शनिवार, 3 फ़रवरी 2018


   प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के 
तहत देश में बनने वाली सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण व मुआवजा का कोई प्रावधान ही नहीं है।
   क्या प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को
इस बात का पता है ?
  क्या पक्ष या  विपक्ष के किसी सांसद ने यह सवाल संसद में कभी उठाया कि सरकार किसानों की निजी भूमि पर जबरन कब्जा कर प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क क्यों बना दिया करती है ?
नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए जब जमीन की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए तो सरकार किसानों को उनकी कृषि भूमि के सरकारी रेट का चार गुना देती  है।पर ऐसा ही प्रावधान  प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़कों  के लिए क्यों नहीं है ?
  जब इस योजना की शुरूआत की गयी थी तो यह कल्पना थी कि पहले से मौजूद कच्ची सड़कों को प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत लाकर उसे पक्की बना दिया जाएगा।
यह काम हुआ भी।
पर जब पतले बांधों और पगडंडियों पर इस योजना के तहत ग्रामीण सड़कें बनने लगीं तो अतिरिक्त जमीन की जरूरत महसूस हुई।
 फिर क्या था ! आसपास के किसानों की कीमती जमीन पर शासन का कब्जा अभियान शुरू हो गया।
जब भी किसी ने  अदालत की शरण ली तो सरकार ने कहा कि हमारे पास इस मद में कोई फंड ही नहीं है।फिर कोर्ट ने नाजायज तौर से बनी सड़कों को उजाड़ देने का आदेश दे दिया।
कई साल पहले बिहार के भोज पुर जिले के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री की जमीन पर से इसी तरह की सड़क को उजाड़ देने का भी पटना हाई कोर्ट का आदेश हुआ था। 
  क्या  मोदी सरकार के कार्य काल में भी सरकार इस अघोषित ‘भूमि हड़प अभियान’ को  जारी रखेगी या इस बजट में मुआवजा का प्रावधान करेगी ?   ं 


कोई टिप्पणी नहीं: