मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

   चारा घोटाले की जांच के दौरान 

जांच एजेंसी व पत्रकार दहशत में थे

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सुरेंद्र किशोर

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 जिन दिनों पटना हाईकोर्ट की सतत निगरानी में सी.बी.आई.चारा घोटाले से संबंधित मामलों का अनुसंधान कर रही थी,उन दिनों जांच एजेंसी के लोगों व कुछ पत्रकारों को कठिन समय से गुजरना पड़ा था।

  उनके परिजन भी दहशत में थे।

  आज रांची की अदालत ने जिन लोगों को सजा दी है,उनमें से एक आरोपित ने दो पत्रकारों पर अपना खास निशाना साधा था।

तब वह बेऊर जेल में था।

उसके एक जेल सहयात्री के अनुसार उसने जेल में गपशप के दौरान कहा था कि जेल से निकलने के बाद फलां (अंग्रेजी अखबार के संवाददाता) की मुड़ी काट दूंगा।

  दूसरे पत्रकार (हिन्दी अखबार के संवाददाता) के बारे में कहा था कि उसकी बांह काट दूंगा।

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सी.बी.आई.के संयुक्त निदेशक डा.यू.एन.विश्वास ने पटना में संवाददाताओं को तब बताया था कि 

‘‘मैं जब भी कोलकाता से पटना के लिए रवाना होता हूं तो अपनी पत्नी को यह कहकर आता हूं कि शायद मैं नहीं लौटूं।’’

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चारा घोटाले के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल करने वालों व चारा घोटालेबाजों के खिलाफ अभियान चलाने वाले नेताओं को तो बाद में तरह-तरह के पद मिले।

 मिलने भी चाहिए थे।

  किंतु पत्रकारों और जांचकत्र्ताओं को क्या मिला ?

 सिर्फ अपमान,धमकी और गाली -गलौज।

 हालांकि पत्रकार किसी पुरस्कार के लिए तब खतरा नहीं उठा रहे थे।

वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

 वह भी एक तरह की जन सेवा ही थी।

रांची अदालत ने अंततः यह साबित कर दिया कि उनकी ड्यूटी सच पर आधारित थी। 

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21 फरवरी 22


शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2022

  कभी बैल गाड़ी पर नाव तो कभी नाव पर गाड़ी।

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        सुरेंद्र किशोर

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बात तब की है जब मंडल आयोग की रपट लागू करने की मांग हो रही थी और केंद्र की कांग्रेस सरकार उस मांग को लगातार ठुकरा रही थी।

  तब पिछड़ा वर्ग के एक मुखर नेता राम अवधेश सिंह ने मुझसे कहा था कि ‘‘अभी तो कांग्रेस हमें हिस्सेदारी नहीं दे रही है।किंतु एक समय आएगा कि उसे हमसे हिस्सेदारी मांगनी पड़ेगी।तब यह हम पर होगा कि हम उसे कितनी हिस्सेदारी दें।’’

  विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार को लेकर राजद के समक्ष बिहार कांग्रेस की दयनीय स्थिति को देखकर मुझे राम अवधेश की वह पुरानी बात याद आ गई।

राजद कांग्रेस को 24 में से एक भी सीट देने को तैयार नहीं है।महागठबंधन में शामिल कांग्रेस को गत विधान सभा उप चुनावों में भी राजद ने एक भी सीट नहीं दी थी।

याद रहे कि राम अवधेश सिंह 1969 में आरा से संसोपा विधायक थे।

1977 में बिक्रमगंज से लोक सभा सदस्य थे।

बाद में राज्य सभा के सदस्य भी बने थे।

अब वे इस दुनिया में नहीं हैं।

  मंडल आयोग की रपट 1980 में ही केंद्र सरकार को मिल गई थी।

1980 और 1990 के बीच उस रपट पर संसद में तीन बार लंबी चर्चा हुई।

   कांग्रेस सरकार ने संसद में लगातार यह कहा कि रिपोर्ट को लागू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।

  1990 में वी.पी.सिंह की सरकार ने जब इसे लागू किया तो तब के प्रतिपक्ष के नेता राजीव गांधी ने लोक सभा में ऐसा ‘गोलमोल’ भाषण दिया जिससे अधिकतर पिछड़ों को यह लगा कि कांग्रेस आरक्षण के पक्ष में नहीं है।

तब राजीव गांधी, आरक्षण विरोधी और  नेहरूवादी मणिशंकर अय्यर के प्रभाव में थे।

प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पचास के दशक में ही कह दिया था कि हम किसी तरह के आरक्षण के खिलाफ हैं।

