मंगलवार, 14 जनवरी 2025

 किसने नष्ट की गंगा की निर्मलता !

-----------

आज प्रयाग के पास गंगा जल न तो 

नहाने लायक है और न ही पीने लायक

----------------

सुरेंद्र किशोर

--------------

गंगा तेरा पानी अमृत

झर- झर बहता जाए।

युग -युग से इस देश की 

धरती तुझसे जीवन पाए।।

-----------

दशकों पूर्व एक फिल्म बनी थी जिसके गीत का यही मुखरा था।

सही भी था।

मुगल सम्राट अकबर भी रोज गंगा जल ही पीता था।

अंग्रेजों ने भी गंगा की अविरलता को जारी रहने दिया था जिससे गंगा जल की निर्मलता बनी रही।

दरअसल गंगा जल में जैसे दिव्य औषधीय गुण हंै,वैसा गुण 

दुनिया की किसी नदी में नहीं है।यह संयोग नहीं कि कुम्भ-महा कुम्भ का हजारों साल से आयोजन गंगा के ही किनारे होता रहा है।

तीर्थ प्रयाग गंगा,सरयुग और (विलुप्त पौराणिक) सरस्वती का संगम स्थल है।

यदि गंगा नदी किसी अन्य देश में होती तो वहां की सरकार 

इसकी दिव्यता -निर्मलता को बनाये रखने के लिए कुछ भी उठा नहीं रखती।

--------------

पर, आजादी के बाद की एक अलग एजेंडा वाली कांग्रेसी सरकार ने सिंचाई के बहाने गंगा की अविरलता को भारी नुकसान पहुंचाया।

गंगा नदी पर कुल मिलाकर 940 बांध,बराज और वीयर बना दिये गये।अविरलता को बाधित कर दिया गया।

कहते हैं कि जब गंगा अविरल थी तो वह खुद को निर्मल भी करती जाती थी।

सिंचाई का प्रबंध तो किसी अन्य तरीके से भी किया जा सकता था।

-----------

पर,कहते हैं कि एकतरफा सेक्युलर नेहरू सरकार ने गाय,गंगा और पीपल को लेकर जान बूझकर कुछ ऐसा कर दिया जिससे पीढ़ियों को नुकसान हो रहा है।

 देसी गाय के दूध में औषधीय गुण होता है।इसकी जगह कांग्रेस सरकार ने हाईब्रिड गाय का चलन शुरू किया।

सरकार ने खुद पीपल लगाने का काम बंद कर दिया।

जबकि यदि हर पांच सौ मीटर पर पीपल का वृक्ष हो तो पर्यावरण की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।क्योंकि पीपल से 24 घंटे आक्सीजन निकलता हैं।

दरअसल सनातनी लोग गाय को माता कहते हैं।गंगा को गंगा मइया कहते हैं।

यह भी मानते हैं कि पीपल में देवता का वास होता है।

------------

 आजादी के तत्काल बाद की हमारी सरकारों को यह मंजूर नहीं था क्योंकि उसमें वे हिन्दू पुनरुत्थान की संभावना देख रहे थे।

उन्हें तो किसी और का उत्थान करना था।

-------------- 

14 जनवरी 25


कोई टिप्पणी नहीं: