बुधवार, 8 मई 2024

  अपरिपक्व भतीजे को मायावती ने शीर्ष पद से हटाया

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 अन्य परिवारवादी राजनीतिक दलों के सुप्रीमो 

अपरिपक्व उत्तराधिकारियों 

पर ऐसा ही कोई फैसला करंेगे ?

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नहीं करेंगे तो डूबेंगे।

डूबने के संकेत शायद 4 जून को ही मिल जाएं !!

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सुरेंद्र किशोर

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बसपा प्रमुख व पूर्व मुख्य मंत्री मायावती ने अपने भतीजे आकाश को अपरिपक्व व्यक्ति करार देते हुए उसे बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया।

साथ ही, मायावती ने उसे अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के अपने पुराने निर्णय को भी वापस ले लिया।

मायावती ने घोषणा की है कि आकाश में पूर्ण परिपक्वता आने तक उसे इन जिम्मेदारियों से दूर ही रखा जाएगा।

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काश ! इस देश के कुछ अन्य वंशवादी-परिवारवादी राजनीतिक दल भी मायावती का अनुकरण करते।

अन्य दल क्यों अनुकरण नहीं कर रहे हैं ?

उसका जवाब एक राजनीतिक प्र्रेक्षक ने मुझे दिया।

कहा कि अनिल अंबानी का व्यापार जब मंदा पड़ने लगा,तब क्या अनिल ने अपनी कंपनी किसी और को सिपुर्द कर दी !?

जब राजनीति, सेवा व त्याग की जगह व्यापार और वाणिज्य बन जाए,अधिकतर नेताओं की व्यक्तिगत संपत्ति अरबों में होने लगे  तो कोई अपने ‘व्यापार’ को किसी और को नहीं सौंप  देता।

भले व्यापार डूब जाए !!

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8 मई 24 


मंगलवार, 7 मई 2024

 जिनके यहां 25 करोड़ रुपए से अधिक नाजायज धन बरामद हो, उन आरोपियों की नार्को -ब्रेन मैपिंग-डीएनए टेस्ट का कानूनी प्रावधान हो

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सुरेंद्र किशोर

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आज के ‘‘प्रभात खबर’’ के अनुसार.

झारखंड के मंत्री आलमगीर के निजी सचिव के नौकर के घर से 35 करोड़ 23 लाख रुपए बरामद किए गए हैं।

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ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा है कि इन रुपयों से मेरा कोई संबंध नहीं है।

याद रहे कि झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन भी भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में इन दिनों जेल में हैं।

झारखंड से आए दिन भ्रष्टाचार व भारी धन की बरामदगी की खबरंे आती रहती हैं।

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सन 2000 में बिहार से काट कर झारखंड  अलग प्रदेश बना।

उससे पहले दशकों तक अलग प्रदेश की मांग के समर्थन में आंदोलन होता रहा।आंदोलन कारी झामुमो के नेताओं का आरोप था कि अविभिजित बिहार

ंके नेता गण हमारे संसाधनों को लूट कर हमें गरीब बनाये हुए हैं।संपन्नता के लिए हमें अलग राज्य चाहिए।

अब जब झारखंड बन गया तो क्या हो रहा है ?कौन संपन्न हो रहा है।झामुमो की ही वहां सरकार है।

आंदोलनकारी पार्टी की सरकार की मौजूदगी के बावजूद झारखंड को आज कौन लूट रहा है ?

