बुधवार, 15 सितंबर 2021

    16 वीं सदी का चित्तौड़ और

    आज का अफगानिस्तान !

    कितना फर्क-कितनी समानता ???

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--सुरेंद्र किशोर--

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16 वीं सदी में चित्तौड़ की तीन हजार महिलाओं ने

एक साथ खुद को जला लिया था।

उसे जौहर कहा गया।

  अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ आज जो अत्याचार तालबानी कर रहे हैं,उसकी तस्वीरें टी.वी. पर देख कर

 चित्तौड़ की महिलाओं के बलिदान का कारण समझ में नहीं आया ? !!!

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तब कथित ‘‘महान अकबर’’ ने चित्तौड़ गढ़ के किले को घेर

रखा था।

 राजपूत महिलाएं समझ गईं थी कि यदि वे जिंदा रह गईं तो उनके साथ आतताई क्या-क्या करेंगे।

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जिन लोगों के हाथों में तलवारें थीं,उनकी महिलाओं को तो जौहर करना पड़ा था।

मुगल काल में इस देश के जिन आम लोगों के पास हथियार नहीं थे,उनके व उनके परिवार के साथ क्या-क्या हुआ था ?

उसकी कल्पना आज के अफगानिस्तान को देख कर आसानी से की ही जा सकती है।

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कुछ देशी-विदेशी शक्तियां भारत में भी ‘तालिबान सदृश्य शासन कायम करने की कोशिश में हैं।

हमारे यहां के वोटलोलुप नेतागण व कुछ खास विचार धारा के बुद्धिजीवी व इतिहास लेखक उनकी ऐसी घृणित कोशिश को जाने-अनजाने दशकों से बल पहुंचाते रहे हैं।

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अब समझ लीजिए कि यहां भी क्या-क्या  हो सकता है !

यदि आप संभले नहीं ,सचेत नहीं हुए और वैसे तत्वों का डटकर विरोध नहीं किया तो एक बार फिर ‘जौहर’ करना पड़ेगा।

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अफगानिस्तान में हो रहे अत्याचारों पर आज के भी कुछ भारतीय

नेता व बुद्धिजीवी पर्दा डाल रहे हैं।

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ठीक उसी तरह जिस तरह तीन हजार महिलाओं को जौहर करने पर मजबूर कर देने वाले शासक को भारत के कुछ इतिहासकारों व वोटलोलुप नेताओं ने ‘महान’ बताया।

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15 सितंबर 21


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