इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित किए
बिना ही समस्या का समाधान खोजिए
.................................................
-- सुरेंद्र किशोर --
. ...............................................
प्रयागराज में हाल में आयोजित संतों की धर्म संसद में यह मांग की गई है कि भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए।
जिस खतरे के मुकाबले के लिए संतों ने यह मांग की है, उस खतरे से कई देश, खासकर चीन मुकाबला कर ही रहे हैं,वह भी अपने देश को किसी धर्म का देश बनाए बिना ही।
इसलिए इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है।
हां,खतरों के प्रति सावधान रहने के लिए देशभक्त देशवासियों को और अधिक जागृत करते रहने की जरूरत है।
इस देश को धर्म निरपेक्ष ही बने रहने दिया जाना चाहिए।
जो हिन्दू नहीं हैं,उनमें भी कई तरह के विचार के लोग हैं।
अनेक गैर हिन्दू लोग भी शांति से रहना चाहते हैं।
रह भी रहे हैं।
.............................
दूसरी ओर, मुस्लिम देशांे में भी अधिक नहीं, किंतु कुछ परिवर्तन तो होने ही लगे हैं।बदलते समय की जरूरत वे समझ रहे हैं।
पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर वहां के कुछ लोग कट्टर पंथियों के विरोध में सख्त तरीके से अब बोलते देखे जाते हंै।
गत दिसंबर में सऊदी अरब सरकार ने तबलीगी जमात को आतंकवादी करार देते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया ।
हाल में सूडान सरकार ने, जो देश 30 साल से इस्लामिक देश था,खुद को धर्म निरपेक्ष घोषित कर दिया।
इस तरह के अन्य उदाहरण भी हैं।
यहां इस देश में मेरे कुछ ऐसे मुस्लिम मित्र हैं जिन्हें जेहादी सक्रियता वगैरह से कोई मतलब नहीं है।
वे शांतिपूर्वक मिलजुल कर रहना चाहते हैं।रह भी रहे हैं।
पर, इसके लिए यह भी जरूरी है कि बहुसंख्यक समाज के लोग भी किसी अन्य समुदाय पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश न करें।
अल्पसंख्यकों के साथ भी बराबरी का व्यवहार करें।
...............................
चाहे किसी भी समुदाय का कट्टरपंथी व्यक्ति कहीं भी हिंसा करे,उसकी समान रूप से सभी समुदायों के नेता -बुद्धिजीवी लोग आलोचना करें।
ऐसा न हो कि गोधरा में तो 59 लोगों को ट्रेन में जलाकर मार देने की तो कोई निंदा नहीं हो,किंतु प्रतिक्रिया में हुई हिंसक घटनाओं के खिलाफ सिर पर आसमान उठा लिया जाए।
हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में अल्पसंख्यक कट्टरपंथियों ने एक गैर मुस्लिम की हत्या कर दी।
उस पर सोशल मीडिया पर धार्मिक भावना से खिलवाड़ करने का आरोप था।
इस हत्याकांड के खिलाफ किसी सेक्युलर नेता या बुद्धिजीवी ने बयान तक नहीं दिया है।
कम से कम मैंने तो कोई बयान नहीं देखा।
हां,यदि किसी और की हत्या हुई होती तो बयानों की झरी लग जाती।
इस रवैए को भी बदलने की जरूरत है।
...................................
31 जनवरी 22
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें