सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

 उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर शम्भूनाथ शुक्ल और राजदीप सरदेसाई की भविष्यवाणी का मुझे इंतजार है।

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  सुरेंद्र किशोर

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उत्तर प्रदेश चुनाव का नतीजा क्या होगा ?

किसकी सरकार बनेगी ?

मुझे याद है,पिछले चुनाव में दो शीर्ष पत्रकारों की भविष्यवाणियां सही साबित हुई थीं।

और की भी हुई हांेगी,किंतु मुझे यू.पी.को लेकर शम्भूनाथ शुक्ल और राजदीप सरदेसाई की चुनावी भविष्यवाणी याद हंै।

इन दोनों ने भाजपा की जीत की उम्मीद जताई थी।

वही हुआ भी।

इन दोनों में कोई भी भाजपा का समर्थक नहीं है।

 मोदी विरोधी छवि के विपरीत राजदीप की चुनावी भविष्यवाणियां आम तौर से सही साबित होती रही हैं।

शम्भूनाथ शुक्ल को तो मैं मुक्त चिंतक मानता हूं।

  अन्य अनेक पत्रकारों की भविष्यवाणियां भी मैं वर्षों से देखता -पढ़ता रहा हूं।

उनमें से अधिकतर पत्रकार अपनी परंपरागत राजनीतिक लाइन के अनुसार ही भविष्यवाणी करते रहते हैं। 

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5 फरवरी 22


रविवार, 6 फ़रवरी 2022

    भ्रष्टाचार का दीमक देश को खोखला कर रहा

        --नरेंद्र मोदी,

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मनी लाउंडरिंग का अपराध हत्या से भी अधिक जघन्य

      --भारत का सुप्रीम कोर्ट

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जब लोकतंत्र के दोनों स्तम्भ भ्रष्टाचार से इतना दुखी तो भ्रष्टों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान करने में देरी क्यों हो रही-----भारत की जनता

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सुरेंद्र किशोर

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा है कि भ्रष्टाचार का दीमक देश को खोखला कर रहा है।

इससे अधिक सही बात और कुछ भी नहीं हो सकती।

किंतु लगता है कि न तो सारे दीमकों की पहचान हो पा रही है और न ही उन पर पर्याप्त कीटनाशक दवाएं ही छिड़की जा रही हंै।

  दरअसल सबसे बड़ा ‘दीमक’ तो सांसद-विधायक फंड की कमीशनखोरी है।

 मात्रा के अनुपात में इसका कुप्रभाव बहुत अधिक है।

अनेक अफसरों व जन प्रतिनिधियों को इसी स्तर से गलत करने की प्रेरणा मिल जाती है।

यह बात सही है कि कुछ जन प्रतिनिधि नजराना-शुकराना स्वीकार नहीं करते।

किंतु यह भी सही है कि अधिकतर जन प्रतिनिधि स्वीकार करते हैं।

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 5 फरवरी 22


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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

आज कौन याद करता है 

डा.गोरखनाथ सिंह को !

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सुरेंद्र किशोर

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गोरख कहां है ?

यही सवाल प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू से किया था ब्रिटिश अर्थशास्त्री हिक्स ने।

  प्रधान मंत्री को गोरख यानी डा.गोरखनाथ सिंह के बारे में कुछ पता नहीं था।

 नेहरू जी को यह भी कैसे  पता होता  कि कैब्रिज के सेकेंड टाॅपर का यह सवाल अपने बैच के टाॅपर के बारे में था।

खैर, डा.गोरखनाथ सिंह के बारे में छात्र जीवन में ही अपने गांव और छपरा में मैंने सुन रखा था।

 वे बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा के पास के एक गांव के मूल निवासी थे।

  जब मैं छात्र था तो एक दूसरे संदर्भ में गोरख बाबू का नाम सुनता रहता था।

जब किसी छात्र को यह कहा जाता था कि खैनी यानी तम्बाकू मत खाओ।

इससे दांत जल्दी टूट जाएंगे तो जानते हैं वह क्या जवाब देता था ?

वह कहता था कि यह बुद्धिवर्धिनी चूर्ण है।

इसे गोरख बाबू भी खाते थे।

  यह बात सही है कि गोरख बाबू तम्बाकू चूर्ण यानी खैनी खाते थे।

किंतु वे साथ- साथ एक विलक्षण प्रतिभा वाले अर्थशास्त्री भी थे।

  उन्हें जानने वाले बताते हैं कि उनकी छपने वाली एक किताब की पांडुलिपि को ही उनकी अशिक्षित पत्नी ने चूल्हे में झोंक दिया था।

उसमें नई थ्योरी लिखी गई थी।

  खैर,गोरख बाबू पटना काॅलेज के प्रिंसिपल थे।

मौजूदा ए.एन.सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान के निदेशक थे और बिहार सरकार के डी.पी.आई.भी रहे थे।

 उनका साठ के दशक में निधन हो गया।

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पुनश्चः,गोरख बाबू के बारे में मुझे तो इतना ही मालूम है।

किन्हीं व्यक्ति कुछ और पता हो तो जरूर लिखें।

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फेसबुक वाॅल से

29 जनवरी 22

   


बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

      राहुल बनाम वरुण 

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यदि जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते तो राहुल गांधी 

और वरुण गांधी के बीच नेतृत्व के लिए किसे चुनते ?

