Monday, September 29, 2008

यहां,वहां का फर्क
हाल में बिहार का एक व्यक्ति पटना-पूणे एक्सप्रेस से पूणे गया था।उसने लौटकर बताया कि ट्रेन तो एक ही है।वह पटना से खुलती है और पूणे तक जाती है।पर, उस टेन के डिब्बों और उसके यात्रियों के साथ रेल व पुलिसकर्मियों का विभिन्न प्रदेशों में व्यवहार बिलकुल अलग तरह का होता है। बिहार और उत्तर प्रदेश से जब तक वह ट्रेन गुजरती है तो अवैध यात्रियों को रिजर्व डिब्बे में प्रवेश करने से पुलिस व रेलकर्मी नहीं रोकते। यहां तक कि अवैध तरीके से गुटका तथा अन्य सामान बेचने वालों को भी ट्रेन में पूरी छूट रहती है।पर जैसे ही ट्रेन मध्य प्रदेश की सीमा में पहुंचती है, व्यवस्था बेहतर हो जाती है।मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के रेलवे जंक्शनों पर डिब्बों व बाथ रूमों की सफाई होने लगती है। अधिकृत यात्रियों के अलावा कोई अनधिकृत यात्री या हाॅकर डिब्बे में प्रवेश नहीं कर पाता।याद रहे कि जब तक वही गाड़ी बिहार-उत्तर प्रदेश में रहती है,बाथ रूमों से भारी दुर्गंध आती रहती है और उसकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं देता।रेल महकमा तो एक ही है, पर ऐसा फर्क क्यों है ?
डी.एन।ए.-नार्को का उपयोग
टी।वी. कलाकार सीमा कपूर ने सलाह दी है कि राजनीति में प्रवेश से पहले राजनीतिक कार्यकत्र्ताओं का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उनका राजनीति में आने का वास्तविक उद्देश्य क्या है।वह कहती हैं कि ‘मुझे स्वार्थ और भ्रष्टाचार में लिप्त राजनीति का वर्तमान चेहरा देख कर घृणा भी होती है और डर भी लगता है।’ पर, सवाल है कि नार्को टेस्ट कराने की सीमा कपूर की सलाह इस देश का कौन नेता व दल मानने को आज तैयार होगा ? जन सेवा,लोकहित और राष्ट्रहित की भावना से ओतप्रोत व्यक्ति की उन्हें आज जरूरत ही कहां है ! पर, इस तरह की मांग, इस देश की राजनीति में बढ़ रही जानलेवा गंदगी के प्रति गैर राजनीतिक लोगों की बढ़ती पीड़ा को जरूर दर्शाती है। उधर असम की सरकार ने भारत सरकार को इसी तरह की सलाह बंगला देशी घुसपैठियों के बारे में दी है।करीब एक करोड़ बंगलादेशी घुसपैठियों की समस्या से जूझ रही असम सरकार ने केंद्र को सलाह दी है कि जो व्यक्ति नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स, 1951 में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं, उनका डी.एन.ए.टेस्ट होना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उनके पूर्वज यहीं के हैं।यानी, इस देश में गरीब विरोधी व देश विरोधी तत्वों को सामान्य प्रशासनिक मशीनरी द्वारा रोकना असंभव हो चला है।इसीलिए तो भ्रष्ट नेताओं व राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए नार्को व डी.एन.ए. जांच की सलाह दी जा रही है ! पर, जब करोड़ों बंगलादेशी घुसपैठियों के भविष्य के बारे में केंद्रीय कैबिनेट के सदस्यों के बीच ही आम राय नहीं है तो केंद्र सरकार, असम सरकार की बात कैसे मानेगी ?
बेलगाम बुद्धिजीवी की ताजा उड़ान
‘बेलगाम बुद्धिजीवी’ अरूंधति राय की राय है कि ‘कश्मीर को भारत से और भारत को कश्मीर से आजादी की जरूरत है।’ समय -समय पर ऐसी ही सलाह देने वाली इस ‘विश्व नागरिक’ की ताजा सलाह को भी एक ‘मुक्त चिंतक’ संपादक ने अपनी पत्रिका में प्रकाशित किया है। थोड़ी देर के लिए यह कल्पना कीजिए कि इस सलाह को लागू कर दिया जाए । तो फिर क्या होगा ? क्या उसके बाद का कुपरिणाम सिर्फ भारत तक सीमित ही रहेगा ? वैसे भारत में भी उन इलाकों को भी भारत से अलग करके न सिर्फ अलग मुस्लिम देश बनाने की मांग तेज होगी, बल्कि ऐसी मांग दुनिया के अन्य कई देशामें में भी होने लगेगीं ंक्योंकि कश्मीर के अलग हो जाने से सबसे बड़ा मनोबल ओसामा बिन लादेन का ही तो बढ़ेगा।उनके लड़ाके दुनिया के कई अन्य देशों के साथ साथ कश्मीर में भी सक्रिय हैं।ओसामा ने घोषणा कर रखी है कि अमेरिका के बाद भारत ही उसके निशाने पर है।बहाना अभी कश्मीर का है। और अंत मेंनेपाल के कुशहा में कोसी तटबंध क्या टूटा,बिहार की राजनीति में झूठ और सच के बीच की पहले से ही पतली होती लकीर भी मिट गई।
साभार प्रभात ख़बर

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