रविवार, 26 जनवरी 2025

 मैग्सेसे पुरस्कार बनाम पद्म सम्मान

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सुरेंद्र किशोर

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सन 1965 में जयप्रकाश नारायण को मैग्सेसे पुरस्कार 

मिला था।

सन 1974 में जब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने उन पर आरोप लगाया था तो जेपी ने जवाब में यह कहा था कि मैग्सेसे पुरस्कार के रूप में मिले पैसों के सूद से मेरे घर का खर्च चलता है।

उससे पहले इंदिरा जी ने कहा था कि जो लोग पूंजीपतियों के पैसों पर पलते हैं,उन्हें हमारी सरकार के भ्रष्टाचार पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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अब आप कल्पना कीजिए कि जिस जेपी ने देश की आजादी के लिए खुद को होम कर दिया,जिन्होंने आजादी के बाद भी बड़े- बड़े पद ठुकरा दिए,उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार के तहत यदि कुछ पैसे नहीं मिल गये होते तो उनकी आर्थिक स्थिति 

कैसी होती ?!

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 तेलांगना के दर्शनम् मुगोलैया को भारत सरकार ने सन 2022 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

देश के चैथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित व्यक्ति मुगोलैया को जब बाद में भी हैदराबाद की एक निर्माण कंपनी में मजदूरी करते देखा गया तो तेलांगना सरकार ने उसे भारी आर्थिक मदद की।

याद रहे कि पद्म सम्मानितों को केंद्र सरकार कोई आर्थिक मदद नहीं करती।इसका कोई प्रावधान ही नहीं।बल्कि पद्मश्री,पद्मभूषण या पद्म विभूषण शब्द को अपने नाम के साथ जोड़ने की भी सम्मानितों को अनुमति नहीं।

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ओडिशा में पद्म सम्मानित लोगों में मुगोलैया की तरह ही  विपन्न लोग जब पाये गये तो वहां की राज्य सरकार ने उन पर अनुकंपा करके वैसे पद्म सम्मानित लोगों को 30 हजार रुपए मासिक मानदेय देना शुरू कर दिया है।

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26 जनवरी 25


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