यानी, इनमें से किसे कांग्रेस का नेतृत्व सौंपते ?

1929 में न मोतीलाल नेहरू के समक्ष कोई दुविधा थी और न ही 1959 में जवाहरलाल नेहरू के समक्ष।

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4 मई, 1981 को इंदिरा गांधी ने अपनी वसीयत में लिखा कि

 ‘‘मैं यह देखकर खुश हूं कि राजीव और सोनिया ,वरुण को उतना ही प्यार करते हैं जितना अपने बच्चों को।

  मुझे पक्का भरोसा है कि जहां तक संभव होगा,वो हर तरह से वरुण के हितों की रक्षा करेंगे।’’

 पर,अब यह देखा जा रहा है कि सोनिया ने न तो इंदिरा की भावना का ध्यान रखा और न ही कांग्रेस के भविष्य की चिंता की।

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सुरेंद्र किशोर

2 फरवरी 22


   क्या नरेंद्र मोदी के इस वायदे को 

  भी पूरा करने की मांग प्रतिपक्ष कभी करेगा ?!!

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 प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में जो भाषण दिया है,उसे किसी ने मुझे व्हाट्सैप पर भेजा है।

वह भाषण आपसे भी शेयर कर रहा हूं।कब का यह भाषण है,यह स्पष्ट नहीं है।

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मैंने सन 1962 में छपरा में जवाहरलाल नेहरू का भी 

भाषण सुना था।

यानी,इस बीच मैंने बारी -बारी से सभी प्रधान मंत्रियों के भाषण  सुने हैं।

पर, मोदी ने जैसा बोलने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई थी।

मोदी का निम्न लिखित भाषण सिर्फ चुनावी भाषण नहीं हैं।

मुझे लगता है कि यदि भाजपा उत्तर प्रदेश जीत गई तो देश में भारी परिवत्र्तन हो सकता है।

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सुरेंद्र किशोर

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दृश्य-1

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 

‘‘भ्रष्ट और बेईमान लोग मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

मुझे बर्बाद करके छोड़ेंगे।

उन्हें जो करना है,वह करें,पर मैं आजादी के बाद के सारे लुटेरों का कच्चा चिट्ठा खोल कर रहूंगा।’’

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   मोदी ने यह भी कहा कि ‘‘ देश में जारी भ्रष्टाचार और बेईमानी खत्म करने के लिए मेरे दिमाग में और कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

वे प्रोजेक्ट आने वाले हैं।

जिनके पास बेईमानी के पैसे हैं,वे यह मानकर चलें कि वह कागज का टुकड़ा है।

उसे बचाने के लिए अधिक कोशिश नहीं करें।

देश आजाद हुआ,तब से अब तक का उनका कच्चा चिट्ठा मैं खोल दूंगा।

जरूरत पड़ेगी तो एक लाख नौजवानों को नौकरी दूंगा।

 उन्हें इसी काम में लगाऊंगा।’’

प्रधान मंत्री ने यह भी कहा है कि

 ‘‘इस देश में ईमानदार लोगों की कमी नहीं है।

मेरी अपील है कि ईमानदार लोग इस काम में मेरा साथ दीजिए।

देश में जारी भ्रष्टाचार-बेईमानी के कारोबार को रोकना है।

 मैं जानता हूं कि मैंने कैसी -कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ली है।

वे मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

मुझे बर्बाद करके छोड़ेंगे।

 उन्हें जो करना है,करें।

सत्तर साल का उनका (लुटा हुआ)मैं लूट रहा हूं।

वे मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

मैंने घर -परिवार देश के लिए छोड़ा है।

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दृश्य-2

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अब कांग्रेस को ‘न्याय योजना’ वाली सलाह देने वाले नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी की इस देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में क्या राय है,उसे भी लगे हाथ पढ़ लीजिए--

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यह भ्रष्ट राजनीति का गुरू मंत्र है।

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‘‘चाहे यह भ्रष्टाचार का विरोध हो या भ्रष्ट के रूप में देखे जाने का भय, शायद भ्रष्टाचार अर्थ -व्यवस्था के पहियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण था, इसे काट दिया गया है।

मेरे कई व्यापारिक मित्र मुझे बताते हैं इससे निर्णय लेेने की गति धीमी हो गई है।.............’’

