गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

मुजफ्फर पुर बालिका गृह कांड में गिरफ्तार जिला बाल संरक्षण इकाई की निलंबित सहायक निदेशक रोजी रानी ने 
21 सितंबर को कहा था कि ‘अगर मेरा मुंह खुल गया तो बड़े -बड़े लोग फंसेंगे।’
 12 दिन बीत गए।
रोजी के मुंह खुलने के कोई संकेत नहीं मिल रहे।
आखिर क्या हुआ ?
 आरोप है कि बालिका गृह की जांच
किए बिना रोजी ने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया था- ओके !
किसी बड़े के कहने पर ओके लिखा था ?
लोगों को यह जानने का हक है।यदि रोजी की बात सही है तो बड़े लोग बेनकाब होने ही चाहिए।उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए।अन्यथा मुजफ्फर पुर कांड जैसे अमानवीय कार्य होते रहेंगे।बिहार की पूरी दुनिया में बदनामी होती रहेगी।  
@ 4 अक्तूबर 2018@

पटना हाईकोर्ट ने पटना के जिलाधिकारी और पटना नगर आयुक्त को ऐसे सभी काॅमर्शियल काॅम्प्लेक्स ,माॅल ,होटल और रेस्टोरेंट की जानकारी देने का आदेश दिया है जिनका निर्माण पार्किंग स्थल के बगैर हुआ है।
   इससे बेहतर अदालती आदेश हो ही नहीं सकता।अदालत का ध्यान मूल समस्या पर चला गया है।अब हल की भी उम्मीद की जा सकती है। 
अस्सी के दशक में फे्रजर रोड के एक बड़े होटल के नीचे शासन ने भूमिगत पार्किंग स्थल बनवा दिया था।
अन्य संस्थानों में भी बन ही सकता है,यदि हाईकोर्ट इस मामले को उसकी तार्किक परिणति तक पहुंचा दे।
  

बुधवार, 3 अक्टूबर 2018


इंदिरा गांधी पर रोक, पर कर वंचक धर्मतेजा 
को 1977 में मिल गयी थी विदेश यात्रा की छूट
       
