मेरा अनुमान है कि संघ नेता मोरोपंत पिंगले यदि आज
जीवित होते तो कहते कि सार्वजनिक जीवन से
रिटायर होने की उम्र 87 साल होनी चाहिए।
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सुरेंद्र किशोर
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आर.एस.एस. के नेता मोरोपंत पिंगले ने सन 1994 में कहा था कि 75 वर्ष का
हो जाने के बाद रिटायर हो जाना चाहिए।
यदि मोरोपंत आज जीवित होते तो कहते कि 87 साल की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए।
ऐसा मैं क्यों लिख रहा हूं ?
इसलिए कि जब सन 1994 में पिंगले ने 75 बताया था तो कोई उसका आधार तो रहा होगा।
ठोस या वैज्ञानिक आधार यही हो सकता है--शारीरिक और मानसिक क्षमता।
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1994 में भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 60 साल थी।
1947 में भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 32 साल थी।
आज कितनी है ?
आज भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 72 साल है।
ऐसे में यदि जिन्दा होते तो खुद मोरोपंत जी कहते कि सक्रिय राजनीति या सार्वजनिक जीवन से रिटायर होने की उम्र 87 होनी चाहिए।
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1947 में यहां के सरकारी सेवकों की अवकाश ग्रहण आयु 55 थी।
पर,जब जीवन प्रत्याशा बढ़ने लगी तो रिटायरमेंट की आयु भी बढ़ती गयी।
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75 साल की चर्चा के बाद मोदी विरोधी खुश हैं।
सबसे अधिक खुश तो पाकिस्तान हो रहा होगा क्योंकि उसके कुछ नेताओं को यह कहते हुए मैंने सुना है कि हमारा विरोध इंडिया से नहीं,हिन्दुओं से भी नहीं,बल्कि सिर्फ मोदी से है।
वे ऐसा इसलिए कहते हैं कि वे समझते हैं कि मोदी रहेगा तो गजवा ए हिन्द किसी भी हालत में नहीं होने देगा।
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12 जुलाई 25
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