ई पी एफ पेंशनर्स के साथ कंेद्र
सरकार का अन्याय क्यों जारी है ?
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भाजपा और केंद्र सरकार अपने दोहरे मान दंड
पर जरा गौर करे और उसे सुधारे
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सुरेंद्र किशोर
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भाजपा ने दिल्ली विधान सभा के मतदाताओं को यह भी आश्वासन दिया है कि वह सत्ता में आने के बाद बुजुर्गों
को हर माह पेंशन राशि के रूप में 2500 रुपए देगी।
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ई.पी.एफ. पेंशन की न्यूनत्तम मासिक राशि 1000 रुपए ही है।
मुझे ई पी एफ पेंशन के रूप में 1231 रुपए हर माह मिलते हैं।
सन 2005 से अब तक मेरी इस राशि में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
दुनिया के किस देश में ऐसी पेंशन योजना का प्रावधान है जिसमें बढ़ोत्तरी की कोई गुंजाइश ही नहीं ?!!
कोई हमें बताए।
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इस तरह पैसे बांट कर वोट लेने की परंपरा इस देश में अच्छी है या खराब ,इस पर अभी बहस नहीं करूंगा।
अभी तो दोहरे मानदंड की ही चर्चा करूंगा।
मेरे जैसे ई पी एफ.पेंशनर्स की संख्या दिल्ली राज्य में एक लाख 38 हजार 693 है।
क्या वे लोग भाजपा की प्रस्तावित पेंशन योजना का भी लाभ उठा पाएंगे ?
या फिर ई पी एफ पेंशन की राशि बढ़ाई जाएगी ?
यदि ऐसा कुछ नहीं होता है कि केंद्र सरकार व भाजपा के प्रति आम ई पी एफ पेंशनर्स की धारणा कैसी बनेगी ?
देश भी ऐसे ई पी एफ पेंशनर्स की कुल संख्या लगभग 78 लाख हंै।
इन्हीं में मीडिया से रिटायर लोग भी आते हैं।
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मेरी खुद की आर्थिक स्थिति तो अभी ठीक ठाक है।जब तक शरीर साथ दे रहा है,ठीक रहेगी भी।
क्योंकि मैं स्वतंत्र लेखन के जरिए आज भी यानी इस उम्र में भी अच्छा-खासा कमा लेता हूं।रात-दिन घटता हूं।
इस साल तो मैंने उस कमाई पर आयकर भी दिया है।
पर,सारे ई पी एफ पेंशनर्स तो वैसे नहीं हैं।कुछ जरूर होंगे।
दरअसल भाजपा व उसकी सरकार जब अन्य मामलों में भरसक दोहरा मानदंड नहीं अपनाती है तो ई पी एफ पेंशनर्स को लेकर ही दोहरा मानदंड क्यों ?
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18 जनवरी 25
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