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मंत्री आलमगीर,उनके पी.एस.और पी.एस.के नौकर का नार्को ,ब्रेन मैपिंग तथा अन्य टेस्ट जरूरी है ताकि सच्चाई का पता चल सके।ऐसे टेस्ट से

सच्चाई सामने आ ही जाएगी।

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पर,ऐसे टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।सिर्फ अदालती आदेश से ही ऐसे टेस्ट संभव हंै।अदालत आम तौर पर जल्दी ऐसे टेस्ट की अनुमति नहीं देतीं।

भ्रष्ट अफसरों,नेताओं और व्यापारियों के लिए यह अनुकूल स्थिति है।

वे झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों को चंबल के डकैतों की तरह लूट रहे हैं।इस कारण देश की गरीबी कम करने में देरी हो रही है।

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जांच एजेंसियों को आवश्यकतानुसार नार्को,ब्रेन मैपिंग और डी एन ए टेस्ट की अनुमित होनी चाहिए।,

इस संबंध में कड़ा कानून बने।

उस कानून को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल कर दिया जाना चाहिए ताकि उस कानून को अदालत में चुनौती न दी जा सके।

अन्यथा इन लुटेरों से यह देश नहीं बचेगा।

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7 मई 24  


शनिवार, 4 मई 2024

 लगता है कि कांग्रेस यही चाहती है कि जो गलती 

खुद उसने की,वही गलती भाजपा भी करे।

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सुरेंद्र किशोर

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यानी,कांग्रेस चाहती है कि भाजपा न तो भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई करे और न ही 

जेहादियों के खिलाफ एक शब्द का भी उच्चारण करे।

यदि भाजपा ने भी वही गलती की होती तो वह आज सत्ता में नहीं होती।

कल जनता उसे सत्ता से हटा देगी,इस बात की कोई गारंटी नहीं।

भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई का नतीजा है कि आज केंद्र सरकार का कर राजस्व सन 2014 की अपेक्षा बढ़कर तीन गुणा हो गया है।बढ़ता ही जा रहा है।

अन्य कामों को छोड़ भी दीजिए तो देश भर में आज बिजली हैं और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है।

1947 -1985 के काल खंड में कांगेसी सरकारों ने 100 सरकारी पैसों में से 85 पैसों की लूट नहीं करवा दी होती तो 80 करोड़ लोगों को आज अनाज नहीं देना पड़ता।

सिर्फ मनमोहन सिंह सरकार में 16 लाख करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।

इस देश की अदालत दोषी होने पर भी किसी प्रधान मंत्री को सजा नहीं देना चाहती अन्यथा अब तक आधे दर्जन पी.एम.सजा पा गये होते।

संभवतः इस देश की अदालत यह महसूस

करती है कि पी.एम.को सजा देने से देश की दुनिया भर में बदनामी होगी।

मोदी सरकार के 10 साल में मोदी या किस मंत्री पर घोटाले का केस चला ?

नहीं चला।क्योंकि उनके द्वारा कोई घोटाला नहीं हुआ।हां,केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार जरूर है जिसे रोकने में मोदी सरकार विफल है।वकील अश्विनी उपाध्याय ठीक कहते हैं कि उसके लिए कड़े कानून चाहिए। 

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सन 2014 के लोक सभा चुनाव में शर्मनाक पराजय के बाद सोनिया गांधी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.के.एंटोनी से कहा था कि आप हार के कारणों पर रपट बनाइए।

  एंटोनी ने रपट बनाई।

 सोनिया जी को दे दी।

उस रपट में अन्य कारणों के साथ- साथ यह भी लिखा गया था कि ‘‘मतदाताओं को, हमारी पार्टी अल्पसंख्यक की तरफ झुकी हुई लगी जिसका हमें नुकसान हुआ।’’

पर कांग्रेस हाईकमान ने एंटोनी की इस मूल बात को भी नजरअंदाज कर दिया।

याद रहे कि कांग्रेस अब भी उसी लाइन पर है।बल्कि अब तो कांग्रेस ने एक अतिवादी मुस्लिम संगठन से अपना संबंध पहले से भी अधिक मजबूत कर लिया।वह संगठन यानी प्रतिबंधित पी.एफ.आई. जिसका राजनीतिक संगठन -एस.डी.पी.आई.है,इस देश को इस्लामिक देश में बदलने के लिए हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।कहता है कि हम 2047 तक हम सफल हो जाएंगे।उसें अनेक वोट लोलुप गैर मुसलमान नेताओं का समर्थन जो हासिल हैं।

