मंगलवार, 13 अगस्त 2019

कश्मीर के 10 जिले मुस्लिम बहुल हैं।
इसके अलावा इस देश में अन्य नौ जिले भी हैं जो मुस्लिम बहुल हैं।
वहां तो किसी तरह का कोई प्रतिबंध लगाने की अभी जरूरत नहीं पड़ रही है।
  कश्मीर में इसलिए पड़ रही है क्योंकि वहां के कुछ स्थानीय आतंकवादी, विदेशी आतंकवादियों से मिलकर कश्मीर में जेहाद कर रहे हैं।बलपूर्वक कश्मीर को भारत से अलग करने की कोशिश में लगे हैं।
जबकि 1994 में नरसिंहराव के शासन काल में ही भारतीय संसद ने यह सर्वसम्मत प्रस्ताव पास किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
पर उधर जेहाद की कोशिश के सिलसिले में आतंकी  लगातार हिंसा कर रहे हैं।
ऐसा वे इसलिए कर पा रहे हैं क्यांकि धारा-370 और 35 ए में उन्हें कई विशेष अधिकर मिले हुए हैं।
  उन विशेषाधिकारों की सुविधा का लाभ उठाकर ही नब्बे में जेहादियों ने कश्मीर के बड़ी संख्या में पंडितों की वहां हत्या कर दी।उनकी  महिलाओं के साथ बलात्कार किया।लाखों पंडितों को कश्मीर से भगा दिया।
 इन मामलों में क्या किसी को सजा हुई ?
   रणदीप सुरजेवाला ने 2 सितंबर 2018 को हरियाणा में कहा था कि ‘कांग्रेस ऐसी पार्टी है जिसके खून में ब्राह्मण समाज का डी.एन.ए. है।’
  नब्बे के बाद कश्मीर में करीब दो साल  कांग्रेस की भी सरकार रही है।वहां के उन पीडि़त ब्राह्मणों को न्याय दिलाने  के लिए कांग्रेस सरकार ने क्या किया ?
क्या इसलिए  कुछ नहीं किया क्योंकि वहां के ब्राह्मण वोट निर्णायक नहीं थे ?
 या शायद चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाते क्योंकि 370 और 35 ए की सुविधा पाकर वहां की स्थिति विशेष बन चुकी है ?


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