गुरुवार, 14 जनवरी 2021

 प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र

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मान्यवर प्रधान मंत्री जी,

  सादर नमस्कार !

आप अच्छा काम कर रहे हैं।

मेरा आपको समर्थन है।

   इस देश की तीन सबसे बड़ी बीमारियों की आपने

पहचान कर ली है।

वे हैं -

राष्ट्रद्रोह,

भ्रष्टाचार 

और राजनीति में वंशवाद-परिवारवाद।

इनमें से राष्ट्रद्रोह व वंशवाद के खिलाफ आपकी मुहिम को सफलता मिलती नजर आ रही है।

पर,भ्रष्टाचार के मोर्चे पर आपको अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

हां,पी.एम.ओ.व मंत्रिमंडल स्तर के कामकाज में सन 2014 के बाद भारी सकारात्मक फर्क आया है।

  देश को बचाना है तो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कुछ और कड़ा बनकर कठोर कार्रवाई आपको करनी ही होगी।

संविधान में संशोधन करना पड़े तो वह भी करना चाहिए।

भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए मंत्री से नीचे यानी अफसर स्तर पर अधिक काम करने की जरूरत बनी हुई है।

  जिस देश में सरकारी -गैर सरकारी भ्रष्टाचार, देशद्रोहियों-जेहादियों को ताकत पहुंचाता रहा हो, वहां इस समस्या की ओर आपको और गंभीर

होना ही पड़ेगा।

(1993 में मुम्बई में विस्फोट करने के लिए दाउद के लोगों ने मुम्बई के कस्टम अफसरों को रिश्वत देकर विस्फोटकों से भरी डांेगियों को सफलतापूर्वक तटों तक पहुंचाया था।

विस्फोटकों को सही स्थानों तक टपाया भी था।

कई सौ लोगों को विस्फोटों से उड़ाया था।)

सांसद फंड ने अधिकतर बड़े अफसरों व सांसदों को कमीशनखोर बना दिया है।

अफसरों के भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने की नैतिक ताकत अधिकतर सांसदों ने खो दी है।

  नतीजतन अधिकतर अफसर बेखौैफ होकर व सत्ताधारी नेताओं से मिलकर लूट रहे हैं।

(कुछ अफसर व सांसद अपवाद हैं।)

अनेक राजनीतिक कार्यकत्र्ता सांसद-विधायक  फंड के ठेकेदार बन गए हैं।राजनीति का व्यवसायीकरण हो चुका है।

इसलिए प्रधान मंत्री जी,

सांसद फंड बंद करके भ्रष्टाचार से लड़ने की ठोस शुरूआत कीजिए।

  राज्यों से भी आग्रह करिए कि वे विधायक फंड बंद करें।

वंशवादी-परिवारवादी राजनीतिक दल तो अपने -आप कमजोर होते जा रहे हैं-अपनी ही गलतियों से।

   यदि ममता बनर्जी अगला चुनाव हारेंगी तो उसमें अपराध व घुसपैठियों के साथ-साथ उनके भतीजे का भी भारी योगदान होगा।

  लेकिन आप इस खबर को सही मत मानिए कि आपके डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के जरिए सारे पैसे लाभुकों को ही मिल जा रहे हैं।

  नमूने के तौर पर कुछ सुदूर स्थानों में स्थित बैंकों के परिसरों में सादी पोशाक में खुफिया एजेंसी के लोगों को लगाइए।

  यदि खबर मिले कि वहां कोई दलाल लाभुकों से कमीशन नहीं ले रहा है तभी संतुष्ट होइए।

ध्यान रहे कि हमें यह खबर मिलती रहती है कि अधिकतर जगहों में कमीशन के पैसे दलाल व बैंककर्मी आपस में अब भी बांट रहे हैं।

बाकी पैसे ही लाभुक अपने पास रख पाते हैं।

---बिहार का एक ग्रामीण।

   14 जनवरी 21 

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मुझे उस ग्रामीण ने अपने टूटे -फूटे शब्दों में लिखकर भेजा था।

मैंने उसे सुधार कर यहां आपके लिए प्रस्तुत कर दिया।

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--सुरेंद्र किशोर -

 


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