सी.ए.ए.और एन.आर.सी.पर प्रशांत किशोर
की राय अब बदली है या वही है ?
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सुरेंद्र किशोर
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सन 2019 में प्रशांत किशोर को जदयू ने अपनी पार्टी से निकाल दिया था।
मुददा था-जदयू सी.ए.ए.का समर्थन कर रहा था और प्रशांत
किशोर उसका विरोध।
प्रशांत किशोर ने तब एन.आर.सी.का भी विरोध किया था।
इस मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कैबिनेट स्तर के पद की सुविधा को भी
लात मार दी थी।यानी यह मुद्दा उनके लिए इतना अधिक महत्वपूर्ण था।
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प्रशांत किशोर की इन दो मुद्दों पर अब क्या राय है ?
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अब आम भाषा में सी.ए.ए. और एन.आर सी.को समझें।
सी.ए.ए.के खिलाफ तब दिल्ली शाहीन बाग में धरना हुआ था।
धरना देने वालों ने यह बात फैलाई कि सी.ए.ए.लागू होने से मुसलमानों की नागरिकता ले ली जाएगी।
जबकि सी.ए.ए. है पड़ोस के देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने का कानून।
सी.ए.ए. अब लागू है।उन पीड़ित लोगों को नागरिकता दी जा रही है।पर किसी भारतीय मुस्लिम की नागरिकता नहीं ली गई।
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एन.आर.सी.यानी नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजन्स।
पाकिस्तान में भी एन आर सी है।
पर भारत में निहित स्वार्थी लोग इसे नहीं बनने दे रहे हैं।उनको आशंका है कि वे फिर घुसपैठियों के नाम हम उस रजिस्टर में कैसे शामिल करा पाएंगे ?
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27 अगस्त 26
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