बुधवार, 8 दिसंबर 2021

 क्यों न बाउंसर और देसी पहलवानों को विधायक और सासंद बनवाकर उनसे ही सदन में शांति कायम करवाई जाए ??? 

  .....................................

  --सुरेंद्र किशोर--

 ...................................

इस देश की विधायिकाआंे में शांति बनाए रखने में यह लोकतांत्रिक सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है।

  क्यों न अब यह काम बाउंसरों और देसी पहलवानों को सौंप दिया जाए ?

 बाउंसरों व पहलवानों को सदन का मार्शल बनाकर नहीं बल्कि सदन का सदस्य बनवाकर।

  इनके लिए अघोषित रूप से दस प्रतिशत सीटें

आरक्षित हो जाएं।हर सदन में हल्ला ब्रिगेड के सदस्यों की संख्या भी 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती।

....................................

अघोषित आरक्षण एक मामले में तो पहले से है।

जातिवादी-परिवारवादी दलों के सुप्रीमो के

परिजन के लिए अघोषित आरक्षण का कोटा बढ़ता जा रहा है।

अपवादों को छोड़कर जितने परिजन उपलब्ध व इच्छुक होते हैं,वे सब किसी न किसी सदन के सदस्य बना ही दिए जाते रहे हैं।

.............................

दस प्रतिशत बाउंसर-पहलवान के आलावा अन्य दस प्रतिशत सीटें संसदीय मामलों के जानकार लोगों के लिए आरक्षित हांे।

  ऐसा नहीं कि आज विभिन्न सदनों में वैसे जानकार लोग नहीं हैं।

जरूर हैं, पर ,उनकी संख्या बढ़े।

हां,यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बाउंसर या पहलवान 

आदतन अपराधी या चोर न हो।

............................

बाउंसरों -पहलवानों का काम यह होगा कि जैसे ही सदन में ‘हल्ला ब्रिगेड’ सदन का माहौल बिगाड़ना शुरू करे,वे उठकर उनकी निर्धारित सीटों पर उन्हें जबरन बैठा दिया करें।

उनके पास खड़े रहें।

पीठासन पदाधिकारी देशहित-लोकतंत्र हित में उन्हें यह ‘कत्र्तव्य’ निभाने दें।

सदन में जैसे ही ‘गुंडई’ शुरू हो , बाउंसर-पहलवान सदस्य सक्रिय हो जाएं।

यदि मैंने गंुडई शब्द का इस्तेमाल कर दिया तो क्या वह गलत है ?

इन दिनों देश के विभिन्न सदनों में अक्सर जिस तरह के अशोभनीय दृश्य उपस्थित होते रहते हैं,यदि वैसे दृश्य कोई चैक -चैराहे पर उपस्थित करे,तो आप उसे गुंडा कहेंगे या शरीफ आदमी ?

..................................

   8 दिसंबर 21



गुरुवार, 2 दिसंबर 2021

    जिन लोगों को गुटका, तम्बाकू और जर्दा सहित पान खाने की लत लग चुकी है, वे एन.सी.पी.नेता शरद पवार के चेहरे का ‘भूगोल’ अखबारों में व टी.वी. पर गौर से देख लें।

   कुछ दशक पहले एक बार पटना में  शरद पवार के प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने का मुझे अवसर मिला था।

एक ही वार्ता में उन्हें कई बार गुटका लेते हुए मैंने देखा था।

मन ही मन मैं समझ गया कि नेता जी  खतरे में हैं।

--सुरेंद्र किशोर

2 दिसंबर 21


      स्कूली शिक्षा की गिरावट में ‘‘छड़ियों 

    की छुट्टी’’ का कितना योगदान ?

     ........................................

      ---सुरेंद्र किशोर--

    .....................................

बाइबिल का एक वाक्यांश या मुहाबरा है--

‘‘स्पेयर द रड स्प्वाॅयल द चाइल्ड।’’ 

यानी, ‘‘छड़ी को छुट्टी’’ दे देने से बच्चे बिगड़ जाते हैें।

.........................

दुनिया में पहली बार शिक्षकों के हाथों में जब छड़िर्यां आइं थीं, तो वह संभवतः बाइबिल से ही प्रेरित होकर।

  मैं सन 1962 तक स्कूली छात्र था।

मैंने प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक शिक्षकों के हाथों में छड़ियां देखी थीं।

  कुछ मोटी तो कुछ पतली !

वैसे सारे छड़ीधारी शिक्षकों को छड़ियों का इस्तेमाल करना नहीं पड़ता था।यदाकदा ही उसका इस्तेमाल होता था।

    छड़ी फटकारने से ही काम चल जाए तो इस्तेमाल क्यों करना ?

पर ,छड़ी की झलक पाते ही हम ‘चटिया’ यानी विद्यार्थी अपनी स्लेट-पेंसिल-किताब -कापी की ओर आकर्षित हो जाते थे।

हल्ला -गुल्ला बंद हो जाता था।

’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’

कुछ साल पहले इस देश में खास बिहार में सरकार ने शिक्षकों को उनकी छड़ियों से महरूम कर दिया।

अब विद्यालयों में शिक्षा-परीक्षा का क्या हाल है ?