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इसके बावजूद कांग्रेस चाहती है कि भाजपा नेता पी.एफ.आई.यानी मुस्लिम आतंकवाद की चर्चा तक न करे।

जबकि जनता को बताना मोदी का कर्तव्य है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आ जाएगी तो पी.एफ.आई.का काम आसान हो जाएगा।

जिस तरह ममता बनर्जी सरकार की मेहरबानी से बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों का काम आसान हो गया है।

बी.बी.सी.के पूर्व संवाददाता डा.विजय राणा के अनुसार पश्चिम बंगाल के एक बड़े इलाके में कश्मीर जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है।संदेशखाली की घटना साफ संकेत दे रही है।

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4 अगस्त, 2005 को सांसद ममता बनर्जी ने नाटकीय ढंग से लोक सभा के स्पीकर के टेबल पर कागज का 

पुलिंदा फेंका था।

उसमें अवैध बंाग्लादेशी घुसपैठियों को भारत यानी पश्चिम बंगाल में मतदाता बनाए जाने के सबूत थे।

वाम मोर्चा शासन काल में उनके नाम पश्चिम बंगाल में भी गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची में शामिल करा दिए गए थे।बांग्ला देश की मतदाता सूची में भी उनके नाम थे।इसी का कागजी सबूत ममता के पास था।

ममता ने कहा था कि घुसपैठ की समस्या राज्य में महा विपत्ति बन चुकी है।

इन घुसपैठियों के वोट का लाभ सत्ताधारी वाम मोर्चा उठा रहा है।

ममता ने उस पर सदन में चर्चा की मांग की।

चर्चा की अनुमति न मिलने पर ममता ने सदन की सदस्यता

 से इस्तीफा दे देने के अपने निर्णय की घोषणा कर दी थी।

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यह और बात है कि घुसपैठियों पर ममता बनर्जी का रवैया अब पूरी तरह बदल चुका है।क्योंकि अब वे ममता के लिए ‘‘संपत्ति’’ बन चुके हैं।

ममता बनर्जी ने तो घुसपैठियों के वोट के लिए अपने रुख में परिवर्तन कर लिया।क्या नरेंद्र मोदी को भी घुसपैठियों के खिलाफ बोलना बंद कर देना चाहिए ?

यदि मोदी बंद कर देंगे तो उनके दल का भी जनता वही हाल करेगी जो हाल कांग्रेस का कर चुकी है और ममता की पार्टी का इस चुनाव करने वाली है,ऐसी उम्मी की जा रही हैै।

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2017 के आंकड़े के अनुसार इस देश में 5 करोड़ बांग्ला देश-रोहिंग्या घुसपैठिए थे।

अब तक उनकी संख्या दुगुनी हो चुकी होगी।धर्म परिवर्तन और लव जेहाद के जरिए हिन्दुओं की संख्या घटाई जा रही है सो अलग।उसके लिए विदेश से पैसे आ रहे हैं।

हावड़ा रेलवे स्टेश पर किसी भी दिन कोई भी जाकर उन घुसपैठियों की संख्या गिन सकता है।घुसपैठ में बोर्डर सिकुरिटी फोर्स में कई लोग घूसखोर हैं या दोतरफा आक्रमणों से फोर्स डरा हुआ है।

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हाल की खबर है कि ब्रिटेन सरकार अपने देश से हजारों अवैध घुसपैठियों को दो माह बाद से जबरन निकालना शुरू करेगी।

अमेरिका भी यही करेगा।पर भारत ?

