गुरुवार, 28 जून 2018

 मुम्बई महा नगर पालिका ने सड़कों की मरम्मत पर इस साल 100 करोड़ रुपए खर्च किये।
इसके बावजूद इस बरसात में ‘मरम्मत की गयी सड़कों’ में बड़े -बड़े गड्ढे पड़ गए।
ऐसा हर साल होता है।
अपना देश ऐसा ही है।
ऐसा आज से नहीं है।दाना पुर के चर्चित उर्दू पत्रकार मोईन अंसारी ने नब्बे के दशक में मुझे एक भ्रष्टाचार -कथा सुनाई थी।
 कई दशक पहले दाना पुर विधान सभा क्षेत्र के मतदाताओं ने  एक ईमानदार नेता को विधायक चुन लिया था।
उस विधायक ने शहर की मुख्य सड़क को सीमेंटेड बनवा दिया।
पर, अगली बार एक अन्य नेता विधायक बने।नये विधायक ने आते- आते सीमेंटेड सड़क को तोड़वा कर उसे अलकतरा वाला बनवा दिया ताकि वह हर साल टूटे और हर साल मरम्मत की जरूरत पड़े ।
 एक बार दिवंगत मोईन चचा ने उस विधायक से पूछा,‘आपने ऐसा क्यों किया ?’
उस बेशर्म विधायक ने अपनी  निकली तोंद पर हाथ मारते हुए बेशर्मी से कहा कि ‘हमारा भी तो पेट है ! हमारा ठेकेदार भूखे मरेगा ?’
ऐसे ही यह देश चल रहा है ! पता नहीं, इस गरीब देश को  इस स्थिति से कौन और कब उबारेगा ? लोगों  से लिए गए परोक्ष-प्रत्यक्ष टैक्स के पैसों की ऐसी लूट किस अन्य देश में होती है ?

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