सब कहेंगे कि गिरावट आई है।

  पांचवीं के छात्र तीसरी क्लास तक की भी जानकारी नहीं रखते।

..........................

शासन को इस बात की पड़ताल करानी चाहिए कि गिरावट में ‘‘छड़ियों की छुट्टी’’ का कितना योगदान रहा है ? 

.................................

2 दिसंबर 21


   2019 के लोस चुनाव से ठीक पहले मुलायम 

 ने मोदी को फिर पी.एम.बनने का आशीर्वाद 

क्यों दिया था ?

 ..........................................     

  --सुरेंद्र किशोर--

 ...........................................

याद है आपको ?

2019 के लोक सभा चुनाव से ठीक पहले मुलायम सिंह यादव ने लोक सभा की आखिरी बैठक में क्या कहा था ?

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में उन्होंने उनसे कहा था कि आप फिर से प्रधान मंत्री बनें,यह मेरा आशीर्वाद है आपको। 

..............................

मुलायम जी तब भी सपा में ही थे।

सपा ने सन 2019 का लोक सभा चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़ा भी।

खैर, बाकी तो इतिहास है।

अब सवाल है कि मुलायम जी ऐसा क्यों कहा ?

क्या इसके पीछे प्रधान मंत्री आॅफिस में सुरक्षित एक संवेदनशील फाइल है ?

 क्या उस फाइल में मुलायम सिंह यादव का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आई.से सीधा संबंध का कच्चा चिट्ठा है ?

......................................

सन 1997 में तत्कालीन भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने मुलायम सिंह यादव पर,जो तब रक्षा मंत्री थे, यही आरोप लगाया था।

  सिन्हा ने यह भी कहा कि खुफिया रिपोर्ट से इस आरोप की पुष्टि होती है।

  यशवंत सिन्हा के, जो अब भाजपा में नहीं हैं, उस बयान की कटिंग की स्कैन काॅपी यहां प्रस्तुत है।

इस पृष्ठभूमि में आप पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव के जिन्ना संबंधी बयान पर गौर करें।

कैसे-कैसे नेता हैं अपने देश मंे !!!

.............................. 

 27 नवंबर 21


    जिन लोगों को गुटका, तम्बाकू और जर्दा सहित पान खाने की लत लग चुकी है, वे एन.सी.पी.नेता शरद पवार के चेहरे का ‘भूगोल’ अखबारों में व टी.वी. पर गौर से देख लें।

   कुछ दशक पहले एक बार पटना में  शरद पवार के प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने का मुझे अवसर मिला था।

एक ही वार्ता में उन्हें कई बार गुटका लेते हुए मैंने देखा था।

मन ही मन मैं समझ गया कि नेता जी  खतरे में हैं।


शनिवार, 27 नवंबर 2021

   ईश्वर ने यह शरीर सौ साल के लिए बनाया

  शराब पीकर अपनी आयु आधी क्यों कर रहे हो ?

  ...........................................

  पत्नी व बच्चों को अनाथ व बिलखता छोड़कर 

   क्यों चले जाना चाहते हो ?

............................................

 ---सुरेंद्र किशोर-- 

 .....................................

महात्मा गांधी के आह्वान पर कांग्रेसियों ने सन 1921 में शराब,गांजा आदि की दुकानों पर धरना दिया और वे जेल गए।

गांधी जी मानते थे कि 

‘‘आबकारी से प्राप्त राजस्व पाप की आमदनी है।’’

डा.राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, अंत -अंत तक गांधी जी अपने इस विचार पर कायम रहे।

पर कांग्रेसियों ने बिहार में जगलाल चैधरी को सन 1952 में मंत्री बनाने से इनकार कर दिया क्योंकि जब वे उससे मंत्री थे तो नशाबंदी लागू कर दी थी।

जबकि नशाबंदी की आय से ही उनके परिवार ने जगलाल चैधरी को मेडिकल पढ़ाने के लिए कलकत्ता भेजा था।

चैधरी जी ने जनहित में न तो

अपने परिवार की आय का ध्यान रखा और न ही अपनी जाति पासी की आय का।

देश का नेता हो तो ऐसा !

.............................

आजादी के तत्काल बाद से ही सत्ताधारी कांग्रेसियों ने गांधी की इस बात का भी उलंघन करना शुरू कर दिया था।

तब के शीर्ष सत्तासीनों ने कहा था कि आबकारी राजस्व के बंद होने से शिक्षा व विकास जैसे जनोपयोगी काम रुक जाएंगे।

उस पर गांधी ने कहा कि ‘‘पाठशालाओें को बंद कर देना पड़े तो उसे मैं सहन कर लूंगा।

पर, पैसे के लिए कुछ लोगों को पागल बनाने की नीति एकदम गलत है।’’

...................................

गांधी जी को इस बात का दुख था कि सन 1921 में नशाबंदी के लिए जेल जाने वाले कांग्रेसी सत्ता पाने के बाद अब कहते हैं कि नशाबंदी मौलिक अधिकारों का हनन है।

.....................................