भारत के कई भाजपा विरोधी दल यह चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में भले देश का एक और बंटवारा करना पड़े,पर अभी घुसपैठिए हमें वोट देकर सत्ता में पहुंचाते रहें।भाजपा इस पर आवाज उठाएगी तो हम कहेंगे कि वह हिन्दू-मुस्लिम कर रही है।

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याद रहे कि घुसपैठियों आदि के कारण देश के इस देश के कई जिलों-इलाकों में

हिन्दू आबादी का अनुपात घटता जा रहा है।जहां मुस्लिम आबादी 40 या 50 प्रतिशत से अधिक हो गई ,वहां कानून का शासन असंभव है।

मुख्य मंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने अपने शासनकाल में कहा था कि हमारे प्रदेश के सात जिलों में सामान्य प्रशासन अपना काम नहीं कर पा रहा है।उनका यह बयान मैंने जनसत्ता में पढ़ा था।

माकपा के शीर्ष नेताओं ने उन पर दबाव डाल कर बयान वापस करवाया।

पर,इस बीच माकपा को नुकसान हो चुका था।जेहादियों ने करीब 30 प्रतिशत मुसलमान वोट का रुख ममता की ओर कर दिया।

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मोदी सरकार सामान्य व शांतिप्रिय मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि जेहादी मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है या आवाज उठा रही है।

हथियारबंद जेहादी संगठन पी.एफ.आई.भी यह मानता है कि उसके साथ अभी 10 प्रतिशत मुसलमान भी नहीं हैं।

पर,शाहीनबाग जैसा धरना कांड करने व जहां -तहां दंगा करने के लिए 5 प्रतिश भी काफी है।

जनता नरेंद्र मोदी को इसीलिए बार -बार प्रधान मंत्री बना रही है और फिर बनाएगी ताकि वे भ्रष्टाचारियों और जेहादियों-घुसपैठियों के खिलाफ तो कार्रवाई करें किंतु शांतिप्रिय मुसलमानों की आर्थिक बेहतरी के लिए काम करें।वे कर भी रहे हैं।इसलिए 2024 भी मोदी का ही है,ऐसा मेरा अनुमान है। सन 1967 से चुनाव देखते रहने का अनुभव मुझे है।उस आधार पर कह रहा हूं।

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4 मई 24 


 


     कैंसर की महामारी को रोकने के लिए

   सरकारें चुनाव बाद युद्ध स्तर पर काम करें

    अन्यथा,शासकों और उनके परिजन की भी बारी 

    आने में अब देर नहीं होगी 

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      --सुरेंद्र किशोर ---

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हाल में यह चिंताजनक जानकारी मिली कि वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी कैंसर ग्रस्त हो गये हैं।

ताजा खबर सी.पी.आई.नेता अतुल कुमार अनजान के बारे में आई।

कैंसर से उनका निधन हो गया।

मेरे छोटे सहोदर भाई का गत सात इसी जानलेवा बीमारी से निधन हुआ।

सर्वाधिक दर्दनाक बात यह है कि कैंसर से होने वाले भीषण दर्द के निवारण के लिए किसी दर्दनाशक दवा का अब तक आविष्कार ही नहीं हुआ है।

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कैंसर के कई कारण होते हैं।

पर,खाद्य और भोज्य पदार्थ में मिलावट एक बड़ा कारण है।

खेतों में धुआंधार रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल से स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।

(हरित क्रांति ने हमें बर्बाद कर दिया।)

मिलावट के खिलाफ सरकारों को चाहिए कि वे चुनाव के बाद सघन अभियान चलाएं।पुलिस की मौजूदगी में नमूने लिये जाएं और उनकी विश्वस्त प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।

सिर्फ फूड इंस्पेक्टरों पर सरकार भरोसा न करे।

यदि कोई इस्पेक्टर चाहे भी तो वह रसीद के साथ खाद्य-भोज्य पदार्थ के नमूने नहीं ले सकता।

उन्हें मारकर भगा दिया जाएगा।इसीलिए वे सह अस्तित्व की रणनीति अपनाते हैं।

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स्थिति ऐसी गंभीर हो चुकी है कि आज बाजारों में कौन सा पदार्थ मिलावट रहित है,यह नहीं कहा जा सकता।

मिलावट के खिलाफ जांच के लिए तैनात सरकारी एजेंसियों में भारी भ्रष्टाचार है।

पूरी व्यवस्था ने मिलावटखोरों को हमें तड़पा -तड़पा कर मारने का अघोषित लाइसेंस दे रखा है।

इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इस समस्या की व्यापकता के अनुपात में सजाएं नाम मात्र की ही हो पाती हैं।

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बिहार सहित देश के 10 राज्यों में कैंसर के मरीज अधिक हैं।

2023 में बिहार में एक लाख नये कैंसर मरीजों का पता चला।

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इस तरह हो रहा है मानव शरीर के साथ खिलवाड़ !

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‘‘1.-बिक्रेता गण सब्जियों की ताजगी बरकरार रखने अथवा उनके परिरक्षण के लिए उन्हें कीटनाशकों में डूबोते हैं।

तेलों और मिठाइयों में वर्जित पदार्थों की मिलावट की जाती है।

2.-सब्जियों और दूसरे खाद्य पदार्थ को धोना फायदेमंद है।लेकिन पकाने से विषैले अवशेष बिरले ही खत्म होते हैं।

निगले जाने के बाद छोटी आंत कीटनाशकों को सोख लेती हैं।

3.-शरीर भर में फैले बसायुक्त उत्तक इन कीटनाशकों को जमा कर लेते हैं।इनसे दिल,दिमाग,गुर्दे और जिगर सरीखे अहम अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

(-इंडिया टूडे हिंदी-15 जून, 1989)

(यह खबर पुरानी है।आज तो हालात और भी बिगड़ चुके हैं।

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 अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में सरकार ने संसद में कहा था कि अमेरिका की अपेक्षा हमारे देश में तैयार हो रहे कोल्ड ड्रिंक में 

रासायनिक कीटनाशक दवाओं का प्रतिशत अधिक है।

 केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि यहां कुछ अधिक की अनुमति है।(क्यों भई ?)

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खुद वाजपेयी जी को ,जब वे प्रधान मंत्री थे, पटना हवाई अड्डे पर जो बोतलबंद पानी परोसा जाने वाला था,वह अशुद्ध पाया गया था।

ऐसी ही घटना मनमोहन सिंह के साथ कानपुर में हुई थी जब वे प्रधान मंत्री के रूप में वहां गए थे।

यानी, प्रधान मंत्री तक मिलावटखोरों की पहुंच है।

वे सिर्फ इसलिए बच पा रहे हैं क्योंकि उन्हें परोसने से पहले उसकी जांच का प्रावधान है।

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  एक ताजा खबर के अनुसार, इस देश में बिक रहे 85  प्रतिशत दूध मिलावटी है।

जितने दूध का उत्पादन नहीं है,उससे अधिक की आपूत्र्ति हो रही है।  

सवाल है कि इस देश में अन्य कौन सा खाद्य व भोज्य पदार्थ कितना शुद्ध है ?

यह जानलेवा समस्या बहुत पुरानी है।

बढ़ती ही जा रही है।

विभिन्न सरकारें लोक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए क्या -क्या करती हंै ? 

कितने दोषियों को हर साल सजा हो पाती है ?

राज्यों में कितनी प्रयोगशालाएं हैं ?

मिलावट का यह कारोबार जारी रहा तो कुछ दशकों के बाद हमारे यहां कितने स्वस्थ व कितने अपंग बच्चे पैदा होंगे ?

पीढ़ियों के साथ इस  खिलवाड़ को आप क्या कहेंगे ?

क्या सबके मूल मंे शासकीय भष्टाचार नहीं है ? 

मिलावटखोरों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान नहीं होना चाहिए ?  

