शनिवार, 1 जून 2019

चिदम्बरम परिवार को कोर्ट से लगातार मिल रही राहत तो अभूतपूर्व है


कल जिन-जिन नेताओं ने शपथ ली, उनमें से एक व्यक्ति आर.के. सिंह को मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सहनशीलता शब्द के सही अर्थों में जीरो है। ऐसे मंत्री और भी होंगे, पर मैं उन्हें नहीं जानता।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मंत्री का तो कहना ही क्या! इतने दिनों तक सत्ता में रहने के बावजूद अपने लिए दुनिया के किसी हिस्से में एक—दो कमरे का फ्लैट तक नहीं खरीदा। मोदी का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अब तेज होने वाला है।

गत पांच साल में भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम में उन्हें अपनी ही सरकार के बड़े अफसरों व अदालतों से जितना सहयोग मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। चिदम्बरम परिवार को कोर्ट से लगातार मिल रही राहत तो अभूतपूर्व है। इससे लोगों में कोर्ट के बारे में अच्छी राय नहीं बनती।

मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की धार कोई कुंद न कर सके, इसके लिए भ्रष्टाचार विरोधी मंत्रालय बनाकर उसकी जिम्मेवारी उस खास मंत्री को दे देनी चाहिए जिसकी ओर मेरा इशारा है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आम तौर पर एजेंसियां रिएक्टिव कार्रवाई करती है। उसे प्री एन्टिव याानी पहल करके पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए। उसके लिए कोई खास एजेंसी सारे मंत्रालयों, मंत्रियों और अफसरों पर नजर रखे। साथ ही उन माफिया गिरोहों पर भी जिनकी ओर वोहरा कमेटी ने नब्बे के दशक में ही इशारा किया था।

ताजा खबर यह है कि केंद्र सरकार 36 बड़े अफसरों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति सी.बी.आई. को नहीं दे रही है। मोदी के शासनकाल में भी सी.बी.आई. का यह आरोप रहा है कि केंद्र सरकार के संबंधित अफसर जल्दी अनुमति नहीं देते या फिर लटकाए रहते हैं। यह बीमारी पुरानी है। इससे इस देश के भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ा रहता है।

असम के मुख्यमंत्री प्रफुल्ल महंत के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति राज्यपाल जनरल सिन्हा ने नहीं दी थी। जबकि उन पर लालू प्रसाद की अपेक्षा अधिक गंभीर आरोप थे। 2007 में मायावती और 2013 में अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति संबंधित राज्यपालों ने नहीं दी।

इन घटनाओं से भ्रष्टाचार की राह में रोड़ों की ताकत का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे में सही जगह पर सही व्यक्ति को जिम्मेवारी देने से मोदी का लक्ष्य पूरा होगा और अंततः जनता को राहत मिलेगी।

इस बीच इसी महीने यह खबर आई है कि डी.ओ.पी.टी ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय करेगा। यह विभाग प्रधानमंत्री के अधीन है। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि भ्रष्टाचार इस देश की सबसे बड़ी समस्या है। इसी से अन्य अधिकतर समस्याएं पैदा होती हैं।

कोई टिप्पणी नहीं: