मंगलवार, 28 जनवरी 2025

 पद्मभूषण सुशील कुमार मोदी कुछ 

अलग ढंग के नेता थे

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सुरेंद्र किशोर

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जाना तो एक दिन सबको है।

पर,कुछ लोगों का जाना और वह भी समय से 

पहले ही परलोक सिधार जाना, बहुत अखरता है।

सुशील कुमार मोदी और किशोर कुणाल का जाना भी अखर गया।

ये दोनों न सिर्फ अपने काम में पूर्णतावादी थे बल्कि व्यक्तिगत संबंधों में भी सहृदय थे।

 पत्रकार के नाते मेरा इन दोनों बेजोड़ हस्तियों से संबंध रहा।

दोनांे के कामों को करीब से देखा।

दोनों के लिए मेरे दिल में सराहना के भाव रहे हैं।

  इस बार जब इन्हें पद्म सम्मान मिले,तो जाहिर है कि मुझे खुशी हुई।

पर,कुणाल साहब के मामले में पता नहीं केंद्र सरकार ने क्यों थोड़ी ‘कंजूसी’ कर दी !

उन्हें तो पहले ही पद्म सम्मान मिल जाना चाहिए था।देर से इस बार मिला भी तो कम से कम पद्म भूषण मिलना चाहिए था।

खैर,जो भी और जितना भी हुआ,उसके लिए केंद्र सरकार को बहुत धन्यवाद।

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नियमित सेवा के रिटायर हो जाने के बाद मैं मुख्य पटना से करीब 15-20 किलोमीटर दूर एक गांव में घर बनाकर रहता हूं।

  शहर में जाना बहुत ही कम होता है।

सुशील कुमार मोदी हर साल एक खास दिन को पत्रकारों को अपने यहां बुलाते थे।

उन्होंने मुझे हर बार बुलाया।

पर,मैं कभी नहीं गया।उन्हें लगा कि 

शायद मैं उनसे उदासीन या नाराज हूं।

एक दिन वे मेरे गांव यानी मेरे घर पहुंच

गये।

मैंने उनकी गलतफहमी दूर की।मैंने कहा कि मैं आपका प्रशंसक रहा हूं और रहूंगा।चूंकि मेरे पास स्थायी महत्व के काम अब भी बहुत हंै और मेरे पास समय कम हैं,इसलिए मैं आम तौर पर कहीं नहीं जाता।

एक जगह जाऊंगा तो अन्य जगह भी जाना पड़ेगा।

दूर बसने  के कारण आने-जाने में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां भी हैं।

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दरअसल आम तौर पर न तो नेतागण रिटायर पत्रकारों की खोज -खबर लेते हैं और न ही पत्रकार गण, रिटायर नेताओं की।

ऐसे कुछ संबंध पेशागत और अस्थायी होते हैं।

पर,सुशील मोदी कुछ अलग ढंग के नेता थे।

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और अंत में 

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मैं जब अखबार की नियमित सेवा में था तो नव वर्ष के अवसर पर हर साल मुझे बधाई के करीब सौ-सवा सौ फोन आते थे।अब उनमें से कोई फोन नहीं करता।मैं भी रिटायर नेताओं को थोड़े ही याद करता हूं !

 इसलिए वैसे किसी के फोन का मैं इंतजार भी नहीं करता।

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सोमवार, 27 जनवरी 2025

 जिन्दगी..कैसी है पहेली हाय..!

कभी तो हंसाए,कभी ये रुलाए !!

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सुरेंद्र किशोर

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नौकरी--

यह आपको कभी भूखा नहीं मरने देगी,

पर,आपको कभी अमीर भी नहीं होने देगी।

आपकी पूरी जवानी खा जाएगी,

और बुढ़ापे में जब आप किसी काम के 

नहीं रहोगे  

तो आपको लात मार देगी।

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फिर कौन काम आएगा ?

बेटा ?

भूल जाइए।

क्योंकि (अपवादों को छोड़कर)उसका भी अपना जीवन है,अपना संसार है।

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यदि आप कोई सरकारी मदद स्वीकार करेंगे तो 

ज्वलन शील साॅरी ‘जलन’ शील और ईष्र्यालु तत्व 

आपको तुरंत दलाल घोषित कर देंगे।

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यानी, न पहले चैन और न बाद में कोई सुख !