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4 मई 24



शुक्रवार, 3 मई 2024

 हैदराबाद के पास दैनिक मजदूरी कर रहे 

पद्मश्री से सम्मानित मोगुलैया  

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सुरेंद्र किशोर

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भारत के चैथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित दर्शनम मोगुलैया हाल में हैदराबाद के पास एक निर्माण स्थल पर मजदूरी करते देखे गये।

दो साल पहले राष्ट्रपति ने दुर्लभ संगीत वाद्य यंत्र के आविष्कारक 71 वर्षीय मोगुलैया को पद्मश्री से सम्मानित किया था।

इस सम्मान के कारण लंबे समय तक तो वे मीडिया में छाए रहे।

 पर,परिवार के गुजर- बसर के लिए जब काम खोजने लगे उम्रदराज होने के कारण उन्हें कोई ढंग का काम नहीं मिला।

नतीजतन वे मजदूरी कर रहे हैं।

यह खबर आज के टाइम्स आॅफ इंडिया में भी छपी है।

कल्पना कीजिए कि जब कुछ विदेशियों ने यह खबर नेट पर पढ़ी होगी तो भारत और भारत सरकार के बारे में कैसी धारणा बनी होगी !

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इस बीच मोगुलैया के तीन बच्चे बीमारी से गुजर गये।अब भी बड़े परिवार की देखरेख की उन पर जिम्मेदारी है।

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उम्मीद की जानी चाहिए कि लोक सभा चुनाव की आंधी के गंुजर जाने के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जरूर ऐसी विचित्र व विडंबनापूर्ण समस्या के स्थायी निदान के बारे में जरूर कुछ सोचेंगे। ताकि, विदेश में हमारी छवि खराब न हो।

याद रहे कि मोदी राज में ऐसे ही अनेक गरीब,अनाम व साधनहीन किंतु समाज के लिए उपयोगी लोगों को पद्म सम्मान अधिक मिलने लगे हैं।

पहले भी मिलते थे,पर अब ऐसे लोगों को अधिक मिल रहे हैं।

दूसरी ओर , अपना देश तो ऐसा बनता जा रहा है जहां जो जितना बड़ा तिकड़बाज व टैक्स चोर है,उसके पास उतने ही अधिक पैसे हैं।

वैसे लोगों के सामने खर्च करने की समस्या है।

समाज के अधिकतर लोग ,अपवादों को छोड़कर उन्हें ही सलाम करते हैं।

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3 मई 24

 


गुरुवार, 2 मई 2024

    पटना के आॅटो चालक प्रत्येक फेरे में 

    100 रुपए रंगदारी देने का बाध्य हैं।

     ---आॅटो चालक यूनियन

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    सुरेंद्र किशोर

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   एक आॅटो चालक को बिहार के पटना जिले के दानापुर 

या पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन से बैरिया बस स्टैंड जाने में हर बार करीब 100 रुपए अवैध रूप से असामाजिक तत्वों को देना पड़ता है।सब जानते हैं कि उन असामाजिक तत्वों को पुलिस का संरक्षण मिलता है।

यूनियन की शिकायत है कि इस अतिरिक्त खर्च को उठाने के लिए आॅटो चालकों को ओवर लोडिंग करना पड़ता है।

यात्रियों से खचाखच भारे आॅटो अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।एक -एक दुर्घटना में एक से अधिक यात्री मर जा रहे हैं।

इस संबंध में 20 अप्रैल 24 को प्रभात खबर ने सचित्र समाचार छापा।

कई दिन बीत जाने के बावजूद पटना की सड़कों पर ट्रैफिक अराजकता मंे कोई फर्क नहीं पड़ा है।

इसका कारण सब जानते हैं।

सिर्फ प्रशासन या राज्य सरकार को असली कारण का पता नहीं है।

पता है भी तो उस कारण को दूर करने में बिहार सरकार असमर्थ है।

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एक पुरानी बात

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नब्बे के दशक में एक रेल पुलिस थाने के थाना प्रभारी

