सोमवार, 16 अगस्त 2021

    

प्रधान मंत्री जी, कल लाल किले से घोषित कीजिए

-- ‘‘भ्रष्टों के लिए फांसी का कानून बनेगा।’’

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भ्रष्टाचारियों की ओर इंगित करते हुए 15 अगस्त 2014 को  नरेंद्र मोदी  ने कहा था,

‘‘मेरा क्या ?’’ और ‘‘मुझे क्या !’’

की प्रवृति से बाहर निकलना होगा।

पर, वे बाहर नहीं निकले।

अब उनके लिए कड़वी दवा की जरूरत है।

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--सुरेंद्र किशोर--

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 इसे कहेंगे -छोटा मुंह, बड़ी बात !!

फिर भी मेरी यह सलाह है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कल लाल किले से एक खास घोषणा करें।

  वह भ्रष्टाचारपीड़ित देश को आश्वासन दें कि भ्रष्टाचारियों के लिए फांसी का प्रावधान करने के लिए कानून बनाया जाएगा।

  मुझे लगता है कि उसके बिना इस देश को आने वाले दिनों में भारी संकट झेलना पड़ेगा।

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15 अगस्त, 2014 को लाल किले से मोदी जी ने सरकारी दफ्तरों का हाल बताते हुए कहा था कि किसी काम के लिए किसी के यहां जाइए तो वह पूछता है कि ‘‘इसमें मेरा क्या ?’’

(यानी, मुझे कितना मिलेगा।)

जब उसे बताया जाता है कि उसे कुछ नहीं मिलेगा तो वह कहता है कि ‘‘तो फिर मुझे क्या ?’’

यानी, मैं यह काम नहीं करूंगा।’’

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 प्रधान मंत्री की जिम्मेदारी निभाते को साढ़े सात साल हो गए।

खुद उनके और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के बारे में अब तक किसी बड़े घोटाले की खबर नहीं आई है।

खुद मोेदी जी के बारे में तो आ भी नहीं सकती।

क्योंकि वे दूसरी ही मिट्टी के बने हैं।

किंतु क्या यही बात उनकी सरकार के अन्य अंगों के बारे में कही जा सकती है ?

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मैं खुद एक भोली आशा में जी रहा था।

मुझे लगता था कि यदि कोई ऐसा प्रधान मंत्री इस देश की गद्दी पर बैठे जो न तो खुद खाए और न किसी के खाने की राह प्रशस्त करे तो देश में भारी फर्क पड़ेगा।

मोदी जी ने शुरू में ही कहा था कि ‘‘मैं न तो खाऊंगा और न खाने दूंगा।’’

खुद को लेकर उन्होंने इस वादा को पूरी तरह निभाया।

साथ ही, वैसा काम भी नहीं किया जिससे किसी कुर्सीधारी को यह प्र्रेरणा मिले कि वह खा सकता है।

  फिर भी सरकार के विभिन्न स्तरों पर खाने वाले खा ही रहे हैं।लोगाबाग पीड़ित हो रहे हैं।

  वैसे लोगों के दिल ओ दिमाग में फांसी का भय पैदा करना अब जरूरी हो गया है।

  सेंटर फाॅर पाॅलिसी रिसर्च के सिनियर फेलो राजीव कुमार ने मार्च, 2014 में लिखा था कि 

‘‘देश का सबसे बड़ा दुश्मन भ्रष्टाचार है।

यह देश के लिए दीमक की तरह है।’’

ऐसी बात अन्य अनेक नामी गिरामी लोग कहते रहे हैं।

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  आने वाले दिन इस देश के लिए कठिन होने वाले हैं।

बाह्य व आंतरिक सुरक्षा पर भारी धन खर्च करना होगा।

जितना खतरा बाहरी दुश्मन देशों से है,उससे कम खतरा भीतरघातियों से नहीं है।

यदि सरकारी धन इसी तरह भ्रष्टाचार में लूटे जाते रहेंगे तो 

देश की सुरक्षा और विकास के लिए धन की कमी हो जाएगी।

हालांकि मोदी सरकार ने बड़ी मात्रा में लूट को रोका भी है।

पर वह काफी नहीं।

चीन आज दुनिया के दारोगा की भूमिका अमेरिका से छीन लेने के लिए प्रयत्नशील है ।

 उसके पीछे चीन की  आर्थिक ताकत है।

आर्थिक ताकत से सामरिक ताकत बढ़ती है।

 ऐसा इसलिए भी संभव हुआ क्योंकि चीन में ए ग्रेड के भ्रष्टों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है।

2013 में चीन के  पूर्व रेल मंत्री को फांसी की सजा दी गई थी।

बाद में उसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया। 

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इसलिए इस देश में भी ऐसी व्यवस्था हो कि ए ग्रेड के भ्रष्टों यानी बड़े भ्रष्टों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान हो।

  बी-ग्रेड के भ्रष्टों के लिए आजीवन कारावास और उसकी अपेक्षा कम पैसांे का घोटाला करने वालों के लिए कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान हो।ऐसा होने पर जरूर फर्क पड़ेगा।

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इस देश के जो लोग भ्रष्टाचार के लाभुक नहीं हैं,वे मेरी सलाह को पसंद करेंगे।

जो लोग विभिन्न क्षेत्रों में फैले भ्रष्ट तत्वों से पीड़ित हुए हैं या हो रहे हैं,वे तो कुछ ज्यादा ही पसंद करेंगे।

करेंगे तो नहीं किंतु यदि मोदी जी इस दिशा मंे कदम उठा लें तो उनका जन समर्थन भी काफी बढ़ जाएगा।

वैसे भी नो रिस्क, नो गेन !!

हालांकि इस कदम में कोई रिस्क नहीं है, गेन ही गेन है।

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--14 अगस्त 21


   


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