रविवार, 29 दिसंबर 2019


 सन 2014 में हरिवंश जी जब बिहार से राज्य सभा के सदस्य चुने गए थे तो मैंने लिखा था कि संविधान निर्माताओं ने ऐसे ही लोगों को ध्यान में रखते हुए राज्य सभा का गठन किया था।
  अब उन पर 
‘‘पांच सालों का संसद सफर’’
नामक पुस्तक आई है।
पुस्तक न सिर्फ नयनाभिराम है,बल्कि जानकारियों से भरी हुई हैं। 
जो लोग उनके बारे में जानने में रूचि रखते हैं ,इस पुस्तक में  मोटा -मोटी वह कुछ मिलेगा--
उनकी जीवन यात्रा,उनके योगदान तथा विचार।
  हरिवंश जी को मैं एक बहुत अच्छे लेखक,उतने ही अच्छे संपादक और वक्ता के रूप में दशकों से जानता रहा हूं।
सबसे बड़ी बात यह कि वह निराभिमानी और सहृदय भी हैं।
 नीतीश कुमार एक पढ़ने -लिखने वाले नेता नहीं होते तो शायद हरिवंश जी का राज्य सभा के लिए चयन नहीं होता।
डा.राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि संसद एक ऐसी ऊंची जगह है जहां से कुछ कहने पर वह आवाज दूर -दूर तक सुनी जाती है।
हरिवंश जी ने भी सदस्य के रूप में अपनी गरिमापूर्ण भूमिका के कारण राजग के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी प्रभावित किया। राजग ने उन्हें उप सभापति पद के अनुकूल पाया।
अपने कार्यकाल के प्रारंभिक दिनों में तो हरिवंशजी राज्यसभा में लगातार हो रहे भारी हंगामा और शोरगुल के कारण परेशान से दिखे।
इसके खिलाफ उनका एक सख्त लेख ‘फस्र्टपोस्ट’ पर आया भी था।
पर शुक्र है कि अब उस सदन का माहौल भी धीरे -धीरे बदल रहा है।फिर भी वह गरिमा नहीं लौटी है जो 50-60 के दशकों में थी।  
    इस यशस्वी पत्रकार को सम्मानित जगह मिलने से मेरे जैसा पत्रकार भी गौरवान्वित हुआ है।
उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ-
--सुरेंद्र किशोर--28 दिसंबर 2019


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