ने मुझे बताया था कि हमारा उच्च अधिकारी कहता है कि चोरों से ट्रेन के पेसेंजर का बक्सा चोरी करवाओ।उसमें से गहना-गुरिया बेच कर हमें अधिक से अधिक पैसे पहुंचाओ।

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2 मई 24 


बुधवार, 1 मई 2024

 मेरे फेसबुक वाॅल से

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   जेहाद का खुलेआम आह्वान

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 प्रतिबंधित जेहादी संगठन ‘सिमी’ के सुप्रीम 

  कोर्ट में वकील थे सलमान खुर्शीद

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सुरेंद्र किशोर

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पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम खान(समाजवादी पार्टी )ने अपनी बिरादरी के लोगों से ‘‘वोट जेहाद’’ करने की सार्वजनिक रूप से अपील की है।

 इसको लेकर चाचा-भतीजी पर केस दायर हुआ है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं।

 उत्तर प्रदेश कांग्रेस के तब के अध्यक्ष 

सलमान खुर्शीद तो प्रतिबंधित जेहादी संगठन सिमी के सुप्रीम कोर्ट में वकील रह चुकेे हैं।  

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1977 में अलीगढ़ में स्थापित सिमी यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आॅफ इंडिया, जमात ए इस्लामी से जुड़ा हुआ था।

पर, जब सन 1986 में सिमी ने ‘‘इस्लाम के जरिए भारत की मुक्ति’’ का नारा दे दिया तो 

जमात ए इस्लामी हिंद ने सिमी 

से अपना संबंध तोड़ लिया।

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सन 2001 में जब ‘सिमी’ पर वाजपेयी  सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो प्रतिबंध के खिलाफ सलमान खुर्शीद सिमी के सुप्रीम कोर्ट में वकील बन गये।

सिमी ने प्रतिबंध के खिलाफ अदालत की शरण ली थी।पर,अदालत से उसे कोई राहत नहीं मिली।

कोई कह सकता है कि वकील तो किसी का भी वकील बन सकता है।

  तो क्या यह पूछा जा सकता है कि सलमान खुर्शीद कभी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के वकील बनना पसंद करेंगे ?

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    अटल सरकार ने ही नहीं 

  बल्कि मनमोहन सरकार ने भी 

   सिमी पर प्रतिबंध लगाया था।

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मन मोहन सिंह सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ‘‘सिमी के लोग जेहाद का प्रचार कर रहे हैं और कश्मीर में आतंकवादियों की पूरी मदद

कर रहे हैं।’’

(.टाइम्स आॅफ इंडिया --21 अगस्त 2008)

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केरल के डी.जी.पी.ने केरल हाईकोर्ट को बताया था कि ‘‘सिमी के लोगों ने ही पी.एफ.आई.यानी पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया बनाया है।’’

याद रहे कि पी.एफ.आई.ने हथियारों के बल पर सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने का लक्ष्य तय किया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार,इस उद्देश्य से पी.एफ.आई. इस देश में हथियारबंद कातिलों दस्ता बना रहा है।

पी.एफ.आई.ने कहा है कि जिस दिन 10 प्रतिशत मुसलमान भी हमारे साथ आ जाएंगे,हम भारत को इस्लामिक देश बना देंगे।

इसका मतलब है कि भारत के 10 प्रतिशत मुस्लिम भी उसके साथ नहीं हैं।यह इस देश के लिए शुभ लक्षण है।जो नहीं हैं,उन्हें धन्यवाद।

किंतु दूसरी ओर लगभग सारे तथाकथित सेक्युलर दल सिमी और पीएफआई के साथ रहे हैं।याद कीजिए कि शाहीन बाग के धरने में एकजुटता दिखाने के लिए इस देश के किन किन दलों के कौन कौन नेता गये थे।

उस धरने को विदेशी पैसे पी एफ आई ने ही आयोजित किया था।

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पी.एफ.आई.के राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई. से कांग्रेस का पुराना तालमेल चल रहा है।

