आर्ट आॅफ इंटरव्यू
सुनील बादल की इस पुस्तक(आर्ट आॅफ इन्टरव्यू) के बारे में यशस्वी पत्रकार-सह -लेखक बलबीर दत्त की इस बात से मैं पूरी तरह सहमत हूं कि ‘‘मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि हिंदी में पत्रकारिता पर काफी हद तक यह सर्वांगपूर्ण पुस्तक अपने ढंग की पहली पुस्तक है।’’
जब मैंने पत्रकारिता शुरू की थी,उस समय ही ऐसी कोई पुस्तक मिली होती तो उसका मुझे काफी लाभ मिलता।
खुशी है कि मीडिया जगत की नई पीढ़ी को इसका लाभ मिलेगा।
इस पुस्तक का नाम ही ऐसा है जिससे विषय वस्तु का पता चल जाता है।
इस इंटरव्यू विधा के लगभग सारे पहलुओं की चर्चा इस पुस्तक में समाहित है।अनेक प्रसंग ,विवरण और उदाहरण मौजूद हैं।
यदि इंटरव्यू से पहले ठीक ढंग से तैयारी कर ली जाए तो कई बार कोई-कोई भेंट वार्ता, ‘‘न्यू ब्रेक’’ साबित हो सकती है।
मैंने अपने पत्रकारीय जीवन में जयप्रकाश नारायण से लेकर लालू यादव तक और ‘‘मनातू के मऊआर’’ से लेकर धनबाद के चर्चित शूटर तक के साथ लंबी-लंबी बातचीत की थी।
उन भेंट वार्ताओं से भी खबरें निकलीं,पर मेरी तैयारी उतनी नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी।तैयारी बेहतर होने पर बेहतर रिजल्ट होते।
नयी पीढ़ी के पत्रकारों के पास यदि सुनील बादल की पुस्तक होगी तो उन्हें मुझ जैसा अफसोस नहीं होगा।
साक्षात्कार के सारे पहलुओं पर यह पुस्तक सोदाहरण दिशा -निदेश है।
ऐसी कृति के लिए मैं लेखक को धन्यवाद और बधाई देता हूं।
--- सुरेंद्र किशोर
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‘आर्ट आॅफ इंटरव्यू’
प्रकाशक-विद्या विकास एकेडेमी
3637,नेताजी सुषाष मार्ग
दरियागंज
नई दिल्ली-110002
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प्रथम संस्करण-सन 2025
पेपरबैक- 240 पृष्ठ
मूल्य-चार सौ रुपए
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