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फिर तो ‘आनन्द’ फिल्म की इस गीत के 

साथ संतोष कीजिए---

‘‘जिन्दगी कैसी है पहेली हाय !

कभी तो हंसाए ,कभी तो रुलाए।

...............’’

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नोट--किसी गलत फहमी में मत रहिएगा।

किसी एक की नहीं,बल्कि यह घर-घर की कहानी है।

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27 जनवरी 25


रविवार, 26 जनवरी 2025

 मैग्सेसे पुरस्कार बनाम पद्म सम्मान

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सुरेंद्र किशोर

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सन 1965 में जयप्रकाश नारायण को मैग्सेसे पुरस्कार 

मिला था।

सन 1974 में जब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने उन पर आरोप लगाया था तो जेपी ने जवाब में यह कहा था कि मैग्सेसे पुरस्कार के रूप में मिले पैसों के सूद से मेरे घर का खर्च चलता है।

उससे पहले इंदिरा जी ने कहा था कि जो लोग पूंजीपतियों के पैसों पर पलते हैं,उन्हें हमारी सरकार के भ्रष्टाचार पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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अब आप कल्पना कीजिए कि जिस जेपी ने देश की आजादी के लिए खुद को होम कर दिया,जिन्होंने आजादी के बाद भी बड़े- बड़े पद ठुकरा दिए,उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार के तहत यदि कुछ पैसे नहीं मिल गये होते तो उनकी आर्थिक स्थिति 

कैसी होती ?!

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 तेलांगना के दर्शनम् मुगोलैया को भारत सरकार ने सन 2022 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

देश के चैथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित व्यक्ति मुगोलैया को जब बाद में भी हैदराबाद की एक निर्माण कंपनी में मजदूरी करते देखा गया तो तेलांगना सरकार ने उसे भारी आर्थिक मदद की।

याद रहे कि पद्म सम्मानितों को केंद्र सरकार कोई आर्थिक मदद नहीं करती।इसका कोई प्रावधान ही नहीं।बल्कि पद्मश्री,पद्मभूषण या पद्म विभूषण शब्द को अपने नाम के साथ जोड़ने की भी सम्मानितों को अनुमति नहीं।

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ओडिशा में पद्म सम्मानित लोगों में मुगोलैया की तरह ही  विपन्न लोग जब पाये गये तो वहां की राज्य सरकार ने उन पर अनुकंपा करके वैसे पद्म सम्मानित लोगों को 30 हजार रुपए मासिक मानदेय देना शुरू कर दिया है।

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26 जनवरी 25


शनिवार, 25 जनवरी 2025

 जन्म दिन पर बधाई से आम तौर पर 

होेते हैं व्यक्तिगत संबंध मजबूत

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सुरेंद्र किशोर

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केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों के हर जन्म दिन पर राष्ट्रपति बधाई दिया करते हैं।

सांसदों के हर जन्म दिन पर प्रधान मंत्री बधाई देते हैं।

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मुझे मालूम नहीं कि यह परंपरा मोदी सरकार ने शुरू की है या पहले से रही है !

कोई जानकार व्यक्ति मेरा ज्ञान बढ़ाए।

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पर, लगता है कि यह नई है जिसकी चर्चा मैं करने जा रहा हूं।

पद् सम्मान से सम्मनित व्यक्तियों के हर जन्म दिन पर केंद्रीय गृह मंत्री खुद फोन करके बधाई देते हैं।

  उससे पहले सम्मान मिलने के तत्काल बाद भी गृह मंत्री ‘‘परसनल टच’’ देते हुए सम्मानित व्यक्ति को थोड़ी लंबी चिट्ठी लिख कर बधाई देते हंै।

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दूसरी ओर, राज्यों के मुख्य मंत्रियों का कम से कम अपने राज्य के पद्म सम्मानित व्यक्तियों के प्रति कैसा रुख-रवैया रहता है ?

