शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

फुलगांवा कांड पर कुछ फुटकर  टिप्पणियां
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  फुलवामा कांड के कारण उत्पन्न देशव्यापी गुस्से व गम के माहौल में 
केंद्र सरकार को जो करना चाहिए,वह तो कर  रही है।कुछ और करने भी जा रही है।
पर, आम देशभक्त व शांतिप्रिय लोगों को भी इस देश के भीतर के  उन वोटलोलुप और जेहादी तत्वों को भी इस अवसर पर एक बार फिर याद करके उन्हें ठीक से पहचान लेना चाहिए। 
  1.-जेएनयू में कुछ लोगों ने ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्ला इंशा अल्ला’ का नारा लगाया।पर उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया तो दिल्ली राज्य की सरकार मुकदमा चलाने की अनुमति ही नहीं दे रही है।
   2.-अतिवादी प्रतिबंधित संगठन सिमी के अहमदाबाद के जोनल सेके्रट्री साजिद मंसूरी ने 29 सितंबर 2001 को कहा था कि ‘जब हम सत्ता में आएंगे तो सभी मंदिरों को नष्ट कर देंगे।यह बयान 30 सितंबर 2001 के अखबार में छपा था।
अहमदाबाद धमाकों के बाद पकड़े गए सिमी सदस्य अबुल बशर ने बताया था कि ‘सिमी की इस नीति से प्रभावित हूं कि लोकतांत्रिक तरीके से यहां इस्लामिक शासन संभव नहीं है। उसके लिए एकमात्र रास्ता जेहाद है।’
जब सिमी ने ‘इस्लाम के जरिए भारत की मुक्ति’ का नारा दिया तो जमात ए इस्लामी ने उससे अपना संबंध तोड़ लिया।
 2001 में केंद्र सरकार ने सिमी पर प्रतिबंध लगाया तो सिमी के लोगों ने मिल कर 2002 में इंडियन मोजाहिद्दीन नामक नया आतंकवादी संगठन बना लिया।
इस पर एक राष्ट्रीय दल से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुजरात दंगे के विरोध में इंडियन मुजाहिददीन का गठन हुआ।
 उसी दल के एक दूसरे पूर्व केंद्रीय मंत्री  सिमी पर से प्रतिबंध हटाने के लिए दायर याचिका के मुख्य वकील थे। 
 दूसरी ओर हिन्दी इलाके के तीन क्षेत्रीय दलों के शीर्ष नेताओं ने बयान दिया कि सिमी छात्रों का एक निर्दोष संगठन है।
इन सब बातों से क्या देश-विदेश के आतंकवादियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा ?
3.-2008 में मुम्बई पर हुए आतंकी हमले के बाद दो पूर्व मुख्य मंत्रियों ने कहा कि इसमें आर.एस.एस.का हाथ है।
बटाला हाउस मुंठभेड़ के बाद भी एक बड़े नेता ने,जो मुख्य मंत्री भी रह चुके हैं, बयान दिया कि मुंठभेड़ फर्जी थी।
4.-कई साल पहले आतंक के आरोप में एक भारतीय मुस्लिम जब आस्ट्रेलिया में गिरफ्तार हुआ तो इस देश के प्रधान मंत्री ने कहा था कि इस गिरफ्तारी से मुझे पूरी रात नींद नहीं आई।यह पता लगाने से पहले कि वह गिरफ्तार व्यक्ति दोषी था या निर्दोष, प्रधान मंत्री की ओर से ऐसा बयान आ गया।
ऐसे बयानों से किसका मनोबल बढ़ता है ?
5.-अतिवादी संगठन पोपुलर फं्रट आॅफ इंडिया पर कतिपय राज्य में प्रतिबंध है।केरल की वाम सरकार की भी राय में यह सिमी का ही नया रूप है।
पर उसके कार्यक्रम में एक पूर्व उपराष्ट्रपति शामिल हुए थे।
5.-इन दिनों इलेक्ट्रानिक मीडिया के हिस्से के जरिए इस देश में फैले आतंकियों के अंडरग्रांउड लड़ाकों के पक्ष में आतंकियों के ओवरग्राउंड समर्थक खुलेआम प्रचार करते रहते हैं।इससे अनेक नौजवानों को प्रेरणा मिलती होगी।
आश्चर्य है कि कुछ टी.वी चैनल आखिर क्यों इसकी अनुमति देते हैं ?
कुछ माह पहले लाइव चर्चा में टी.वी.पर एक मौलाना को यह कहते हुए मैंने 
सुना कि हम जब 18 करोड़ थे तो पाकिस्तान बना था।अब हमलोग फिर 18 करोड़ हो गए हैं।
पर इस देश के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि अधिकतर मुस्लिम आबादी आतंकियों की मानसिक गिरफ्त से अभी बाहर लगती है।
यहां तक कि असदुददीन ओवैसी जैसे एकपक्षीय व अतिवादी नेता को भी बगदादी के संगठन की ओर से जान से मारने की धमकी मिली हुई है।
  यह भी खबर है कि पाकिस्तान की नई पीढ़ी के  अनेक युवा वहां के अतिवादियों के डिक्टेशन मानने को तैयार नहीं हैं।  
  

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