रविवार, 26 सितंबर 2021

                 एक 

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  सेंसेक्स 60 हजार अंक के स्तर को पार कर गया।

याद आता है कि 2016 में किसी ने लिखा था कि यदि रघुराम राजन भारत छोड़ते हैं तो देश से करीब सौ अरब डालर का निवेश बाहर चला जाएगा।

  साफ है कि भारत ऐसे उदारवादी विश्लेषकों और कथित अर्थ -शास्त्रि़यों के दंभ से कहीं बड़ा है।

         -- अभिषेक,दैनिक जागरण

             26 सितंबर, 21 

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                दो

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     पढ़िए एक नोबेल विजेता अर्थशास्त्री 

     का अनर्थ शास्त्र

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‘‘चाहे यह भ्रष्टाचार का विरोध हो या भ्रष्ट के रूप में देखे जाने का भय,

शायद भ्रष्टाचार अर्थ -व्यवस्था के पहियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण था, इसे काट दिया गया है।

मेरे कई व्यापारिक मित्र मुझे बताते हैं निर्णय लेेने की गति धीमी हो गई है।.............’’

--नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी,

हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स

23 अक्तूबर, 2019

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       तीन

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इस साल जून में यह खबर आई कि भारत का फाॅरेन एक्सचेंज रिजर्व बढ़कर 600 अरब डाॅलर हो चुका है।

यह एक रिकाॅर्ड है।

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      चार

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पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने इसी जुलाई में कहा कि 

केंद्र सरकार अर्थ व्यवस्था को ठीक से चलाने में विफल रही है।

उसकी रूचि सिर्फ सरकारी खजाना भरने में है।

(अन्य अधिकतर नेताओं की रूचि तो निजी खजाना भरने की रहती है।)

क्या खुर्शीद साहब को इस तथ्य का भी ज्ञान नहीं है कि कोविड-19 के कारण भारत ही नहीं बल्कि लगभग पूरी दुनिया की सरकारों की अर्थ-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

इसके बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां देखने लायक हंै यदि आंखें खुली हों।

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       पांच

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 खुर्शीद ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी शासन हमें सौंप दें ।हम दिखा दंेगे कि अर्थ व्यवस्था कैसे ठीक रखी जाती है।

दरअसल कांग्रेस नेता एक बार फिर सत्ता पर कब्जा करके

नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी के सुझाए रास्ते पर चलना चाहते हैं।

यानी भ्रष्टाचार को एक बार फिर अर्थ व्यवस्था का अनिवार्य अंग बना देना चाहते हैं।

(राहुल गांधी को ‘न्याय योजना’ का मंत्र अभिजीत बनर्जी ने ही दिया है। इतने करीबी हैं वे कांग्रेस के)

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सुरेंद्र किशोर

26 सितंबर 21

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