सोमवार, 27 जनवरी 2025

 जिन्दगी..कैसी है पहेली हाय..!

कभी तो हंसाए,कभी ये रुलाए !!

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सुरेंद्र किशोर

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नौकरी--

यह आपको कभी भूखा नहीं मरने देगी,

पर,आपको कभी अमीर भी नहीं होने देगी।

आपकी पूरी जवानी खा जाएगी,

और बुढ़ापे में जब आप किसी काम के 

नहीं रहोगे  

तो आपको लात मार देगी।

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फिर कौन काम आएगा ?

बेटा ?

भूल जाइए।

क्योंकि (अपवादों को छोड़कर)उसका भी अपना जीवन है,अपना संसार है।

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यदि आप कोई सरकारी मदद स्वीकार करेंगे तो 

ज्वलन शील साॅरी ‘जलन’ शील और ईष्र्यालु तत्व 

आपको तुरंत दलाल घोषित कर देंगे।

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यानी, न पहले चैन और न बाद में कोई सुख !

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फिर तो ‘आनन्द’ फिल्म की इस गीत के 

साथ संतोष कीजिए---

‘‘जिन्दगी कैसी है पहेली हाय !

कभी तो हंसाए ,कभी तो रुलाए।

...............’’

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नोट--किसी गलत फहमी में मत रहिएगा।

किसी एक की नहीं,बल्कि यह घर-घर की कहानी है।

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27 जनवरी 25


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