बुधवार, 11 जुलाई 2018

 कई दशक पहले इस देश में एक  कहावत प्रचलित थी।वह यह कि ‘गंुडे और गली के कुत्ते की जिंदगी दस  से पंद्रह साल की ही होती है।’
पर जब से गुंडों को जातीय और राजनीतिक संरक्षण मिलने लगा,तब से उनकी आयु बढ़ गयी है।हां,बेचारे गली के कुत्ते 
की जिंदगी उतनी ही पर अभी ठिठकी हुई है।  

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