शनिवार, 9 दिसंबर 2017

  इन दिनों इस देश के अनेक बुद्धजीवी एक बात को 
लेकर  चिंतित लग रहे हैं।
उनकी चिंता है कि प्रतिपक्ष कमजोर होता जा रहा है।यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
व्यक्तिगत रूप से मेरी भी यही राय है।
 इस समस्या का समाधान आखिर कौन करेगा ?
  वही करेगा जिसने प्रतिपक्ष को कमजोेर किया है।
मेरा मानना है कि प्रतिपक्ष ने खुद ही प्रतिपक्ष को कमजोर किया है।
 आज का प्रतिपक्ष जब  सत्ता में था तो उनमें से बहुलांश   पर लगातार घोटालों और महा घोटालों के आरोप लगते रहे।
उन पर यह आरोप भी था कि उसने अल्पसंख्यकों के बीच के अतिवादियों का तुष्टिकरण किया।अल्पसंख्यकों को लेकर खुद कांग्रेस की ए.के.एंटोनी कमेटी की रपट में भी इस तरह की  बात कही गयी है।
  इन दो बातों का भाजपा ने पूरा लाभ उठाया।
  अब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।
बल्कि कहिए कि बन ही चुके हैं।घोषणा बाकी है।
क्या राहुल जी  उपर्युक्त कारणों से सहमत हैं ?
यदि नहीं तो अपनी पार्टी की लगातार हार के असली कारणों
का वे खुद पता लगाएं और लगवाएं। जरूरत समझें तो देश-विदेश की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवा लें।
चिंतित बुद्धिजीवी उन्हें इस काम में मदद करें।सब मिल कर उन कारणों को दूर करने के गंभीर उपाय करें।
उसके बाद  ही वे मतदाताओं से उम्मीद करें कि वे उन्हें दोबारा मजबूत करेंगे।
  यह मान कर चलें कि मतदाता कभी गलत नहीं होते।
मेरी समझ से गत विधान सभा चुनाव में न पंजाब के मतदाता गलत थे और न ही उत्तर प्रदेश के ।
आम मतदाताओं को बेहतर सरकार चाहिए।यहां वैसे मतदाताओं की बात नहीं की जा रही है जो धर्म और जाति के नशे में डूबे रहते हैं।
 इसे नहीं भूलना चाहिए कि सोफ्मा जैसी ज्यादा अच्छी तोप को छोड़कर जब केंद्र सरकार ने कम अच्छी तोप बोफर्स खरीद ली तो जनता नाराज हो गयी थी। इसीलिए 1989 में कांग्रेस हार गयी।जनता सब जानती है। 
  
     

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