उसका खामियाजा कांग्रेस को अब भी मिल रहा है।  

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फरवरी 22

 


गुरुवार, 17 फ़रवरी 2022

 काश ! नरेंद्र मोदी नहीं,तो नेहरू के बारे में 

राजीव गांधी के ‘सर्टिफिकेट’ को ही समझने 

की ही जरूरत समझ पाते राहुल गांधी

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सुरेंद्र किशोर

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि ‘‘मेरे परनाना जवाहरलाल नेहरू को किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।’’

- दैनिक भास्कर, 9 फरवरी, 22

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राहुल गांधी जी, 

किसी और के सर्टिफिकेट की भले जरूरत आपको न हो,किंतु आपके पिता जी यानी राजीव गाधी ने 1985 में परोक्ष रूप से  अपने पूर्ववर्तियों को जो ‘सर्टिफिकेट’ दिया

 था, काश ! उसी के निहितार्थ को समझने की जरूरत आप समझ पाते।

यदि जरूरत समझकर सन 2004 -2014 के अपने दल के शासन काल में सरकारी-गैर सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी अभियान चलवाते तो जो ‘पतली’ हालत आज कांग्रेस की हुई है,वह नहीं होती।

याद करिए।

तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि सरकार दिल्ली से जो 100 पैसे भेजती है,उसमें से 15 पैसे ही जनता तक पहुंच पातेे हंै।

बाकी, बिचैलिए खा जाते हैं।

उन्होंने सत्ता के दलालों के खिलाफ अभियान चलाने की जरूरत भी बताई थी।

यह और बात है कि बोफोर्स दलाल क्वात्रोचि को बचाने के क्रम में राजीव गांधी अपनी ही गद्दी गंवा बैठे।

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जब जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में सरकारी भ्रष्टाचार दिन दूनी रात चैगुनी बढ़ने लगा तो केंद्रीय मंत्री सी.डी.देशमुख ने निगरानी तंत्र बनाने का नेहरू से अनुरोध किया।

नेहरू ने कहा कि उससे प्रशासन में पस्तहिम्मती आएगी।

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जब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी से कहा गया कि सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है तो उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार तो विश्व व्यापी है।

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अब आप ही बताइए कि 1947 और 1985 के बीच 100 पैसे में से 85 प्रतिशत लुटवा देने में बीच के किस प्रधान मंत्री का कितना प्रतिशत योगदान था ?

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  वैसे सन 1963 में ही तत्कालीन कांग्रेस  अध्यक्ष डी.संजीवैया को  इन्दौर के अपने भाषण में यह कहना पड़ा  कि ‘वे कांग्रेसी जो 1947 में भिखारी थे, वे आज करोड़पति बन बैठे।

  गुस्से में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि ‘झोपड़ियों का स्थान शाही महलों ने और कैदखानों का स्थान कारखानों ने ले लिया है।’ 

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महाराष्ट्र की सत्ता में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी एन.सी.पी.के नेता शरद पवार ने, जो रक्षा मंत्री भी रहे चुके हैं,कहा है कि ‘‘चीन ने सन 1962 में हमारी 45 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया।’’

याद कीजिए, उससे पहले नेहरू से कहा जा रहा था कि चीन आगे बढ़ रहा है।

इस पर प्रधान मंत्री नेहरू ने लोक सभा में कहा था कि वह ऐसी जमीन है जहां ंघास का तिनका भी नहीं उपजता।

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इसके अलावा भी बहुत सारी बातें हैं।

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रजनीकांत पुराणिक की चर्चित किताब (प्रकाशक -पुस्तक महल,नई दिल्ली) में जवाहरलाल नेहरू की 97 बड़ी गलतियांे का विवरण है।

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.राहुल गांधी को चाहिए कि वे किसी नेहरू के अंधभक्त लेखक से ही सही,उस पुस्तक का जवाब लिखवा दें।

मुझे वह जवाबी किताब पढ़कर खुशी होगी।

यदि उस जवाबी किताब के तर्कों में दम होगा

तो मैं इस पोस्ट के लिए माफी मांगते हुए रजनीकांत पुराणिक के खिलाफ एक लंबा लेख लिख दूंगा। 

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.9 फरवरी 22


    चीन चर्म रोग तो पाक हृदय रोग

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भारत के लिए चीन चर्म रोग है तो पाकिस्तान हृदय रोग।

अब आप ही अनुमान लगा लीजिए कि कौन हमारे लिए अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक है।

