बुधवार, 17 मई 2023

 पी.एफ.आई.का ‘इस्लामिक भारत’ 

बनाम स्वामी धीरेंद्र का ‘हिन्दू राष्ट्र’

.............................................

एक के प्रति नरमी  और दूसरे को जेल भेजने की तैयारी ?

..............................................

प्रति उत्पादक साबित होता रहा है नेताओं का ऐसा रवैया

.......................................

सुरेंद्र किशोर

..........................................

पोप ने सन 2016 में मदर टेरेसा को ‘संत’ की उपाधि दे दी।

अपनी ‘अलौकिक दैविक शक्तियों’ से जो व्यक्ति कम से कम दो 

चमत्कार कर देता है,उसे पोप संत की उपाधि दे देते हैं।

कहा गया कि टेरेसा ने दो चमत्कार कर दिए थे।

..........................................

इस देश के किसी तथाकथित सेक्युलर दल के नेता ने तब भी यह नहीं कहा कि 

कोई अलौकिक शक्ति होती ही नहीं है।क्योंकि मामला वोट बैंक का था।

किंतु बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और ‘‘बजरंग बली की कृपा से चमत्कार’’ दिखा रहे धीरेंद्र स्वामी के खिलाफ कई नेता गण न सिर्फ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि उन्हें जेल भेजने की भी धमकी दे रहे हैं।

साथ ही,यह भी कहा जा रहा है कि एक सुहानी साहा भी धीरेंद्र शास्त्री की ही तरह ही ‘चमत्कार’ दिखाती है।

............................................

मैं खुद नहीं जानता कि ‘मदर टेरेसा’,‘धीरेंद’्र या ‘सुहानी’ का यह सब चमत्कार है या विज्ञान !

यह भी नहीं जानता कि चमत्कार होता भी है या नहीं।

पर, जो भी हो,

नेताओं को चाहिए कि वे कम से कम वोट के लिए यानी कुछ धार्मिक समूहों को  खुश करने के लिए दोहरा रवैया न अपनाएं।

अन्यथा, देर-सबेर यह रवैया उनके लिए ही ‘प्रति उत्पादक’ साबित होगा।

विवादास्पद चमत्कार दिखाकर संत की उपाधि पाने वाली को तो सम्मान और उसी तरह का काम करने वाले धीरेंद्र स्वामी का अपमान ?

इसके विपरीत दोनों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए अन्यथा एकतरफा रवैए से आपका अपना वोट बैंक भी गड़बड़ा सकता है।

याद रहे कि इंदिरा गांधी की सरकार ने मदर टेरेसा को 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।

टेरेसा के विरोधी लोग कहते रहे हैं कि मदर टेरेसा का मुख्य उद्देश्य सेवा नहीं बल्कि  धर्म परिवर्तन करवाना था।

...................................................

याद रहे कि आज तक किसी हिन्दू संत को भारत रत्न नहीं मिला है।

......................................

पी.एफ.आई. का घोषित उद्देश्य है--हथियारों के बल पर भारत को 2047 तक इस्लामिक देश बना देना।

इसके बावजूद पी.एफ.आई.के राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई.से साठगांठ करके कांग्रेस ने हाल में कर्नाटका विधान सभा चुनाव जीता है।

2018 में भी एस.डी.पी.आई.का कांग्रेस से चुनावी तालमेल था।

.................................

धीरेंद्र स्वामी हिन्दू राष्ट्र बनाने का संकल्प दुहराते रहते हैं।

उनकी यह बात पूर्णतः संविधान विरोधी है।

हालांकि धीरेंद्र यह नहीं कहते कि हम हथियारों के बल पर हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे।

पर,जो संगठन हथियारों का सहारा ले रहा है,उसे मान,उसके प्रति नरमी  और धीरेंद्र का अपमान ????

याद रहे कि धीरेंद्र में रिकाॅर्ड भीड़ जुटाने की क्षमता है ।

याद रहे कि पी.एफ.आई. के हजारों जेहादी इस देश में इन दिनों सक्रिय हैं।समय -समय पर वे अपनी ‘करामात’ दिखाते रहते हैं।सेक्युलर सत्ता उनके विरूद्ध कायम केस उठा लेती है।ऐसा किसी अन्य देश में नहीं होता।

यूं ही नहीं हम सैकड़ों साल तक गुलाम रहे !! 

 सेक्युलर सरकारें उसके खिलाफ उतनी सख्ती नहीं बरत रही हैं जितनी के वे हकदार हैं।

  क्या आपने किसी सेक्युलर दल के बड़े नेता को पी.एफ.आई.के  खिलाफ उसी लहजे में बयान देते देखा-सुना है जिस लहजे में धीरेंद्र स्वामी के खिलाफ वे बयान दे रहे हैं ?

पी.एफ.आई. के पूर्व संगठन सिमी के कांग्रेसी नेता सलामन खुर्शीद सुप्रीम कोर्ट में वकील थे।

........................................  

हमारे अधिकतर नेताओं के ऐसे  दोहरे आचरण-रवैए  से आम हिन्दू क्या सोचेगा ?

क्या सोच रहा है ?

यही न कि पी.एफ.आई.के हथियारबंद दस्तों से हमें ये नेता तो नहीं बचाएंगे।

शायद धीरेंद्र स्वामी की जमात बचाए !!

क्या बागेश्वर बाबा के पीछे अभूतपूर्व भीड़ का यही कारण है ?

इस पर मनन और रिसर्च करने की जरूरत हैं।

...........................................

देश के ऐसे बदलते हालात में किसी वोट बैंक को पक्का मत समझिए।

इसलिए देश की बाह्-आंतरिक सुरक्षा के बारे में सोचिए।

याद रखिए गत साल आजम गढ़ और रामपुर लोक सभा सीटें भाजपा जीत गई।

हाल में यू.पी. विधान सभा के दो कठिन उप चुनाव भी भाजपा जीत गई।

बिहार में भी हाल के दो विधान सभा उप चुनावों में भाजपा की जीत को भी विश्लेषित कर लीजिए।

कुढ़हनी और गोपाल गंज में 51 प्रतिशत सवर्ण नहीं हैं।

..............................

17 मई 23

.....................

पुनश्चः

कुछ लोगों को मेरा पोस्ट बुरा लगे तो माफ कीजिएगा।

क्योंकि मैं अपना कत्र्तव्य निभा रहा हूं।

इसी तरह का कर्तव्य मैंने 1990 में पिछड़ा आरक्षण को समर्थन देकर निभाया था।

पूर्व कांग्रेसी विधायक हरखू झा इस बात के गवाह हैं।मैं उन दिनों झा जी के समक्ष भी सवर्णों से कहता था कि ‘गज नहीं फाड़िएगा तो थान हारना पड़ेगा।’

वही हुआ।

 थान ऐसा हारे कि आज भी योग्यता रहते हुए भी किसी सवर्ण के मुख्य मंत्री बनने का यहां कोई चांस नहीं हैं।ं

.............................. 

इस पोस्ट के साथ एक सूची दे रहा हूं।

यह 1990 की है।

खुद देख लें ,तब केंद्रीय सेवाओं में कितने पिछड़े थे।

इसके बावजूद सवर्णों ने जब आरक्षण का विरोध किया तो पिछड़ों ने लालू प्रसाद जैसा नेता ‘पैदा’ कर दिया।

यानी ताकत प्रदान कर दिया।

कैसा अनुभव रहा आपको लालू यादव का ?!!


 


कोई टिप्पणी नहीं: