Sunday, February 1, 2009

चुनावी टिकट की शर्त

मध्य प्रदेश की कांग्रेस पार्टी ने एक अनुकरणीय काम किया है। उसने अपने वैसे सदस्यों को दो पेज का एक फार्म धराया है जो अगले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट चाहते हैं। चुनाव इसी साल होने वाला है। उस फार्म में क्षेत्र के भाजपा विधायकों, मंत्रियों और प्रमुख भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार की तथ्यपूर्ण जानकारियां भर कर देनी हैं। जो कांग्रेसी नेता ऐसी तथ्यपूर्ण जानकारियां देगा, उसको टिकट मिलने की संभावना रहेगी। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश विधान सभा के चुनाव में भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाने का फैसला किया है। कांग्रेस कह रही है कि मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चैहान तथा उनके मंत्रिमंडल के 14 सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं। उधर भाजपा की मध्य प्रदेश इकाई ने जवाबी हमला करते हुए कहा है कि यदि कांग्रेस ने अपने इस फार्म को टिकट का आधार बनाया तो हम अपने कार्यकर्ताओं से कहेंगे कि हमें मध्य प्रदेश से किसी एक ईमानदार कांग्रेसी नेता, पूर्व मंत्री या पूर्व या वत्र्तमान विधायक का नाम बताओ और इनाम में भाजपा का टिकट ले जाओ। अच्छा होता कि बिहार की सत्ताधारी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं से कहतीं कि सरकारी भ्रष्टाचार का मामला सबूत के साथ पकड़ो और इस तरह अगले चुनाव में टिकट पाने या फिर और कोई पद पाने की योग्यता हासिल करो। याद रहे कि बिहार की इन दिनों सबसे बड़ी समस्या सरकारी भ्रष्टाचार है जिस पर चाहते हुए भी नीतीश कुमार काबू पाने में असमर्थ हैं।

एक आंख-खोलू आंकड़ा
नब्बे के दशक तक इस देश में सिर्फ 18 लोग ऐसे थे जिनकी संपत्ति एक हजार करोड़ रुपए या उससे अधिक थी। आज ऐसे लोगों की संख्या बढ़ कर 533 हो चुकी है जिनमें प्रत्येक की संपत्ति चार हजार करोड़ रुपए या उससे अधिक है। दूसरी ओर इस देश में ऐसे लोगों की संख्या 84 करोड़ पहुंच चुकी है जिनकी रोज की औसत आय मात्र बीस रुपए है। इन 84 करोड़ लोगों में से 24 करोड़ लोगों की रोज की आय तो सिर्फ 9 रुपए है। यह सरकारी आंकड़ा है किसी प्रतिपक्षी नेता का आंकड़ा नहीं है।इस बढ़ती विषमता के कारण बढ़ रहे असंतोष को सरकार कैसे संभालेगी,यह देखना महत्वपूर्ण होगा।अभी तो इस देश के पक्ष-विपक्ष के अधिकतर नेतागण लोकतंत्र को नोट-तंत्र में पूरी तरह बदल देने के काम में लगे हुए हैं। नौ रुपए रोज की आय वाले अति गरीबों की ओर उनका ध्यान कभी जाएगा भी या नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल है।

चारा घोटाला केस में आगे क्या ?
चारा घोटाले में आरोपितों को इन दिनों कोर्ट से धुआंधार सजाएं मिल रही हैं। आईएएस अफसरों को भी सजाएं मिल रही हैं। एक वर्तमान और एक सेवानिवृत आईएएस अफसर को निचली अदालत सजा दे चुकी है। अन्य आरोपित आईएएस अफसर भी शायद सजा से नहीं बचें। संकेत तो यही है। पहले आईएएस अफसरों का समाज में भी बड़ा सम्मान था। पर बाद के दिनों में जब इस देश व प्रदेश के अनेक आईएएस अफसर भ्रष्ट नेताओं के साथ मिलकर देश-प्रदेश को लूटने के धंधे में लग गए, तो उनकी अब वह इज्जत समाज में नहीं है जो कभी थी। साथ-साथ जब ऐसे लोगों को कोर्ट से सजा मिलती है तो इनके नाम पर कोई रोने वाला भी नहंीं मिलता है। 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले से संबंधित कुल 53 मुकदमे दायर हुए थे। इन में से अब तक 28 मुकदमों में फैसला आ चुका है। सभी मामलों में अधिकतर आरोपितों को सजाएं मिली हैं। इन मुकदमों को करीब से देखने वाले लोगों का अनुमान है कि बाकी 25 मामलों में भी कोई अलग फैसला नहीं होने वाला है। इन में से कई ऐसे मुकदमे फैसला का इंतजार कर रहे हैं जिनमें कई नेतागण आरोपित हैं। उनका क्या होगा ? बिहार व झारखंड के अनेक लोगों की आंखें उन मुकदमों की ओर लगी हुई हैं। सजल चक्रवर्ती को सजा की मात्रा पर सुनवाई के दौरान सी।बी.आई. के वकील ने अदालत से यह अपील की थी कि वरीय अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध के मामलों में नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।यानी सी.बी.आई.यह कह रही थी कि जिसकी जितनी बड़ी जिम्मेदारी, गलती होने पर उसको उतनी ही अधिक सजा मिलनी चाहिए। तभी अन्य लोग भ्रष्टाचार करने से डरेंगे। देखना है कि आरोपित नेताओं का क्या होता है और उनके केस का कब फैसला होता है! क्या अगले लोक सभा चुनाव से ठीक पहले उन नेताओं के केस का फैसला होगा ? यह तय तो नहीं है, पर शायद संयोग से उसी समय फैसला हो ! फिर तो फैसले के अनुसार पक्ष विपक्ष को उसका राजनीतिक लाभ मिलना तय है। क्योंकि अब भी जन मानस में कोर्ट के किसी फैसला के लिए सम्मान का भाव मौजूद है।

शाबास मायावती !
राजनीति में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में मायावती की भले कोई रूचि नहीं हो,पर नदियों के प्रदूषण को रोकने की दिशा में उत्तर प्रदेश की दबंग मुख्यमंत्री ने हाल में ठोस कदम उठाया है। बिहार सहित अन्य प्रदेशों के मुख्य मंत्रियों को कम से कम इस मामले मेंे मायावती से शिक्षा लेनी चाहिए। लखनऊ के पास से बह रही गोमती नदी को पूरी तरह प्रदूषणमुक्त करने के लिए मायावती सरकार ने फिलहाल 170 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की हैं। लखनऊ में सीवेज शोधन संयंत्र का शिलान्यास हो चुका है। बन कर तैयार हो जाने पर 34 करोड़ 50 लाख लीटर दूषित जल का हर दिन शोधन होगा। यानी, लखनऊ के गंदे नालों का पानी शुद्ध बन कर ही गोमती में गिरेगा। उम्मीद है कि मायावती जल्दी ही गंगा को भी प्रदूषणमुक्त करने के लिए ऐसा ही कदम उठाएगी। इस तरह यदि उत्तर प्रदेश में गंगा और गोमती साफ हो गई तो फिर तो बंगाल, बिहार और दिल्ली की सरकारों पर भी ऐसा करने के लिए जन-दबाव पड़ेगा।

एक पुस्तक की प्रतीक्षा
कल्पना कीजिए कि जवाहर लाल नेहरू और डा श्रीकृष्ण सिन्हा ने एक दूसरे को अपने पत्रों में क्या-क्या लिखा होगा। एक ने दूसरे को अनेक पत्र लिखे थे। वे पत्र अब तक अप्रकाशित हैं। पता चला है कि उन पत्रों की प्रतियां बिहार सरकार के पास भी नहीं हैं। डा श्रीकृष्ण सिंह का अपने सचिव को संभवतः यही निदेश था। इन पत्रों को अलग से पुस्तकाकार छपवाया जा रहा है। उस पुस्तक का जल्दी ही लोकार्पण होगा। राजनीति के पतन के इस दौर में यह पढ़ना दिलचस्प होगा कि गांधी युग के उन दो महारथियों ने एक दूसरे को क्या- क्या लिखा था।
तापमान (अगस्त, 2008)

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