  चर्म रोग यानी वह हमारी सीमाओं को खरांेचना चाहता है।

उधर पाक हम पर भीतर से वार करता रहता है।कभी -कभी बाहर से भी।

माओ त्से तुंग के जीवनकाल में चीन हमारे लिए यदि हृदय रोग था तो चर्मरोग भी।

 अब जब कि भारत में माओवादियों व चीनपंथी कम्युनिस्ट पार्टी की ताकत लगातार घट रही है,खुद चीन माओवाद को दुनिया भर में फैलाने के बदले अब आर्थिक उद्देश्य पर काम कर रहा है।

  पर पाकिस्तान अपने उसी पुराने लक्ष्य व उद्देश्य पर कायम है जिसकी पूर्ति के लिए पाकिस्तान बना था। 

आधी रोटी खाकर भी अपने ‘विचार’ के प्रचार कार्य में पाक लगा हुआ है।

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 स्मारकों को लेकर कांग्रेस और राजग सरकारों में फर्क

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सुरेंद्र किशोर

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गंगा नदी पर मुंगेर के पास नव निर्मित पुल का नाम श्रीकृष्ण सेतु रखा गया है।

बिहार के प्रथम मुख्य मंत्री डा.श्रीकृष्ण सिन्हा के नाम पर इस बड़े सेतु के नामकरण से कांग्रेस को सीख लेनी चाहिए।

  सन 1980 की कांग्रेस सरकार ने पटना के पास निर्मित गंगा सेतु के नाम से जयप्रकाश का नाम हटा दिया था।

  उससे पहले कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार ने तय किया था कि पटना के पास निर्माणाधीन सेतु का नाम जयप्रकाश सेतु होगा।

1980 में बिहार में कांग्रेस की सरकार बन गई।

डा.जगन्नाथ मिश्र मुख्य मंत्री बने।

कांग्रेस की ओर से यह अभियान चला कि ललित नारायण मिश्र के नाम पर पटना के गंगा पुल का नाम रखा जाए।

पर, उस पर विवाद हो गया।

फिर कांग्रेस सरकार ने गांधी जी का नाम चला दिया।

गांधी के नाम पर भला कौन विरोध करता !

इस तरह जेपी का नाम कट गया।

  पर, नीतीश कुमार के मुख्य मंत्रित्व काल में ही पटना के आई.जी.एम.एस.परिसर में इंदिरा गांधी की बड़ी मूत्र्ति लगाई गई।अब मुंगेर पुल का नाम श्रीबाबू के नाम पर पड़ा।

  जहां तक मेरी जानकारी है, कांगेे्रस की किसी सरकार ने जेपी या लोहिया के नाम पर कहीं भी कोई स्मारक नहीं बनाया जबकि नेहरू-इंदिरा परिवार के नाम पर देश में करीब 400 स्मारक बनाए गए हैं।

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सोमवार, 14 फ़रवरी 2022

 परिवार में पूरी ‘पार्टी’ समाहित है ?

या, पार्टी में छिटपुट परिजन सक्रिय हैं ?

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कुत्ता अपनी दुम को हिला रहा है ?

या, दुम ही कुत्ते को हिला रही है ?

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दाल में नमक है ?

या, नमक में ही दाल है ?

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क्या ये दोनों बातें एक ही हैं ?

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जनरल नाॅलेज के इस सवाल का जवाब कोई स्कूली

छात्र भी सही-सही दे देगा।

लेकिन कुछ राजनीतिक नेता व बुद्धिजीवी या तो इस सवाल में अटक जाएंगे या भटक जाएंगे।

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सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

 राहुल गांधी का सराहनीय कदम

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दबाव के बावजूद राहुल गांधी ने पंजाब में नवजोत

सिंह सिद्धू को सी.एम.चेहरा नहीं बनाया।

यह दलहित -देशहित में राहुल का सराहनीय कदम है।

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मनमोहन सिंह के प्रधान मंत्रित्वकाल में भी राहुल ने 

एक अच्छा काम किया था।उन्होंने उस अध्यादेश की काॅपी को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था जो सजायाफ्ता नेताओं की सांसदी-विधायिकी बचाने के लिए जारी किया गया था।

हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कह दिया कि 

‘‘अध्यादेश को बकवास कहना मेरी गलती थी।’’(3 अक्तूबर, 2013)  

वैसे राहुल का विरोध उस समय काम कर गया।अध्यादेश कानून नहीं बन सका।

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सुरेंद्र किशोर

7 फरवरी 22