बुधवार, 29 अगस्त 2018

  इस देश के नेताओं और बुद्धिजीवियों के एक हिस्से के लिए
‘सनातन संस्था’ कोई समस्या नहीं है तो दूसरा हिस्सा इंडियन मुजाहिद्दीन और पी.एफ.आई.के प्रति नरम है।
    जिस तरह नेताओं की एक जमात सिर्फ अपने दल में ईमानदार खोजती है तो दूसरी जमात सिर्फ दूसरे दल में बेईमानों की उपस्थिति का प्रचार करती रहती है।

  
  

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