क्या वे उन्हें बधाई देते भी हैं ?

व्यक्तिगत रूप से या सार्वजनिक - सामूहिक रूप से ?

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इस संबंध में बहुत तो नहीं मालूम ।

लेकिन हाल में यह खबर आई थी कि ओड़िशा सरकार ने अपने प्रदेश के पद्म सम्मानित व्यक्तियों को मासिक 30 हजार रुपए मानदेय देना शुरू किया है।

  संभवतः उस राज्य सरकार ने इसलिए ऐसा किया है क्योंकि मोदी राज में आम तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कुछ अधिक ही संख्या में पद्म सम्मान मिलने लगे हैं।

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उधर तेलांगना सरकार ने कुछ महीने पहले एक दैनिक मजदूर दर्शनम मुंगलैया को भारी आर्थिक सहायता दी।

मुंगलैया को मोदी सरकार के ही कार्यकाल में पद्म सम्मान से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था।

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25 जनवरी 25

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पुनश्चः --

आज देर रात भी देश के उन अनेक लोगों के नामों की घोषणा होगी जिन्हें पद्म सम्मान के लिए चुना गया होगा।

इस बार विभिन्न राज्यों के मुख्य मंत्रियों को चाहिए कि वे अपने -अपने राज्य के सम्मानित लोगों को कम से कम फोन पर बधाई दे दें और कुछ भले संभव न हो।

फोन पर बधाई दे देने में कौन सा पैसा लगता है ?


बुधवार, 22 जनवरी 2025

 बिहार पुलिस के बड़े अफसरों के ध्यानार्थ  

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आज के एक अखबार में यह खबर छपी है कि बिहार पुलिस 

एक फरार आरोपी की तलाश में पटना,वैशाली और समस्तीपुर जिलों में छापेमारियां कर रही है।

  जाहिर है कि पुलिस ने ही अखबार को यह जानकारी दी

होगी।

हर जगह का अखबार नेट पर हर जगह उपलब्ध है।

यह खबर पढ़ने के बाद क्या वह आरोपी किसी चैथे जिले में नहीं भाग जाएगा ?

क्या यह खबर छपवा कर पुलिस

ने आरोपी को आगाह कर दिया कि तीन जिलों में से किसी में  हो तो वहां से भाग जाओ ?यह आरोप लग ही सकता है।

या पुलिस ने यह खबर अपनी लापारवाही या अनुभवहीनता के कारण मीडिया को दे दी ?  

वैसे ऐसी खबरें अक्सर छपती रहती हंै।

अक्सर यह छपता है कि फलां अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए बिहार पुलिस नोयडा गई है।

  किसी अन्य अपराधी को पकड़ने बिहार पुलिस कोलकाता गई है।

क्या ऐसी लापरवाही या साठगांठ पर बिहार पुलिस के बड़े अफसरों ने कभी ध्यान दिया है ?

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सुरेंद्र किशोर

22 जनवरी 25


मंगलवार, 21 जनवरी 2025

 ईश्वर उसी की मदद करता है जो 

अपनी मदद खुद करता है

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सुरेंद्र किशोर

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1.-मोतियाबिंद का आॅपरेशन अब तक तो मुझे करवाना नहीं पड़ा है।

2.-एक को छोड़कर मेरे सारे दांत अब भी सही सलामत हैं।

(वह एक भी मेरा साथ नहीं छोड़ता,यदि ‘उपाय’ का पता मुझे उससे पहले चल गया होता !)

3.-मेरे बाल भी अधिकतर सम वयस्कों की अपेक्षा कम पके हैं।

4.-नौकरी के दौर में जितने घंटे मैं काम करता था,उसकी अपेक्षा आज कुछ अधिक ही काम कर रहा हूं।

फिर भी थकावट नाम की चीज नहीं है।आदि आदि

मैं पूरी अवधि सेवा करने के बाद आज से बीस साल पहले रिटायर कर गया था।

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शरीर के सारे महत्वपूर्ण अंग अभी काम कर रहे हैं।स्वास्थ्य संबंधी एक -दो समस्याएं जरूर हैं,पर उनका प्रबंधन संभव है।

