गुरुवार, 27 मई 2021

 कोविड काल ने दिए कुछ अतिरिक्त दर्द

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बुद्ध ने कहा था,

1.-संसार में दुःख है।

2..-दुःख के कारण हैं।

3.-दुःख के निवारण हैं।

4.-निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग है।

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खैर , बुद्ध तो संन्यासी हो गए थे।

पर, जो गृहस्थ जीवन में हैं , वे अपने गम कैसे कम करें ?

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उनके लिए सन 1960 में निर्मित ‘अमृत’ फिल्म का गाना है।

उसे गुनगुना कर वे अपने कष्ट थोड़ा कम करें।

गाना है--

‘‘दुनिया में कितना गम है,

मेरा गम कितना कम है !

ये दुनिया एक मौसम है

मेरा गम कितना कम है !’’

--आदि आदि

इसे सुनने के लिए यू ट्यूब का सहारा लें।

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 यह कहा जाता रहा है,

--सब अकेले आते हैं और अकेले ही जाते हैं।

 फिर भी इसमें भी यह मानकर चला जाता था कि अस्पताल व श्मशान घाट तक तो साथ में लोग जाते ही जाते रहे हैं।

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कोविड काल में थोड़ा-बहुत यह भी बदल गया।

हालांकि हर मामले में नहीं।

अब भी अनेक परिजन व डाक्टर आदि जान पर खेल कर कोविड मरीजों का साथ दे ही रहे हैं।

पर, कुछ मामलों में परिजन न तो अस्पताल साथ जा रहे हैं और न ही श्मशान।

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--सुरेंद्र किशोर

27 मई 21 


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