सोमवार, 3 सितंबर 2018

  कांग्रेस मांग कर रही है कि राफेल डील की जांच 
जे.पी.सी.यानी संयुक्त संसदीय समिति करे।
 जे.पी.सी के बदले कांग्रेस राफेल मामले को अदालत तक क्यों नहीं ले जा रही है ?
 क्योंकि अदालत तो घोटाले का सबूत मांगेगी।
जेपीसी में उसकी जरूरत शायद न पड़े।मामला जेपीसी में रहेगा और 2019 तक प्रचार होता रहेगा।
बोफर्स घोटाले की जांच के लिए कांग्रेस के शंकरानंद के नेतृत्व में जे.पी.सी.बनी थी।उस जेपीसी ने कह दिया कि बोफर्स घोटाला, कोई घोटाला ही नहीं है।जबकि खुद  आयकर न्यायाधीकरण ने 2011 में कहा कि क्वात्रोचि को दलाली के पैसे मिले हैं,उस पर भारत सरकार का आयकर बनता है।
आज भी बोफर्स का मामला सुप्रीम कोर्ट में है।सुप्रीम कोर्ट को विचार करना है कि वह केस फिर से खुले या नहीं।
केंद्र सरकार को चाहिए कि वह खुद राफेल का मामला सुप्रीम कोर्ट को देकर उससे पूछे कि राफेल डील के अघोषित पहलू को लोगों के बीच प्रचारित किया जाए या नहीं ?
कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि बोफर्स मामले में भी कुछ ऐसी बातें 
हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।सुप्रीम कोर्ट उस पर भी कुछ कहे।शायद उससे कांग्रेस को राहत मिले।

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