शुक्रवार, 13 मार्च 2020

ब्लादिमीर लेनिन ने कहा था कि
‘‘सभी क्रांतिकारी पार्टियां, जो अब मिट चुकी हैं,
इसीलिए मिटी कि वे 
घमण्ड से भर गयीं।
वे यह न देख पायी कि उनकी शक्ति कहां है और
अपनी कमजोरियां 
बताने से डरीं।
  लेकिन,हम नहीं मिटेंगे, 
क्योंकि हम अपनी कमजोरियों को 
बताने से डरते 
नहीं हैं।
और, उन्हें दूर करना सीखेंगे।
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   --लेनिन ग्रंथावली,
     रूसी संस्करण 
     खंड -27,  पृष्ठ-260
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भारत की कई कम्युनिस्ट और गैर कम्युनिस्ट पार्टियों 
पर लेनिन की बात लागू होती है।
यहां के अधिकतर राजनीतिक दल और नेता खुद अपनी गलतियों 
के बदले दूसरे 
दलों और नेताओं की गलतियां निकालने में ही 
अधिकांश समय लगाते हैं।
नतीजे सामने हैं। 
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--सुरेंद्र किशोर,
13 मार्च, 2020