जनता पार्टी की सरकार के शासन काल में कुछ मुकदमों को लेकर पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी पर तो विदेश यात्रा पर रोक थी,पर तत्कालीन प्रधान मंत्री आॅफिस ने कर वंचक  धर्म तेजा को इसकी अनुमति दे दी थी।यह अनुमति नियम को शिथिल करके दी गयी थी।
  चंर्चित जयंती शिपिंग कंपनी  के मालिक धर्मतेजा ग्रीक व्यापारी ओनासिस बनना चाहता था,पर वह लगातार  विवादों मंे ही रहा।
आंध्र प्रदेश के एक स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र सुशिक्षित धर्म तेजा सरकारी धन से व्यापार का जुआ खेल कर 
ओनासिस बनना चाहा था।
याद रहे कि जहाजों के धनाढ्य व्यापारी ओनासिस ने अमरीकी राष्ट्रपति कैनेडी के निधन के बाद उनकी विधवा जैकलिन से शादी करके चर्चा में आया था।
 धर्म तेजा की भी दूसरी पत्नी भी साठ के दशक में दिल्ली के राजनीतिक-सामाजिक सर्किल में चर्चित थी।उसने तो एक पार्टी में एक शीर्ष सत्ताधारी नेता को खुलेआम चूम लिया था।
सरकारी पैसों के घोटाले के आरोप में भारतीय अदालत ने धर्म तेजा को 19 अक्तूबर 1972 को तीन साल की सजा दी थी।उस पर 14 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।
जुर्माना नहीं भरने पर उसे तीन साल की और सजा काटनी थी।
पर, उसने न तो 14 लाख अदा किया न ही तीन साल की अतिरिक्त सजा काटी।वह येन केन प्रकारेण 1975 में जेल से बाहर आ गया।
सत्ता के गलियारे में उसकी ताकत का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता था कि नियम को नजरअंदाज करके उसे 
पासपोर्ट भी से दिया गया।
नियम है कि दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर सजा पूरी होने के बाद अगले पांच साल तक उसे पासपोर्ट नहीं मिलेगा।
पर 1975 में सजा पूरी करने के बाद 1977 में ही वह विदेश चला गया।
 उसके सवाल पर मोरारजी सरकार में मतभेद था।
तत्कालीन प्रधान मंत्री ने कहा था कि उसने सरकार से जितना लिया है,उससे अधिक दिया है।इसलिए वह कहीं भी आने जाने को स्वतंत्र है।
 राज्य सभा में कांग्रेस के एन.के.पी साल्वे ने आरोप लगाया था कि प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव वी.शंकर से धर्म तेजा की साठगांठ है।
 धर्म तेजा की कहानी जान कर ऐसा  लगता है कि  आज के ‘विजय माल्याओं’ का वही ‘आदि पुरूष’ था।
 1981 में लोक सभा में सरकार ने बताया था कि धर्म तेजा पर आयकर का 7 करोड़ 17 लाख रुपए और संपत्ति कर का एक करोड़ 76 लाख रुपए बकाया है।
 उससे पहले जब चरण सिंह प्रधान मंत्री बने तो उनकी सरकार ने उस अमरीकी विमान सेवा पर केस किया था जिससे उड़ कर धर्म तेजा 1977 में देश से बाहर चला गया था।
इस पर अमरीकी विमान सेवा ने कहा कि ऐसा उसने एयर इंडिया के कहने पर किया था।
 सन 1961 में केंद्र सरकार से 20 करोड़ 22 लाख रुपए कर्ज लेकर धर्म तेजा ने अपनी जयंती शिपिंग कंपनी के लिए जापान से पानी जहाज खरीदना शुरू किया।
उसने सेवा निवृत लेफ्टिनेंट जनरल बी.एम.कौल को जापान में 
अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया।
जहाज की कीमत की पहली किश्त देकर वह जहाज खरीद लेता था और उसी जहाज को गिरवी रख कर फिर दूसरा जहाज खरीदता था।इस तरह उसने कई जहाज खरीदे।
जहाज की खरीद में जो दलाली मिलती थी,उसे जयंती शिपिंग कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्य आपस में बांट लेते थे जबकि तब की सरकार चाहती थी कि वह पैसा सरकार के खाते में जमा हो जाए।
इस तरह उसने 22 पानी जहाज खरीदे।
  उधर धर्म तेजा अपनी ही कंपनी को खोखला करते हुए कई देशों में अपनी संपत्ति खरीदने लगा।
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता डा.राम मनोहर लोहिया ने लोक सभा में धर्म तेजा का मामला जोरदार ढंग से उठाया।
इधर भारत सरकार ने कहा कि उस पर 4 करोड़ रुपए से अधिक का आयकर  टैक्स बाकी है।तेजा पर 1966 में  वारंट निकला।वह अमेरिका में गिरफ्तार हुआ।बेल पर छूटा।
पर बेल की शत्र्त तोड़कर वह कोस्टारिका चला गया।
कोस्टारिका ने उसे अपने नागरिक के रूप में स्वीकार किया।नागरिकता के लिए  कोस्टारिका को कुछ पैसे देने होते हैं।  
    धर्मतेजा के पास कोस्टारिका की ओर से जारी डिप्लोमेटिक पासपोर्ट था।
 भारतीय  कानून तोड़ने के आरोप में 1972 में लंदन मंे धर्म तेजा गिरफ्तार हुआ।
वहां कोस्टारिका की सरकार ने अदालत में भारत सरकार के खिलाफ दलील दी।
पर भारत सरकार उसे स्वदेश लाने में सफल हो गयी।
जयंती शिपिंग कंपनी का इंदिरा गांधी सराकर ने सरकारीकरण कर लिया।
उधर अदालत ने तेजा को सजा दी।
लगता है कि इस देश के कुछ भगोड़े कर्जदार व कानून तोड़कों ने भी समय -समय पर कुछ सत्ताधारी नेताओं की मदद से शायद धर्मतेजा से ही यह सब करने के लिए सीखा है। 
@मेरा यह लेख 1 अक्तूबर, 2018 को फस्र्टपोस्ट हिन्दी में प्रकाशित मेरे साप्ताहिक काॅलम ‘दास्तान ए सियासत’ से लिया गया है।@    

