बाद में यह मत कहना कि
मैंने पहले क्यों नहीं कहा !!
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सुरेंद्र किशोर
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कुछ ऐसी खबरें या विश्लेषण कुछ वैसे लोगों को बिना मांगे मैं भेजता रहता हूं
जो सामग्री उन्हें बिलकुल अच्छी नहीं लगती होंगी।
क्योंकि वे अभी दूसरी दुनिया में हैं।
जान बूझकर किसी मजबूरी वश या अनजाने में अज्ञानतावश दूसरी दुनिया में हैं।
मैं उन्हें इसलिए नहीं भेजता कि वे खबरें पढ़कर अपने विचार बदल लें।
वे मत बदलें।
बदलेंगे भी नहीं।
वे वरीय या होशियार लोग हैं।
बहुत सोच समझ कर अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने अपना विचार कहीं स्थिर किया है।
मैं तो सिर्फ उन्हें जानकारी भर देना चाहता हूं ताकि संकट आने पर वे
यह न कहें कि हमें पहले किसी ने क्यों नहीं बताया था ?
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सन 1962 के चीनी हमले से बहुत पहले संसद के बाहर से डाण्राम मनोहर लोहिया और सदन के भीतर से महावीर त्यागी ;कांग्रेस ,नेहरू को चेता रहे थे कि चीन हमारी सीमा की ओर बढ़ता आ रहा है।
संभल जाइए।
अन्यथा, यह देश भारी परेशानी में पड़ जाएगा।नेहरू नहीं चेते।
नतीजा सब जानते हैं।चीन से शर्मनाक पराजय के बाद प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू इस तरह टूट गए कि उसके बाद अधिक दिनों तक जिन्दा नहीं रह सके।
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22 जुलाई 25
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