गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

सिमी ने वर्ष 2001 में ही बताया दिया था अपना लक्ष्य, अब संगठन का नाम ही बदला है ...


यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी के नेतृत्व में भाजपा का शिष्टमंडल 19 अगस्त, 2008 को चुनाव आयोग दफ्तर गया था। शिष्टमंडल ने आयोग से मांग की थी कि सिमी जैसे आतंकवादी संगठन का पक्ष लेने वाले दलों की मान्यता खत्म की जाए। सिन्हा व शौरी ने तब सही काम किया था।

पर कल राॅकेट लांचर के साथ मौलवी और इंजीनियरिंग छात्र सहित 10 लोग धराए हैं। एन.आई.ए. ने उन आतंकियों को पकड़ा है। देश को दहलाने व कुछ हस्तियों को नुकसान पहुंचाने की उनकी योजना थी। वे बगदादी के आइएस से प्रभावित हैं। विदेश से दिशा—निदेश ले रहे थे।

कल टी.वी. चैनलों के डिबेट शो में बैठकर कुछ हस्तियां उल्टे राष्ट्रीय जांच एजेंसी की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध कर रही थीं। इस पर यशवंत सिन्हा व अरुण शौरी जैसे समझदार नेताओं के भी विचार आने अभी बाकी हैं।

भाजपा विरोधी अन्य दल भी चुप हैं।

2019 में उनकी सरकार बन सकती है। फिर वे ऐसे आतंकियों के साथ कैसा सलूक करेंगे? यह यक्ष प्रश्न है। क्या जिस तरह कांग्रेसी सलमान खुर्शीद ने प्रतिबंधित सिमी की कोर्ट में वकालत की थी, एक बार फिर वैसा ही काम वे करेंगे?

याद रहे कि जब सिमी पर प्रतिबंध लगा तो उसके लोगों ने इंडियन मुजाहिददीन बना लिया।

केरल पुलिस सूत्रों के अनुसार  पोपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया सिमी का ही नया रूप है। सिमी की पत्रिका ‘इस्लामिक मूवमेंट’ सितंबर 1999 के संपादकीय ने सेक्यूलर लोकतंत्र के बजाए जेहाद और शहादत की अपील की।

सिमी (अहमदाबाद) के जोनल सेक्रेटरी साजिद मंसूरी ने टाइम्स आॅफ इंडिया (30 सितंबर 2001) को बताया था कि ‘जब भी हम सत्ता में आएंगे, हम मंदिरों को नष्ट कर देंगे और वहां मस्जिद बनाएंगे।’

अब तो ‘बगदादी की सेना’ से इस देश का सामना हो रहा है। आई.एस.आई.एस. ने वरीय ओवैसी को जान से मारने की पहले ही धमकी दे रखी है। क्योंकि ओवैसी ने आईएसआईएस का विरोध किया था।

यानी आईएसआईएस ऐसा संगठन है जिसे ओवैसी का ‘अतिवाद’ भी बहुत हल्का लगता है। वह अतिवादिता में सिमी से भी बहुत आगे है। इसके बावजूद इस देश के तथाकथित सेक्युलर दल व बुद्धिजीवी कल के खुलासे से कहीं से भी चिंतित नहीं हैं। बल्कि उन में से कुछ लोग एन.आई.ए. की ही आलोचना कर रहे हैं।

कल टीवी चैनलों में बैठकर कुछ लोग सनातन संस्था से इसकी तुलना कर रहे थे।

सनातन संस्था एक विवादास्पद सगठन है। पर क्या सनातन संस्था ने कभी यह बयान दिया है कि हम हथियारों के बल पर राजसत्ता पर कब्जा कर लेंगे और सत्ता में आने पर किसी के धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करके अपना धार्मिक स्थल वहां बना देंगे ? याद रहे कि जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया, उन पर केस चल रहा है।  

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