2016 से लागू शराबबंदी के बाद बिहार में फर्क आया।

.................................

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार 2015-16 और 2019-20 के बीच बिहार में एक करोड़ लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया।

......................................

बिहार के एक पिता ने अपने पुत्र के बारे में बताया--

‘‘मेरा बेटा अपने अमीर मित्रों के साथ उनके खर्चे से शराब पी रहा था।

अब चूंकि कड़ाई हो गई और काले बाजार में शराब महंगी भी हो गई।इसलिए अब अमीर मित्र अपने गरीब मित्र को मुफ्त में शराब नहीं पिला रहा है।

इस तरह मेरा बेटा आदतन शराबी बनने से बच गया।’’

.......................................

कुछ शराबियों का तर्क है कि मशहूर लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह तो रोज शराब पीकर भी सौ साल जीए।

अरे भई,अपवाद नियम नहीं बन सकता।

मैं पटना के ही कई पत्रकारों को जानता हूं जो शराब-सिगरेट के कारण आधी उम्र में ही परिवार को बिलखता छोड़कर ऊपर

चले गए।

इस देश के कई तेजस्वी व जनाधार वाले नेता अपनी किडनी-लीवर डैमेज करके अपने प्रशंसकों व अनुयायियों को 

निराश कर दिया।

कुछ ऊपर चले गए,कुछ अन्य रास्ते में हैं।

.................................... 

27 नवंबर 21

 


बुधवार, 24 नवंबर 2021

      पवन वर्मा की राजनीतिक यात्रा

      ........................................

       --सुरेंद्र किशोर--

      ............................................

बहुत पहले की बात है।

नई दिल्ली के एक बड़े अखबार के सहायक संपादक अखबार के मालिक से मिले।

उन्होंने अपनी एक दर्जन किताबों को उन्हें समर्पित करते हुए उनसे कहा कि ‘‘मुझे संपादक का पद मिलना चाहिए।’’

  मालिक ने पुस्तकों को उलट-पलट कर देखा और सहायक संपादक जी से कहा कि 

‘‘आप हमारा काम कर रहे थे या किताबें लिख रहे थे ?’’

  सहायक संपादक महोदय समझ गए कि मालिक उन्हें संपादक नहीं बनाएगा।

वे वहां से जल्द ही विदा हुए।

कुछ दिनों के बाद अखबार से भी।

...................................

 प्रायवेट सेक्टर में ऐसा ही होता है।

आपको वह काम करना पड़ता है जिस काम के लिए आप बहाल हुए हंै।

पर, सरकार में या राजनीतिक दलों में ?

काम करने की कोई मजबूरी नहीं।

...............................

जदयू से निष्कासित जदयू के पूर्व राज्य सभा सदस्य पवन वर्मा ने अब ममता बनर्जी की पार्टी ज्वाइन कर ली है।

शुभकामना !

उम्मीद है कि वर्मा जी ममता को प्रधान मंत्री बनवाने की भरपूर कोशिश करेंगे।

राजनीति में आने से पहले वर्मा जी विदेश सेवा में थे।

हाल ही में वर्मा जी ने बताया कि

 ‘‘मैंने 24 किताबें लिखी हैं।’’

जब वे सरकारी सेवा में थे,तभी उनकी एक मशहूर किताब 

‘द ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास’ (1998)आई थी।

पर,मुझे यह नहीं मालूम कि 24 में से कितनी किताबें उन्होंने सरकारी सेवा काल में लिखीं और कितनी बाद में ?

जवाहरलाल नेहरू जब आंदोलन में थे तो जेल में किताबें लिखते रहे।

पर प्रधान मंत्री बनने के बाद ?

मुझे नहीं मालूम कि उन्हें किताब लिखने की फुर्सत मिली।

आम तौर पर सरकारी सेवक भी रिटायर होने के बाद ही किताब लिख पाते हैं।

एक एम.पी.की भी कम जिम्मेदारियां नहीं होतीं,यदि वह ईमानदारी से उसे निभाए। 

................................

पवन वर्मा एक सुपठित व विद्वान व्यक्ति हैं।

उनकी किताब भी लोग पढ़ते हैं।

किंतु सवाल है कि किताबें लिखने के क्रम में आपने अपनी सरकारी सेवा व राज्य सभा की सदस्यता के कत्र्तव्यों के साथ कितना न्याय किया ?

  .............................................

अब आप तृणमूल कांग्रेस के सदस्य बन गए हैं।

 सुप्रीमो ममता बनर्जी की अपने सदस्यों से कुछ सामान्य तो कुछ असामान्य अपेक्षाएं रहती हैं।

टीएमसी नेतृत्व की अपेक्षाएं कई बार राष्ट्रहित से टकराती रहती हैं।

उम्मीद है कि उन सारी अपेक्षाओं पर वर्मा जी खरा उतरेंगे ताकि उनकी राजनीतिक यात्रा में स्थिरता आ सके।

.............................

24 नवंबर 21