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--नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी,

हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स

23 अक्तूबर 2019

                   

  

 


     मशहूर पत्रकार अरुण सिन्हा ‘नवहिंद 

   टाइम्स’ के संपादक पर से सेवानिवृत

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      सुरेंद्र किशोर

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देश के योग्यत्तम पत्रकारों और लेखकों में से एक अरुण सिन्हा ‘नवहिंद टाइम्स’(गोवा) के संपादक पद से हाल में सेवानिवृत हो गए।

वे अब फ्रीलांसर हैं।

बिहार के मूल निवासी अरुण फरीदाबाद में बसेंगे।

 मैं अरुण सिन्हा के लेखन व रिपोर्टिंग का बहुत दिनों से प्रशंसक रहा हूं।

 अरुण उन पत्रकारों में नहीं रहे जो तथ्यों से भी यदाकदा खिलवाड़ कर देते हैं।

कुछ समय तक हमलोग एक्सप्रेस ग्रूप में साथ-साथ रहे।

पटना आॅफिस में वे इंडियन एक्सप्रेस में थे और मैं जनसत्ता में।

  भागलपुर अंधाकरण कांड का भंडाफोड़ अरुण सिन्हा ने ही किया था।

उसके अतिरिक्त भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग कीं।

इंदिरा गांधी की चर्चित बेलछी यात्रा की सही रिपोर्टिंग अरुण ने ही की थी।

वे इंदिरा जी के साथ वहां गए थे।

मैंने देखा है कि अरुण जब भी किसी खास खबर पर काम करते थे,उसमें वे तथ्य जुटाने में काफी मेहनत करते थे। 

  फ्रीलांसर होने के कारण अब देश के अनेक प्रकाशनों में  उन्हें पढ़ने का मौका हमें मिलेगा।

  अरुण को जानने व पसंद करने वाले लोग देश भर में हैं।

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1 फरवरी, 22  


मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

      इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित किए 

    बिना ही समस्या का समाधान खोजिए

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        -- सुरेंद्र किशोर --

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प्रयागराज में हाल में आयोजित संतों की धर्म संसद में यह मांग की गई है कि भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए।

  जिस खतरे के मुकाबले के लिए संतों ने यह मांग की है, उस खतरे से कई देश, खासकर चीन मुकाबला कर ही रहे हैं,वह भी अपने देश को किसी धर्म का देश बनाए बिना ही।

  इसलिए इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है।

हां,खतरों के प्रति सावधान रहने के लिए देशभक्त देशवासियों को और अधिक जागृत करते रहने की जरूरत है।

 इस देश को धर्म निरपेक्ष ही बने रहने दिया जाना चाहिए।

जो हिन्दू नहीं हैं,उनमें भी कई तरह के विचार के लोग हैं।

अनेक गैर हिन्दू लोग भी शांति से रहना चाहते हैं।

रह भी रहे हैं।

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दूसरी ओर, मुस्लिम देशांे में भी अधिक नहीं, किंतु कुछ परिवर्तन तो होने ही लगे हैं।बदलते समय की जरूरत वे समझ रहे हैं।

  पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर वहां के कुछ लोग कट्टर पंथियों के विरोध में सख्त तरीके से अब बोलते देखे जाते हंै।

गत दिसंबर में सऊदी अरब सरकार ने तबलीगी जमात को आतंकवादी करार देते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया ।

  हाल में सूडान सरकार ने, जो देश 30 साल से इस्लामिक देश था,खुद को धर्म निरपेक्ष घोषित कर दिया।

इस तरह के अन्य उदाहरण भी हैं।

    यहां इस देश में मेरे कुछ ऐसे मुस्लिम मित्र हैं जिन्हें जेहादी सक्रियता वगैरह से कोई मतलब नहीं है।

वे शांतिपूर्वक मिलजुल कर रहना चाहते हैं।रह भी रहे हैं।

पर, इसके लिए यह भी जरूरी है कि बहुसंख्यक समाज के लोग भी किसी अन्य समुदाय पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश न करें।

अल्पसंख्यकों के साथ भी बराबरी का व्यवहार करें।

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चाहे किसी भी समुदाय का कट्टरपंथी व्यक्ति कहीं भी हिंसा करे,उसकी समान रूप से सभी समुदायों के नेता -बुद्धिजीवी लोग आलोचना करें।

  ऐसा न हो कि गोधरा में तो 59 लोगों को ट्रेन में जलाकर मार देने की तो कोई निंदा नहीं हो,किंतु प्रतिक्रिया में हुई हिंसक घटनाओं के खिलाफ सिर पर आसमान उठा लिया जाए। 

 हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में अल्पसंख्यक  कट्टरपंथियों ने एक गैर मुस्लिम की हत्या कर दी।

 उस पर सोशल मीडिया पर धार्मिक भावना से खिलवाड़ करने का आरोप था।

  इस हत्याकांड के खिलाफ किसी सेक्युलर नेता या बुद्धिजीवी ने बयान तक नहीं दिया है।

कम से कम मैंने तो कोई बयान नहीं देखा।

हां,यदि किसी और की हत्या हुई होती तो बयानों की झरी लग जाती।

इस रवैए को भी बदलने की जरूरत है।

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31 जनवरी 22