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

1.- 2015 के आंकडे़ के अनुसार इस देश में निजी सुरक्षा एजेंसियों ने 70 लाख लोगों को रोजगार दे रखा था।
यह संख्या अब तक तो काफी बढ़ चुकी होगी।
इस देश के पुलिस तंत्र पर इससे बड़ी टिप्पणी और क्या हो सकती है ?
2.-आज के नवभारत टाइम्स के लखनऊ संस्करण में प्रकाशित सुधीर मिश्र की त्वरित टिप्पणी का एक अंश-
‘उत्तर प्रदेश पुलिस के एक दरोगा ने बड़ी बेबसी से बताया कि पहले गरीब लोगों से दस, बीस, पचास के नोट वसूलो।
फिर बैंक में जाकर उसके पांच सौ और दो हजार के नोट करवाओ।बड़े साहब लोगों को भारी नहीं, हल्के लिफाफे पसंद हैं ।छोटे नोट नहीं लेते।
 3.-पटना के दीघा थाना इलाके में बालू माफियाओं ने सैप जवान से कल लोडेड राइफल लूट ली।
यह और बात है कि उसे बाद में बरामद कर लिया गया।पर माफियाओं की हिम्मत तो देखिए।यह हिम्मत कहां से आती है ? क्या जिस ओर इशारा सुधीर मिश्र ने किया है, वहांं से ?
पता नहीं।
 अब उसी दीघा थाने की ही एक कहानी साठ के दशक की।
तब के एक बाहुबली मंत्री ने अपने एक पड़ोसी व्यापारी की जमीन हथिया ली।जब कब्जा हटाने के लिए वह दुबला-पतला व्यापारी  मोटे तगड़े  मंत्री से विनती करने गया तो जान से मारने की धमकी मिली।
व्यापारी देश के एक बड़े उद्योगपति का रिश्तेदार भी था।
उसने अपनी जान की सरुक्षा के लिए दीघा थाने से गुहार की। थानेदार ने मंत्री की परवाह किए बिना व्यापारी के आवास के सामने एक लाठी-पगड़़ीधारी सिपाही तैनात कर दिया।
उस पगड़ीधारी की भी हनक देखिए।
 मंत्री जी ने समझा कि शायद अब व्यापारी को हम धमका नहीं पाएंगे।मंत्री ने उस दरोगा का न सिर्फ तबादला करवा दिया बल्कि उसकी पदावनति भी करवा दी।
बाद में एक आयोग ने मंत्री के उस काम को भी गलत माना था।
खैर यहां साठ के दशक के एक लाठीधारी की हैवत की चर्चा कर रहा था।अब तो लोडेड राइफल की भी कोई धाक नहीं भले ही वह पुलिस जवान के पास हो।क्या हो रहा है अपने देश में  ?
कौन ठीक करेगा इन सब चीजों को  ? वह भी किसी को पता नहीं।

अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘एक समूची जाति के निस्तेज होने की अपेक्षा मैं हिंसा को हजार बार अच्छा समझूंगा।’
ऐसे साफ वचन बोलने वाले व्यक्ति के जन्म दिन पर एक बात कहने की आज सख्त जरूरत है।कुछ लोगों को यह बात कड़वी लग सकती है।पर यह बोलने की हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
 कुछ देसी और विदेशी तत्व इस देश को हथियारांंे के बल पर तोड़ना चाहते हैं।निस्तेज बनाना चाहते हैं।
ऐसे कुछ अन्य तत्व हथियारों के बल पर इस देश की सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं।उन तत्वों ने अघोषित युद्ध छेड़ रखा है।
हमारे बीच के कुछ नादान व वोट लोलुप तत्व ऐसे लोगों की जाने -अनजाने मदद कर रहे हैं।वे चाहते हैं कि ऐसे लोगों के मानवाधिकार हम चिंता करते रहें।यहां लोकतंत्र के विभिन्न स्तम्भ भी ऐसे विध्वंसक तत्वों के खिलाफ उतना कठोर नहीं हैं जितना कुछ अन्य देशों में होते हंै। 
  इस विषम स्थिति में एक ‘नरम राज्य’ के रूप में हमारा व्यवहार हमें अंततः कहां ले जाएगा ?
दुनिया के कम से कम तीन देशों की चर्चा यहां मौजूं होगा।
अपने देश के भीतर व बाहर के ऐसे तत्वों की तरफ चीन, इजरायल और अमरीका का व्यवहार देख लीजिए। 
अब भी हम सबक सीखें अन्यथा देर -सवेर .....।




सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

-जब नेहरू ने किया उदय पुर राज घराने का सम्मान-


 एम.ओ.मथाई ने लिखा है कि 
‘डुंगर पुर के महा रावल ने प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को याद दिलाया कि उदय पुर का राज घराना जापान के राजवंश से पुराना है।
राजस्थान के सभी राजा, महाराणा को शाष्टांग नमस्कार करते हैं।जनता में उनका जितना मान है,वह तो भारत सरकार ने भी राज्यों के अधि मिलन के समय उनको देश का एकमात्र ‘महाराज प्रमुख’ बना कर स्वीकार किया था।
अंग्रेजी सरकार ने भी उनके विशिष्ट स्थान को स्वीकार कर उन्हें ब्रिटिश सम्राट जार्ज पंचम के दिल्ली दरबार में,जहां भारतीय राजाओं को अंग्रेज महाराजाधिराज के सामने झुक कर उन्हें नजराना देना पड़ा था,हाजिर होने से बरी कर दिया था।
महारावल ने प्रधान मंत्री से प्रार्थना की कि वह युवक महाराणा से प्रिवी पर्स कम करने के लिए न कहें,बल्कि जो कटौती हो चुकी है,उसे काफी हद तक पूरा कर दें।
  प्रधान मंत्री नेहरू पर महा रावल के पत्र का काफी असर पड़ा।उन्होंने युवक महाराणा को दिल्ली आकर प्रधान मंत्री आवास में ठहरने और उनसे, राष्ट्रपति और गृह मंत्री से इतमिनान से बातें करने के लिए आमंत्रित किया।
युवा महाराणा दिल्ली आए।कई दिनों तक प्रधान मंत्री निवास में ठहरे।राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद और गृह मंत्री से मिले।उसके फलस्वरूप गृह मंत्रालय ने उनकी प्रिवी पर्स कुछ इस तरह बांध दी कि पूर्ववर्ती महाराणा के निधन से हुई आकस्मिक कटौती का बोझ हल्का हो जाए।
@मथाई 13 साल तक प्रधान मंत्री नेहरू के  निजी सचिव रहे।उन्होंने सत्तर के दशक में अपने संस्मरणों की दो किताबें लिखीं जो काफी रोचक ,सूचनाप्रद व विवादास्पद रहीं।@    

 पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने 24 सितंबर 2018 को इस्लामाबाद में कहा कि राहुल गांधी  भारत के प्रधान मंत्री बनने वाले हैं।
  इससे पहले कांग्रेस के प्रमुख नेता मणि शंकर अय्यर ने नवंबर, 2015 में पाकिस्तान जाकर वहां के एक टी.वी.चैनल पर पाकिस्तानियों से अपील की थी कि ‘मोदी को हटाइए और हमें सत्ता में लाइए।’
लगता है कि पाकिस्तान ने अंततः मणिशंकर की बात मान ली और घोषणा कर दी कि राहुल प्रधान मंत्री होने वाले हैं।
संभवतः इसके लिए पाकिस्तान ने अपने ढंग से परोक्ष रूप से कुछ चुनावी इंतजाम भी किए होंगे।
   25 सितंबर 2018 को प्रधान मंत्री ने यह सवाल उठाया है कि क्या भारत का पी.एम.दूसरे देश तय करेंगे ?
कांग्रेस कह रही है कि जब -जब भाजपा कमजोर होती है तो उसे पाकिस्तान की याद आती है।
पर सवाल है कि ऐसी नौबत लाता कौन है ?
जाहिर है कि मणि शंकर अय्यर जैसे नेता जो पाकिस्तान से मदद मांगते हैं।
 कांग्रेस ने जब मणि को पार्टी से निलंबित किया था तो लगा था कि वह अय्यर के विचारों से सहमत नहीं है।
पर उनका निलंबन समाप्त हो जाने पर अब लोगों को क्या नतीजा निकालना चाहिए ?