पी.एफ.आई. की मदद से ही राहुल गांधी नायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं।पी.एफ.आई.-एस.डी.पी.आई. ने ही पिछले विधान सभा चुनाव में कर्नाटका और तेलांगना में मुसलमानों के अधिकतर वोट सिर्फ कांग्रेस को दिलवाये।

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याद रहे कि सलमान खुर्शीद, हिन्दुत्व की तुलर्ना आइ. एस. आई. एस. और बोको हरम से कर चुके हैं।

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     पाॅपुलर फं्रट आॅफ इंडिया से 

  हामिद अंसारी का कैसा रिश्ता 

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सितंबर, 2017 में पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी केरल के कोझीकोड में आयोजित महिलाओं के एक सम्मेलन में शामिल हुए थे।

वह महिला संगठन पाॅपुलर फं्रट आॅफ इंडिया से संबद्ध है।

 क्या हामिद साहब को फ्रंट की 2047 वाली योजना का तब पता नहीं था ?

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 क्या इस देश के वे तथाकथित सेक्युलर नेता देश से माफी मांगेंगे जो वर्षों तक आई.एम. और पी.एफ.आई. के पूर्ववर्ती संगठन सिमी  को छात्रों का एक मासूम संगठन बताते रहे ?

 एक तरफ सिमी अखबारों में बयान देेकर यह कहता रहा कि हमारा उद्देश्य 

हथियारों के बल पर इस देश में इस्लामिक शासन कायम करना है।दूसरी ओर अनेक राजनीतिक व बौद्धिक संगठन सिमी का बचाव करते रहे।

सिमी ने कई बार यह घोषणा की कि वह हथियारों के बल पर पूरी दुनिया में इस्लाम का शासन कायम करना चाहता है। आश्चर्य है कि इसके बावजूद इस देश के कई बुद्धिजीवी और अनेक नेता सिमी को छात्रों का निर्दोष संगठन बताते रहे।

सिमी के बिहार जोन के सचिव रियाजुल मुसाहिल ने 20 सितंबर 2001 को कहा था कि ‘‘कुरान हमारा संविधान है। यदि भारतीय संविधान का कुरान से टकराव होता है तो हम संविधान से बंधे हुए नहीं हैं। हम भारत सहित पूरी दुनिया में खलीफा का शासन चाहते हैं।’’ 

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 अहमदाबाद धमाकों के बाद पकड़े गए सिमी सदस्य अबुल बशर ने बताया था कि ‘‘सिमी की इस नीति से प्रभावित हूं कि लोकतांत्रिक तरीके से इस्लामिक शासन संभव नहीं है। उसके लिए एकमात्र रास्ता जेहाद है।’’

याद रहे कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में एक साथ 21 बम विस्फोट हुए थे जिनमें 56 लोगों की जानें गयीं थीं। इंडियन मुजाहिदीन ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी। याद रहे कि सिमी के सदस्य ही आई.एम. में सक्रिय हो गये थे। 

सिमी के अहमदाबाद के जोनल सेके्रट्री साजिद मंसूरी ने 2001 में एक मीडिया से  बातचीत  में कहा था कि ‘‘जब हम सत्ता में आएंगे तो सभी मंदिरों को नष्ट कर देंगे और वहां मस्जिद बना देंगे।’ मंसूरी का बयान 30 सितंबर 2001 के  अखबार में छपा था। उपर्यक्त तथ्य  सिमी-इंडियन-पी एफ आई की कार्य शैली को समझने के लिए पर्याप्त होना चाहिए।

2012 में पश्चिम बंगाल के डी.जी.पी.एन.मुखर्जी ने कहा था कि सिमी के जरिए आई.एस.आई.ने माओवादियों से तालमेल बना रखा है।

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हरि अनंत हरि कथा अनंता !

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1 मई 24