहां मौजूद था।

कर्पूरी ठाकुर ने बहुत ही विनयी भाव से पीलू मोदी से कहा,‘‘मोदी साहब,यदि आप बिहार पार्टी के लिए एक हेलीकाॅप्टर का प्रबंध कर दें तो हम विधान सभा की आधी सीटें जीत जाएंगे।’’

हंसोड़ स्वभाव के पीलू मोदी ने बिना देर किए कहा,‘‘मिस्टर कर्पूरी,दो की कर देता हूं।सारी सीटें जीत जाना।अरे भई, हेलीकाॅप्टर चुनाव नहीं जितवाया करता।’’

  खैर,यह कहानी कहने का आशय यह है कि कर्पूरी जी जैसे ईमानदार नेता के लिए  चुनाव प्रचार के लिए एक हेलीकाॅप्टर का प्रबंध नहीं हो पाता था।किंतु आज विभिन्न दलों के अधिकतर नेतागण गैर चुनावी मौसम में भी रिजर्व विमान से चल रहे हैं।

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क्या अस्सी के दशक के बाद इस देश की जनता इतना अधिक अमीर हो गयी है कि वह चंदा देकर अपने नेताओं को भाड़े के विमानों से भ्रमण करने की सुविधा दे रही है ?

या, फिर इन नेताओं के पास अपार धन कहां से आ रहे हैं ?

कैसे आ रहे हैं ?

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   24 जून 23


 


शनिवार, 24 जून 2023

 गुटका के शौकीनो , शरद पवार का चेहरा 

गौर से देख लो

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सुरेंद्र किशोर

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शरद पवार सन 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे थे।

अन्य उम्मीदवार थे सीताराम केसरी और राजेश पायलट।

केसरी जी विजयी हुए।

यह खबर बताने के लिए मैंने इस बात की चर्चा नहीं की।

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दरअसल तब पवार साहब पटना आए थे-प्रचार के सिलसिले में।

डा.जगन्नाथ मिश्र के सरकारी आवास पर उनका प्रेस कांफं्रेस था।

संवाददाता के रूप में मैं भी वहां मौजूद था। 

करीब पौन घंटे के प्रेस कांफ्रेंस में शरद पवार ने पाॅकेट से निकाल कर दो या तीन बार गुटका फांक लिया।

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तब तक उनका चेहरा गोल मटोल और व्यक्तित्व प्रभावशाली था।

मुझे उनके ‘गुटका फांको अभियान’ से तभी यह लग गया था कि इनके स्वास्थ्य को गंभीर पैदा हो सकता है।

आज पटना में शरद पवार संवाददाताओं के समक्ष बोल रहे थे।

आपने देखा होगा कि उन्हें बोलने में कितनी दिक्कत हो रही थी।

 क्या आपने उनकी बातों को समझा ?

इन दिनों एक तरफ का उनका चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ रहता है।

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वर्षों से उनके चेहरे का यही हाल है।

यदि ऐसा नहीं होता तो राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री पद के वे गंभीर उम्मीदवार होते।

बनते या नहीं बनते ,यह अलग बात है।

पवार साहब आर्थिक रूप से अत्यंत संपन्न व्यक्ति हैं।

सर्वोत्तम इलाज के बल पर ही चल रहे हैं।

पर सामान्य आर्थिक क्षमता वालों  पर जब गुटका की मार पड़ती है तो उनके हश्र की कल्पना कर लीजिए।गुटका प्रेमियो,पवार साहब से सबक ले लो।

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23 जून 23


गुरुवार, 22 जून 2023

   

सन 1957 की नम्बूदरीपाद सरकार में मंत्री रहे  

कृष्णा अय्यर के सुप्रीम कोर्ट जज बनने की कहानी

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बिशन टंडन 

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आज (यानी 20 जून 1975 को)सुप्रीम कोर्ट में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के वकील ने कहा कि प्रधान मंत्री की अपील सोमवार को लेने के लिए समय निर्धारित कर दिया जाये।

उनकी विनती जज ने स्वीकार कर ली।

राज नारायण के वकील ने कोई आपत्ति नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां हैं।

आजकल जस्टिस वी.आर.कृष्णा अय्यर छुट्टी के जज के रूप में काम कर रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति सहज में नहीं हुई थी।

कृष्णा अय्यर किसी समय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे।

सत्रह-अठारह साल पहले केरल में नम्बूदरीपाद के मंत्रिमंडल के सदस्य थे।

इस मंत्रिमंडल को जनान्दोलन के आग्रह पर बर्खास्त कराने में प्रधान मंत्री का (तब इंदिरा गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं।)बड़ा हाथ था।

 1973 में जब सुप्रीम कोर्ट में कई स्थान खाली हुए तो गोखले व कुमारमंगलम के कहने पर नये मुख्य न्यायाधीश ए.एन.राय ने कृष्णा अय्यर का नाम भी भेजा।

नम्बूदरीपाद मंत्रिमंडल छोड़ने के बाद वे फिर वकालत करने लगे थे।

और, बाद में केरल हाईकोर्ट के जज हो गये थे।

  वहां से विधि आयोग के सदस्य होकर दिल्ली आ गये थे।

प्रो.धर और मैंने (कृष्णा अय्यर को जज बनाने के )प्रस्ताव का विरोध किया था।

हमारा कहना था कि हाल ही में तीन जजों को सुपरसीड करने से हलचल मच गयी है।

इसके शीघ्र बाद एक जाने माने कम्युनिस्ट को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाना ,जबकि उनसे वरिष्ठ जज व मुख्य न्यायाधीश मौजूद हैं,ठीक नहीं लगेगा।

बड़ी कटु आलोचना हुई।कई दिनों तक प्रधान मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया।

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फिर मंत्रिपरिषद की राजनीतिक कार्यसमिति के सम्मुख मामले को रखा गया।

  वहां गोखले व कुमार मंगलम ने इस प्रस्ताव की विशेष सिफारिश की और इसे स्वीकार कर लिया गया।

 प्रधान मंत्री भी यही चाहती थीं।

पर वे अकले निर्णय नहीं करना चाहती थीं।

 वैसे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की नियुक्तियों पर प्रधान मंत्री स्वयं आदेश देती हैं,मंत्रिपरिषद या उसकी किसी समिति के समक्ष मामला नहीं जाता।

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प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के संयुक्त सचिव(1969-76)

रहे बिशन टंडन की चचर््िात डायरी से

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आपात काल: डायरी -भाग-एक 

20 जून 1975 

पेज-386

वाणी प्रकाशन,नई दिल्ली 

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