इस उपलब्धि में ईश्वर,चिकित्सक और मेरे अपने अनुशासन का योगदान रहा है।

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सन 1966-67 से लेकर 1976-77 तक अपने शरीर को एक तरह से मैंने जर्जर बना लिया था।

राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर समाजवाद लाने की भोली मृगतृष्णा में दस साल तक भटकता रहा।

न खाने का ठीक, न सोने का।मान-सम्मान ताखे पर।

साठ के दशक में पटना के विधायक फ्लैट इलाके की झोपडियों में 10 आने में भरपेट भोजन मिलता था।

पर हमेशा उतने पैसे मेरे पास होते नहीं थे।छह आने में एक प्लेट पकौड़ी से काम चला लेता था।वैसे में पाचन क्रिया का कचूमर निकल चुका था।

पर जब संभला तो कठोरता से कई तरह के संयम बरतने लगा।

उसका नतीजा है --आज की उपलब्धि।

गांधी जी की जो थोड़ी सी बातें मैं मानता हूं ,उनमें एक यह भी ़है कि ‘‘बीमारी मनुष्य के पाप का फल है।’’

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मैंने यह पोस्ट इसलिए लिखा ताकि मैं यह बता सकूं कि यदि आप संयम बरतंेगे तो इस शरीर से अधिक दिनों तक काम लेते रहंेगे।साथ ही,यदि परिवार आप पर निर्भर है तो उसे आपके  असमय उठ जाने की पीड़ा नहीं सहनी पड़ेगी।

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यह पढ़कर मुझसे उपाय मत पूछने लगिएगा।क्योंकि मैं कोई लाइसेंसधारी चिकित्सक नहीं हूं।

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20 जनवरी 25


 


‘‘बांग्ला देश,पाकिस्तान,कश्मीर,असम,केरल और भारत के अन्य हिस्से मिलाकर हम मुसलमानों ने हिन्दुओं से 70 प्रतिशत जमीन छीन ली है।

  फिर भी हिन्दू इस भ्रम में हैं कि हम 1400 साल में उनका कुछ बिगाड़ नहीं सके।

भारत लगभग इस्लामी देश बन चुका है।’’

-----अबू बकर,

प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन 

पी.एफ.आई.का पूर्व प्रमुख

स्त्रोत--सोशल मीडिया

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18 जनवरी, 2025 को जनसत्ता में छपी एक खबर

यहां नीचे दी जा रही है।

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पीएफआई के पूर्व प्रमुख अबू बकर को 

सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका

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नयी दिल्ली, 17 जनवरी।

पाॅपुलर फं्रट आॅफ इंडिया के पूर्व प्रमुख अबू बकर की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।(याद रहे कि पी.एफ.आई.केरल में सर्वाधिक मजबूत है।)

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गत 22 दिसंबर, 2024 के इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार,

सी.पी.एम.पाॅलिट ब्यूरो के सदस्य विजय राघवन ने यह आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की, केरल के वायनाड लोक सभा क्षेत्र से जीत के पीछे सांप्रदायिक मुस्लिम गठबंधन का बल था।

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लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गत 15 जनवरी 25 को नयी दिल्ली में कहा कि ‘‘अब हम भाजपा,आर.एस.एस.और इंडियन स्टेट से लड़ रहे हंै।’’

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उधर पी.एफ.आई.ने पहले से ही यह घोषणा कर रखी है कि हम हथियारोें के बल पर सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देंगे।

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यानी, पी.एफ.आई.भी इंडियन स्टेट के खिलाफ लड़ रहा है।

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जानकार सूत्रों के अनुसार जो शक्तियां भारत को इस्लामिक देश बनाना चाहती हंै ,वह इस कोशिश में भी लगी रहती है कि मुसलमानों को एक करो और हिन्दुओं को बांटो।

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क्या यह सिर्फ संयोग है कि राहुल गांधी जातीय गणना पर जोर दे रहे हैं और कह रहे कि आरक्षण 50 प्रतिशत वाली ऊपरी सीमा को हम समाप्त करेंगे ?

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21 जनवरी 25